गन्ना माफिया की चांदी, उठा रहे किसानों की मजबूरी का फायदा 

Sundar ChandelSundar Chandel   20 Nov 2017 2:32 PM GMT

गन्ना माफिया की चांदी, उठा रहे किसानों की मजबूरी का फायदा प्रतीकात्मक तस्वीर।

मेरठ। इन दिनों गन्ना माफिया पूरी तरह सक्रिय हैं। माफिया मिल प्रबंधन से सेटिंग कर छोटे किसानों को जमकर पलीता रहे हैं। साथ ही छोटे किसान भी पर्ची न मिलने पर माफिया को गन्ना देने के लिए मजबूर हैं।

आंकड़ों के मुताबिक अकेले मेरठ जनपद से प्रति दिन पांच हजार क्विंटल गन्ना माफिया मिल को दे रहे हैं। यही हाल अन्य जनपदों का भी है। इन माफिया को न तो शासन का डर है और न ही प्रशासन का। जबकि हाल ही में शासन ने सकुर्लर जारी कर अवैध गन्ना खरीद को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का फैसला लिया था। साथ ही पकड़े जाने पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई के भी निर्देश दिए थे।क्षेत्र में दस से बीस ऐसे लोग रहते हैं जिनके पास पैसे की गुंजाइश रहती है।

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गन्ना माफिया किसानों की जिंदगी कर रहे कड़वी

यह पैसे वाले व्यापारी गन्ना समीति में सेटिंग कर फर्जी रकबा चढ़वा देते हैं, जिससे इन्हें रोज पर्ची मिलती रहे। इस खेल में चार-चार या उससे अधिक की भी साझेदारी होती है। देहात क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर कांटा लगाकर ये छोटे किसानों से गन्ने की खरीद करते हैं। वो भी मिल रेट से 50 से 70 रुपए कम। गेहूं बुवाई के चक्कर में किसान मजबूरी में खेत खाली करने के लिए इन्हें इनके रेट पर गन्ना डालने को मजबूर रहते हैं। इसके अलावा बुनियादी जरूरत पूरी करने के लिए भी किसानों के पास नकद पैसा लेने की जल्दी रहती है, जिससे ये माफिया बखूबी फायदा उठाते हैं।

समिति अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक इस धंधे में शामिल रहते हैं, क्योंकि उन्हीं के संरक्षण में यह धंधा चल रहा है। यदि फर्जी रकबे की पर्ची न मिले तो माफिया का गन्ना सूखने लगता है, तीन दिन गन्ना न उठने पर उन्हें पसीना आना शुरू हो जाता है। गन्ना समिति अधिकारी किसानों के रकबे में खेल कर उन्हें पर्ची देते हैं। ताकि उनका गन्ना समय से संबंधित मिल में पहुंचता रहे। जबकि यह पूरी तरह से अपराध है। समिति कर्मचारी ऐसा कर किसानों के हक पर डाका डालने का काम कर रहे हैं। मेरठ के मवाना क्षेत्र के कुछ किसानों ने इसकी गन्ना उपायुक्त से शिकायत भी की है।

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मेरठ के मवाना क्षेत्र के गाँव मवी निवासी भंवर सिंह (56वर्ष) बताते हैं, “ जब मिल पर्ची नहीं देता तो और गन्ना कहां लेकर जाएं।”

वहीं मेरठ के हस्तिनापुर ब्लाक के गाँव सैदीपुर निवासी हरीराम (58वर्ष) बताते हैं,“ मिल चले एक माह बीत गया, लेकिन बस एक ही पर्ची आई है। एक पर्ची में कहां से गेहूं की बुवाई करें। इसलिए इन्हें गन्ना देना हमारी मजबूरी है।”

बहराइच जिले के फखरपुर क्षेत्र के बड़ी संख्या में चीनी मिल की तरफ से पर्ची न दिए जाने से गन्ना किसान परेशान हैं। यहां के गन्ना किसान अंबिका प्रसाद ने बताया ‘’ पर्ची न आने से गन्ना खेतों में खड़ा हुआ है। लग रहा है कि गेहूं की बोआई नहीं कर पाएंगे। आम किसान को जहां पर्ची नहीं दी जा रही है वहीं पहुंचदारों के लिए पर्ची की कोई कमी नहीं है।’’

वहीं बागपत जिले में गन्ना पेराई सत्र शुरू होते ही किसानों के सामने समस्याएं भी शुरू हो गयी हैं। यहां के क्षेत्र में किनौनी, दौराला और मलकपुर क्षेत्र के किसान परेशान हैं। यहां के किसान राजू तोमर ने बताया ‘’ चीनी मिलें किसानों को जानबूझकर परेशान कर रही हैं। मिलों की तरफ से पर्ची नहीं मिलने से किसान कोल्हुओं पर गन्ना बेचने पर मजबूर हो रहे हैं।’’

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रासूका के तहत कार्रवाई के दिए थे निर्देश

गन्ना माफिया पर नकेल कसने के लिए गन्ना आयुक्त संजय आर भुसरेड्डी ने प्रदेश के सभी गन्ना उपायुक्तों को इस पर लगाम लगाने के निर्देश दिए थे, जिसमें माफिया के साथ मिल प्रबंधन के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए सकुर्लर जारी किया था। जिसमें गन्ना माफिया और अवैध रूप से गन्ना खरीद करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 के तहत मुकदमा दर्ज कराने के लिए निर्देश हैं।

मुख्यालय से आई सकुर्लर की कापी मिल प्रबंधन को भेज दी गई है। साथ ही जांच कर गन्ना माफिया की लिस्ट बनाई जा रही है। जांच के बाद शासनादेष के मुताबिक मुकदमे दर्ज कराए जाए
हरपाल सिंह, गन्ना उपायुक्त मेरठ परिक्षेत्र

अन्य राज्यों में भी भेजा जाता है गन्ना

गन्ना माफिया लाचार किसानों का गन्ना कम दाम में खरीदकर मिल क्षेत्र ही नहीं बल्कि अन्य मिलों व दूसरे राज्यों में भी आपूर्ति करते हैं। यूपी से हरियाणा में बड़ी मात्रा में गन्ना भेजा जा रहा है। इस बार गन्ने में अच्छी रिकवरी आने से मिलों में गन्ना झटकने की होड़ लगी है। शुगर मिलें ज्यादा से ज्यादा गन्ना पेराई कर अधिक से अधिक चीनी का उत्पादन करना चाह रही हैं।

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