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बदहाली का शिकार बाल उद्यान, टूटे पड़े हैं झूले, खराब है रोप क्लाइम्बिंग

बदहाली का शिकार बाल उद्यान, टूटे पड़े हैं झूले, खराब है रोप क्लाइम्बिंगबदहाली का शिकार बाल उद्यान, टूटे पड़े हैं झूले, खराब है रोप क्लाइम्बिंग

नवनीत शुक्ला, स्वयं कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

बरेली। गाँधी उद्यान का बाल पार्क रख रखाव के अभाव में बदहाल हो चुका है। बच्चों के लिए लगे झूले देख रेख के अभाव में टूट गए हैं। बच्चों की पूरी छुट्टियां टूटे झूलों और न चलने वाले चक्कर घिन्नी को देखकर ही कट गईं।

शहर के बीचों-बीच बने इस विशालयकाय पार्क के एक कोने को बच्चों के पार्क के रूप में विकसित किया गया था। देखने पर यह बाल उद्यान पूरे गाँधी उद्यान के दिल जैसा ही लगता है, जहाँ बच्चों के लिए झूला और स्लाइडर का भी इंतज़ाम किया गया था, ताकि बच्चे इन चीजों का लुत्फ़ उठा सके। इसके साथ ही फिजिकल फिटनेस को बनाये रखने के लिए रोप क्लाइम्बिंग का भी एक सेट बनाया गया, जो रख रखाव के अभाव में बदहाल हो चुके हैं। ज्यादातर झूले टूट चुके हैं।

सिविल लाइंस निवासी अमन गंगवार (26वर्ष) का कहना है, "सुबह योग करने पार्क में जाता हूँ तो अपने भतीजों को भी पार्क में ले जाता हूँ।, लेकिन टूटे हुए झूलों ने बच्चों को इस बार बहुत निराश किया। वो खेल नहीं पाते तो योगा छोड़ के वापस घर आना पड़ता है।” ग्रीन पार्क कॉलोनी निवासी अद्द्वैत दीक्षित (12वर्ष) का कहना है, " दादी और नानी का घर बरेली से दूर है, इसलिए इस छुट्टियों में यहीं रहा। टूटे झूले और बदहाल स्लाइडर्स की वजह से मैं छुट्टियों में यहां मजे नहीं कर पाया।”

इस बाबत नगर निगम के नगर आयुक्त राजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है, “टूटे झूले, स्लाइडर्स और रोप क्लैम्बर का मामला संज्ञान में नहीं है।अगर ऐसा है तो इसे बारिश के बाद सही करा दिया जाएगा।”

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