चार दिन बाद प्रदेश में इतिहास बन जाएगी मैनुअल टेंडरिंग 

चार दिन बाद प्रदेश में इतिहास बन जाएगी मैनुअल टेंडरिंग प्रतीकात्मक फ़ोटो 

लखनऊ। प्रदेश भर के विभागों में चार दिन बाद मैनुअल टेंडरिंग खत्म हो जाएगी। जिसकी जगह ई टेंडरिंग ले लेगी। जिससे टेंडरों में होने वाला भ्रष्टाचार बहुत हद तक बंद हो जाएगा। अभी तक टेंडर देने के नाम पर जम कर गड़बड़ियां होती रही हैं। बाहुबली ठेकेदार कमजोर लोगों को ठेके नहीं डालने देते थे। अब ऐसा नहीं होगा। जिसको लेकर अब अधिकारियों का प्रशिक्षण, ठेकेदारों के ई सिग्नेचर लेने की कार्यवाही तेजी से की जा रही है।

ये भी पढ़ें-नीतीश कुमार पर बोले लालू यादव, “बीजेपी में जाकर आत्महत्या कर ली”

मण्डलायुक्त अनिल गर्ग ने बताया कि प्रदेश सरकार ने ई टेण्डरिंग को पूरी तरह से लागू करने के लिए अन्तिम तिथि तय कर दी है। उन्होने बताया एक सितम्बर के बाद सभी विभागों में केवल ई टेण्डरिंग के जरिए ही काम हो सकेगें। शासकीय विभागों में ई-प्रोक्योरमेण्ट और ई-टेण्डरिंग प्रणाली लागू किये जाने के सम्बन्ध में प्रशिक्षण कार्यक्रम मण्डलायुक्त कार्यालय सभागार में आयोजित 62 मण्डलीय कार्यालयों के अधिकारियों को चार पालियों में प्रशिक्षित किया गया।

अब उन्होंने सभी मण्डलीय अधिकारियो से कहा है कि ई-निविदाओं का ई-प्रोक्योरमेण्ट प्लेटफार्म पर प्रकाशित किये जाने के लिए समिति के अधिकतम 4 औरन्यूनतम 3 सदस्य अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर्स की आवश्यकता होगी। जिसमे 2 सदस्य अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर्स से निविदाओं को खोला जाना सम्भव होगा। उन्होंने बताया कि सक्षम अधिकारियों को चिन्हित करते हुए उनको भलीभांति प्रशिक्षित करवाया जाएगा। जिन टेण्डर यूनिटों में निकट भविष्य में टेण्डर होने हैं ऐसे सभी यूनिटो के नोडल अधिकारी प्राथमिकता के आधार पर भलीभांति प्रशिक्षण प्राप्त कर लें।

ये भी पढ़ें-सरकारी डॉक्टरों के तबादलों में अब नहीं हो सकेगा खेल, ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत होगा ट्रांसफर

मुश्किल होगा डंडे के दम पर टेंडर लेना

सभी तरह के ठेकों का आवंटन ई टेंडरिंग के जरिये होने के चलते अब डंडे और बाहुबल का उपयोग कम हो जाएगा। अब तक विभिन्न विभागों में ठेकों में टेंडर पूलिंग का खेल चलता रहा है। जिसमें एक ही ठेकेदार तीन फर्म बना कर अलग अलग रेट कोट कर के टेंडर डालते हैं। जिसमें सबसे कम मूल्य जिस टेंडर पर कोट होता है, उस फर्म को काम दे दिया जाता है। तीनों फर्म एक ही ठेकेदार की होती हैं, ऐसे में ठेका तय व्यक्ति के पास ही जाता है। जबकि कोई अन्य ठेकेदार ठेका डालता है तो बाहुबल का उपयोग कर के उसको दबाया जाता है। ताकि बाहरी व्यक्ति का दखल न हो। मगर अब ऐसा नहीं होगा। ई टेंडरिंग में कंप्यूटर पर बैठ कर कोई ठेकेदार कहीं से भी टेंडर डाल सकेगा। जिससे धांधलियां कम होंगी।

“एक सितंबर से ई टेंडरिंग की व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगी। ये वादा भाजपा ने अपने लोक कल्याण संकल्पपत्र में किया था। अब सरकारी ठेकों में पारदर्शिता लाएंगे। जिससे बाहुबल और माफियाराज खत्म होगा। एक सितंबर से सारे विभागों में ई टेंडरिंग लागू हो जाएगी।”

केशव प्रसाद मोर्य, डिप्टी सीएम, उत्तर प्रदेश

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहांक्लिक करें।

Share it
Share it
Share it
Top