योगी संदेश: गोमा में डुबकी से भी नहीं धुलेंगे भ्रष्टाचार के पाप  

Rishi MishraRishi Mishra   4 April 2017 4:47 PM GMT

योगी संदेश: गोमा में डुबकी से भी नहीं धुलेंगे भ्रष्टाचार के पाप  निर्माणाधीन गोमती फ़्रन्ट डेवलपमेंट परियोजना लखनऊ सिटी

लखनऊ। गोमती रिवर फ्रंट डवलपमेंट परियोजना में हुई फिजूलखर्ची की आंच बड़ों बड़ों तक पहुंचेगी। इस परियोजना में शुरुआत ही गड़बड़ियों से की गई। गोमती संरक्षण के लिए काम कर रही संस्थाओं ने बहुत पहले ही कई जगह अपव्यय की शिकायत की थी, मगर उनकी दलीलें नक्कारखाने में तूती की आवाज की तरह दबा दी गई थीं। अब जबकि न्यायिक जांच बैठा दी गई, ऐसे में उन सारे मुद्दों पर बात होगी जो पहले बताए गए मगर उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया था। अब करीब डेढ़ घंटे तक हुई बैठक में न्यायिक जांच का आदेश देते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने ये स्पष्ट कर दिया कि पूरी पारदर्शिता से जांच हो और कोई भी बख्शा न जाए।

कई मामलों में सीधे सीधे पूर्व सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव भी शामिल रहे हैं। जिनमें बड़ी वित्तीय स्वीकृतियां शामिल हैं। दरअसल, पहले इस परियोजना में एक हिस्सा जल निगम मांग रहा था। जिसके तहत गोमती में गिर रहे नालों का डाइवर्जन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का रेनोवेशन शामिल किया गया था। मगर उच्च स्तरीय दखल के बाद इस पर स्वीकृति नहीं हो सकी। गोमती संरक्षण में जुटे ऋद्धि किशोर गौड़ का कहना है कि, जल निगम बहुत कम बजट में नालों के डाइवर्जन की योजना बनाई थी।

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निर्माणाधीन गोमती फ़्रन्ट डेवलपमेंट परियोजना लखनऊ सिटी का किनारा क्षेत्र


ये मात्र 13 करोड़ का प्रोजेक्ट था। मगर सिंचाई विभाग इसकी जगह करीब 300 करोड़ के बजट वाली परियोजना ले आया। जिसमें गोमती में गिर रहे 27 नालों को शहर के बाहर ले जाना था, मगर शहर के बाहर नाले दोबारा गोमती में मिला देने थे। ऐसे में गोमती आगे तो गंगा को गंदा कर देती। साथ ही सुल्तानपुर और जौनपुर के लोगों को गोमती प्रदूषण के नुकसान उठाने पड़ते। मगर सिंचाई विभाग इसी परियोजना को लाने पर अड़ा रहा। परिणाम ये हुआ कि, नाले अब तक गोमती में सीधे ही गिर रहे हैं।

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गोमती का ये रिवरफ्रंट 8.1 किलोमीटर का है, जिसपर करीब 3 हजार करोड़ का खर्च करने की तैयारी थी। मगर अखिलेश यादव की सरकार जाने तक 1437 करोड़ का बजट पास किया गया और 1427 करोड़ रुपये खर्च भी कर दिये गये। यहां रिवर फ्रंट पर सॉफ्ट स्केपिंग है, झील है, म्युजिकल फाउंटेन है, जो कहीं नहीं है। साथ ही वाटर स्पोर्टस है, क्रुज है और स्वास्थ्य के लिहाज से कई तरह के ट्रैक बनाए गए हैं, जिसमें साइक्लिंग, वॉकिंग और जॉगिंग ट्रैक होगा।

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दिसंबर 2016 तक पूरा करने का वादा


इस प्रोजेक्ट की शुरूआत जनवरी 2015 में हुई थी और मार्च 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। इंजीनियर दावा कर रहे थे कि इसे वो दिसंबर 2016 में ही पूरा कर लेंगे। मगर अभी तक 60 फीसदी काम पूरा होने का ही दावा किया जा रहा है। दरअसल इसकी शुरूआत गोमती के दोनो ओर कंक्रीट के चैनल बनाकर शुरू की गई और आठ किमी लंबा चैनल बनाया गया, फिर दोनो ओर से जो 27 नाले इसमे गिरते हैं, उसे रोकने की कवायद इसके समानांतर एक नाले इंटरसेप्टिंग ड्रेन बनाकर की जानी थी। दावा था कि, धीरे-धीरे गोमती में गिरने वाले नालों को रोक दिया जाएगा।

गोमती को टेम्स बनाने की बात बन गई गंदा नाला

इस रिवरफ्रंट को वर्ल्ड क्लास बनाने की तैयारी है, जिसमें सैलानियों के लिए खेलकूद, सैर, साइक्लिंग, योग, नौकायन सहित कई तरह की सुविधाएं तैयार की जानी थी। दावा था कि करीब 300 गाड़ियों के पार्किंग के लिए दो बड़े पार्किग जोन बने हैं। सुरक्षा के लिहाज से करीब 250सीसीटीवी लगाए जाएंगे.

इन सुविधाओं का भी दावा

  • -कई बड़े लैडस्केप बनाए जा रहे हैं.
  • -कई जगहों पर रंगीन फव्वारे होंगे जो शाम के बाद इसकी सुंदरता बढाएंगे.
  • -गोमती में नौकायन इसका सबसे बड़ा आकर्षण होगा जिसके लिए कई घाट तैयार किए जा रहे हैं.
  • -पार्क मे हरियाली के खाल इंतजाम किए जा रहे हैं. वेटलैंड बनाए जा रहे हैं, जिसमे कई तरह के पेड़ लगाए जाएंगे, जिसमें पक्षियों को बसाने की खास योजना है.
  • -छोटे बच्चों के खेलने के लिए छोटे खेल के मैदान, पार्क होंगे.
  • -फूड प्लाजा की एक सीरीज होगी, जिसमें लोग खाने-पीने का लुत्फ उठा सकेंगे.
  • -गोमती फ्लावर शो होगा, जिसमें विभिन्न प्रजातियों के फूल लगाए जाएंगे.

इन पर आएगी जांच की आंच

मेसर्स गैमन इंडिया लिमिटेड के पास गोमती रिवर फ्रंट का अधिकांश काम है। इस कंपनी का फंसना तय है। इसके अलावा कंपनी के दर्जनों पेटी कांट्रेक्टर भी परियोजना से जुड़े रहे हैं। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता पीके सिंह, पूर्व प्रमुख सचिव सिचांई विभाग दीपक सिंघल, पूर्व अधिशासी अभियंता रूप सिंह यादव, सुप्रिटेंडिग इंजीनियर रमण सरकार हैं।

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