उत्तर प्रदेश

बीजेपी विधायक के डेंटल कॉलेज पर छात्रवृत्ति गबन करने पर एफआईआर दर्ज 

लखनऊ। राजधानी के पीजीआई क्षेत्र स्थित सरदार पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल एंड मेडिकल साइंस में छात्रवृत्ति घोटाले के आरोप में संस्थान के अध्यक्ष व मिर्जापुर जिले के चुनार विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक अनुराग सिंह के खिलाफ गुरुवार को विजिलेंस के इंस्पेक्टर डीएस राठौर ने पीजीआई थाना में धोखाधड़ी का केस दर्ज करवाया है।

इस मामले में भाजपा विधायक के साथ संस्थान के लेखा प्रबंधक पंकज कुमार व्यास और सुधीर शर्मा को भी आरोपी बनाया गया है, जिसकी जांच विजिलेंस के ही अधिकारी करेंगे।

छात्रों की शिकायत पर विजिलेंस ने पीजीआई थाने में दर्ज कराया मुकदमा दर्ज


विजिलेंस अधिकारी डीएस राठौर ने बताया कि, सरदार पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस में छात्रवृत्ति का घोटाला वर्ष 2008-09 के सत्र से चल रहा है। संस्थान के संचालक छात्र-छात्राओं से सभी सत्र की पूरी फीस जमा कराते थे और उसके बदले समाज कल्याण विभाग से मिलने वाली प्रतिपूर्ति की रकम गमन कर लेते थे। नौ छात्र-छात्राओं ने इसकी शिकायत की, जिसके बाद 14 मार्च 2016 को शासन ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद संस्थान के अध्यक्ष व भाजपा विधायक अनुराग सिंह, लेखा प्रबंधक पंकज कुमार व्यास व सुधीर शर्मा के खिलाफ अमानत में खयानत और सरकारी धन हड़पने का षड्यंत्र रचने का आरोपी पाते हुए केस दर्ज कराया गया।

इंस्पेक्टर ने बताया कि, सभी नौ छात्र-छात्राओं की शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम के रूप में 4326000 रुपए संस्थान ने हड़प लिए। उपरोक्त लोगों ने समाज कल्याण विभाग से प्राप्त सरकारी धन की बंदरबाट की है। पीजीआई थाना प्रभारी बृजेश राय के मुताबिक, विजिलेंस की तरफ से मुकदमा दर्ज कराया गया है और विवेचना भी विजिलेंस अधिकारी ही करेंगे। वहीं विजिलेंस की जांच में पता चला कि छात्र आशीष कुमार की वर्ष 2008-09 से 2011-12  तक उपरोक्त फीस के मुताबिक शुल्क प्रतिपूर्ति के कुल 824000 रुपए संस्थान ने गबन कर लिया। इसके अलावा संस्था ने कई अन्य छात्रों के भी लाखों रुपए हड़प लिए।

उधर समाज कल्याण विभाग के आदेशानुसार जिन छात्र-छात्राओं ने अपने सत्र की पूरी फीस जमा करा दी है, उन्हें रकम लौटा दी जाए। समाज कल्याण विभाग ने शुल्क प्रतिपूर्ति इस निर्देश के साथ जारी की थी कि अगर संबंधित वर्ष में छात्र-छात्राओं से शुल्क न लिया तो संबंधित वर्ष की फीस में समायोजित कर लिया जाए। अगर फीस जमा करा ली गई है तो संबंधित छात्र को भुगतान कर दिया जाए। साथ ही संस्थान ने समाज कल्याण विभाग से प्राप्त शुल्क प्रतिपूर्ति का समायोजन नियमानुसार न कर अगले वर्ष की फीस में समायोजित किया। छात्रा प्रेरणा चौधरी ने दो वर्ष की फीस संस्थान में जमा कराई जबकि समाज कल्याण विभाग ने संस्थान को उसकी तीन वर्ष की प्रतिपूर्ति दी। एक वर्ष की फीस संस्थान के संचालक हड़प गए और समाज कल्याण विभाग को छात्रा को छात्रवृत्ति प्रदान करने का पत्र समाज कल्याण विभाग में लगा दिया।

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