नहीं लगे सरकारी कांटे, मंडी में बेच रहे धान

Mo. AmilMo. Amil   16 Nov 2017 1:13 PM GMT

नहीं लगे सरकारी कांटे, मंडी में बेच रहे धानफोटो: गाँव कनेक्शन 

एटा/अलीगढ़। एटा जनपद में किसानों का बुरा हाल है, किसान धान बेचने के लिए भटक रहे हैं। सरकार द्वारा हर पांच किलोमीटर दूरी पर धान खरीदने के लिए लगाए जाने वाले कांटे कोसों दूर तक दिखाई नहीं दे रहे। इस कारण धान किसानों को अपनी फसल मण्डी में कम दामों पर बेचना पड़ रहा है। एटा की विपणन अधिकारी इस समस्या का जबाब देने से बच रही हैं, जबकि इस धांधली की खबर अलीगढ़ मण्डल कमिश्नर के संज्ञान में है। वहीं पूरे मण्डल में लक्ष्य के सापेक्ष अब तक मात्र एक फीसदी धान खरीददारी पर अलीगढ़ मण्डल कमिश्नर ने नाराजगी व्यक्त की है।

भटक रहा किसान,मौज में बिचौलिए

एटा जनपद की आठ ब्लॉकों में स्थित कॉपरेटिव, एग्रो, खाद्य विभाग, एसएफसी, एफसीआई आदि पर कहीं भी धान की खरीदारी के लिए कोई कांटा नहीं लगाया गया है, जहां सरकारी क्रय केंद्रों पर धान के दाम 1550 से 1590 हैं वहीं मण्डी पर धान के दाम केवल 1300 से लेकर 1350 रुपए मिल रहे हैं।

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मारहरा ब्लॉक के गाँव मेहनी निवासी किसान दलवीर सिंह (50 वर्ष) ने बताया, “मैं अपनी धान की फसल को बेचने के लिए भटक रहा हूं। सुना था कि सरकार द्वारा हर पांच किलोमीटर की दूरी पर धान खरीदने के लिए सरकारी कांटे लगाए जा रहे हैं। लेकिन मैं मारहरा, मिरहची, अचलपुर और एटा तक अपनी फसल को बेचने के लिए सरकारी कांटे की तलाश कर आया कहीं भी मुझे कांटा नहीं मिला। मैंने इसकी शिकायत विपणन अधिकारी से और मारहरा विधायक से की है।”

निधौलीकलां ब्लॉक के गाँव समोखर निवासी किसान सत्यवीर (45 वर्ष) ने बताया, “हमारा धान मण्डी में कम दामों में खरीदा जा रहा है और कांटे पर भी गड़बड़ रहती है। मण्डी पर धान खरीदने पर व्यापारी मनमानी करते हैं। सरकारी दाम न मिलने से नुकसान हो रहा है।”

किसानों को दिखा रहे जीएसटी का डर

सरकार कितने भी दावे कर ले, लेकिन जनता के लिए सभी खोखले साबित होते दिखाई दे रहे हैं। सरकार द्वारा किसान को वाजिब मूल्य मिले इसलिए धान खरीद केन्द्र जगह-जगह खोले गये, लेकिन जनपद में यह खरीद केन्द्र मात्र कागजों पर चल रही है। इन पर किसानों का धान नहीं खरीदा जाता, यदि खरीदा भी जाता है तो औने-पौने दामों में।

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अलीगंज ब्लॉक के गाँव अमरौली रतनपुर निवासी किसान लज्जाराम (45 वर्ष) का कहना है, “मोटे धान में तो उत्पादन अच्छा मिल जाता है, जिसमें पानी व खाद के दाम सीधे हो जाते हैं, लेकिन पतले बासमती चावल में पैदावार कम होने व उचित मूल्य न मिल पाने से खाद पानी की लागत भी सीधी नहीं होती। वहीं धान बेचने पर किसानों को बिचौलियों द्वारा जीएसटी का डर दिखाया जा रहा है।”

मण्डल में हुई है मात्र एक फीसदी की खरीदारी

धान खरीदारी में सरकारी मशीनरी किस तरह काम कर रही है इसका अंदाजा आप पूरे मण्डल की धान खरीददारी के आंकड़े से लगा सकते हैं। धान खरीद की धीमी रफ़्तार से खुद अलीगढ़ मण्डल कमिश्नर सुभाष चन्द शर्मा नाराज हैं, जहां मण्डल में धान की खरीददारी का लक्ष्य 38 हजार मीट्रिक टन था वहां अब तक मात्र 311.16 मीट्रिक टन धान किसानों से क्रय किया गया है जो लक्ष्य का एक फीसदी से भी कम है।

मण्डल स्तर पर होगी कमेटी गठित

पूरे मण्डल में धान की कम खरीददारी पर नाराज होते हुए कमिश्नर सुभाष चन्द शर्मा ने मण्डल स्तर पर एक कमेटी गठित करने का फैसला किया है। समीक्षा बैठक में कमेटी के गठन का जिक्र करते हुए उन्होंने सभी धान क्रय केन्द्रों की जांच कराने के निर्देश दिए। साथ ही धान क्रय से सम्बन्धित धान खरीद अधिकारी, खाद्य विभाग, एसएफसी, एफसीआई एवं एग्रो अधिकारियों के साथ ही एआर को-ऑपरेटिव द्वारा धान क्रय में सहयोग न करने पर उनको कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिया है।

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उन्होंने कहा, “अधिक से अधिक किसानों से धान क्रय कर उन्हें लाभान्वित करने के निर्देश शासन से प्राप्त है। इसमें किसी प्रकार की शिथिलता एवं लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। धान क्रय को बढ़ाने के लिए सम्बन्धित अधिकारी सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर एवं मोबाइल धान क्रय केन्द्रों के माध्यम से शत-प्रतिशत लक्ष्य की पूर्ति करें।”

लापरवाही बरतने पर होगी निलम्बन की कार्रवाई

कम धान खरीद पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कमिश्नर सुभाष चन्द शर्मा ने कहा, “एक सप्ताह के अन्दर लक्ष्य का 10 फीसदी किसानों के धान का क्रय न होने पर सम्बन्धित अधिकारियों के विरुद्ध निलम्बन की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।”

कमिश्नर को है धान किसानों के शोषण की खबर

सरकारी केंद्रों पर धान न खरीदने से किसान अपनी धान की फसल मण्डी में कम दामों में बेच रहा है। साथ ही वहां हो रही मनमानी से उनका शोषण भी हो रहा है, इसकी जानकारी अलीगढ़ कमिश्नर सुभाष चन्द शर्मा को है। इस बात की नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने समीक्षा बैठक में कहा, “मेरे संज्ञान में आया है कि मण्डी समितियों में किसान अपना धान 1350 रुपए प्रति कुन्तल की दर से बेच रहे हैं, जबकि शासन द्वारा कॉमन धान का समर्थन मूल्य 1550 रुपए एवं ए ग्रेड के धान का मूल्य 1590 रुपए निर्धारित किया गया है जब सरकार द्वारा किसानों को धान का अधिक मूल्य दिया जा रहा है तो वह क्रय केन्द्रों पर अपना धान क्यों नहीं बेच रहे हैं यह बात समझ से परे है तथा इसमें अधिकारियों की लापरवाही साफ नजर आ रही है।”

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पिछले वर्ष हुई थी 11 हजार मीट्रिक टन धान की खरीदारी

गत वर्ष 11,000 मीट्रिक टन धान किसानों से क्रय किया गया था। चालू वित्तीय वर्ष में धान क्रय के दिये गये लक्ष्य 38,000 मीट्रिक टन को 31 जनवरी तक हर हाल में पूरा किया जाना है।

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