ये है गर्मियों में दूध उत्पादन बढ़ाने का रामबाण नुस्खा

ये है गर्मियों में दूध उत्पादन बढ़ाने का रामबाण नुस्खागर्मियों में पशुओं को खिलाएं हरा चारा।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

प्रतापगढ़। गर्मियों में पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या बढ़ जाती है, जिससे दुग्ध उत्पादन पर भी असर पड़ता है, ऐसे में इस समय हरे चारे में ज्वार की बुआई कर कई महीनों तक पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध रहता है।

हरा चारा

प्रतापगढ़ के जिला पशु चिकित्साधिकारी बृजेश सिंह बताते हैं, ''गर्मी में दुधारू पशुओं को सिर्फ भूसा खिलाने से दूध देना कम हो जाता है, इसलिए इस समय हरा चारा देना ज़रूरी हो जाता है। विभाग की तरफ़ से पशु पालकों को हरे चारे के बीज पर अनुदान भी मिलता है।''

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रबी की फसल काटने के बाद मिट्टी पलटने वाले हल से खेत में 15-20 सेमी. गहरी जुताई करनी चाहिए। इसके बाद दो-तीन बार हैरो या चार-पांच बार देशी हल चलाकर मिट्टी को भुरभुरा कर लेना चाहिए। बुआई से पहले पाटा चलाकर खेत को समतल कर लेना चाहिए। हरे चारे के लिए कई बार कटाई वाले बीज का चयन करना चाहिए। किस्म का चयन बोआई का समय और क्षेत्र अनुकूलता के आधार पर करना चाहिए।

बुवाई से पहले बीज का बीजोपचार करना चाहिये, जिससे बीज जनित रोगों से बचाव किया जा सके। बीज को बोने से पहले थायरम 2.5-3 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें। दीमक के प्रकोप से बचने के लिए क्लोरपायरीफास 25 मिली. दवा प्रति किलो बीज की दर से शोधित करना चाहिए। खरीफ में बुवाई के लिये जून के अन्तिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक का समय उपयुक्त रहता है। समय पर बोनी करने से, तना छेदक मक्खी का प्रकोप कम होता है।

सही पौध संख्या अच्छी उपज लेने के लिए आवश्यक है। देशी जातियों की पौध संख्या 90,000 प्रतिहेक्टेयर रखते हैं। ज्वार की उन्नत तथा संकर जातियों के लिए 150,000 प्रति हेक्टेयर पौध संख्या की अनुशंसा की जाती है। पंक्ति में बोआई देशी हल के पीछे कूडों में या फिर सीड ड्रिल से की जा सकती है। बीज तीन चार सेमी. गहराई पर बोना चाहिए।

हरा चारा

यह देखा गया है कि ज्यादा गहराई पर बोये गये बीज के बाद तथा अंकुरण से पूर्व वर्षा होने से भूमि की ऊपरी परत सूखने पर कड़ी हो जाती है जिससे बीज जमाव अच्छा नहीं होता है। भूमि में पर्याप्त नमी होने की स्थिति में उथली बोआई सर्वोत्तम पाई गई है। खरीफ के ज्वार में कई तरह के खरपतवार उग आते हैं, इसलिए इनके नियंत्रण के लिए, निराई करनी चाहिए। गर्मियों में 15-20 दिनों में सिंचाई करनी चाहिए, नहीं तो फसल सूख जाती है।

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