पंचायतों में महिलाओं के नेतृत्व से सशक्त होगा समाज : रीता बहुगुणा जोशी 

पंचायतों में महिलाओं के नेतृत्व से सशक्त होगा समाज : रीता बहुगुणा जोशी महिला कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने महिला प्रधानों को किया सम्मानित

लखनऊ। महिला एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रो. रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि यह पहला देश है जिसमें स्थानीय निकाय तक महिलाओं की भागीदारी है और पंचायत में महिलाओं की भागीदारी से ग्रामीण स्तर तक महिलाओं की समस्याओं, महिला हिंसा, बाल विवाह की रोकथाम में मजबूती मिलती है।

प्रो. जोशी मंगलवार को महिला एवं बाल कल्याण विभाग के तहत महिला समाख्या की ओर से अच्छादित 19 जिलों में चल रहे महिला हिंसा विरोधी पखवारे के गन्ना संस्थान लखनऊ में आयोजित समापन समारोह की अध्यक्षता कर रही थीं।

प्रो. जोशी ने कहा, “ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था और विकास को सुनिश्चित करने के लिए पंचायत एक अहम ढांचा है, इसलिए पंचायतों की भूमिका और जवाबदेही महिलाओं के विकास और सुरक्षा के लिए निर्धारित करने की आवश्यकता है, जिससे महिलायें पंचायतों में नेतृत्व की भूमिका में आयें।“ उन्होंने कहा, “महिला कल्याण विभाग महिला प्रधानों के लिए प्रशिक्षण आयोजित करेगा, जिससे वे हर चुनौती का पूर्ण सामर्थ्य से सामना कर सकेंगी।“

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पखवारे के समापन समारोह में महिला प्रधानों ने ग्रामीण स्तर पर उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों को साझा किया, साथ ही उन्होंने सरकारी योजनाओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। महिला कल्याण मंत्री ने गांवों में सराहनीय और उल्लेखनीय स्तर तक कार्य करने वाली महिला प्रधानों को सम्मानित किया।

इस कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग प्रमुख सचिव रेणुका कुमार, राज्य परियोजना निदेशक डॉ. स्मृति सिंह, यूनिसेफ संस्था, समाज कल्याण, स्वच्छता मिशन, स्वास्थ्य विभाग, मिड-डे-मील, प्राधिकरण के अधिकारीगण और स्थानीय सामाजिक संस्थाओ से कार्यकर्ता व महिला समाख्या की संघ महिला सहित 19 जिलों से आयी महिला प्रधान ने प्रतिभाग किया।

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यूपी में 15 दिन का महिला हिंसा विरोध पखवारा

महिला एवं बाल कल्याण विभाग के तहत महिला समाख्या उत्तर प्रदेश के आच्छादित 19 जिलों में 25 नवम्बर से चल रहे 15 दिन के महिला हिंसा विरोध पखवारे में ब्लाक स्तर से जिले स्तर तक महिला हिंसा, घरेलू हिेंसा, बाल विवाह पर समुदाय को जागरूक कर शासन-प्रशासन के साथ नेटवर्किग स्थापित की गई। लिगांनुपात बढ़ाने व महिला हिंसा से संरक्षण के लिए गाँव-गाँव में गोष्ठियाँ, नुकक्ड़ नाटक, जेण्डर भेदभाव पर समझ बनाने के लिए प्राईमरी स्कूलों से डिग्री कालेज तक बच्चों के साथ संवाद, निबंन्ध लेखन, पोस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित की गयीं।

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