लविवि में फॉर्म से लेकर फीस तक जीएसटी लागू, कॉलेज प्रशासन में जीएसटी को लेकर भ्रम

लविवि में फॉर्म से लेकर फीस तक जीएसटी लागू, कॉलेज प्रशासन में जीएसटी को लेकर भ्रमलविवि को भेजा गया आदेश।

लखनऊ। लखनऊ यूनिवर्सिटी और इससे संबद्ध 159 कालेजों में पढने वाले छात्रों पर भी अब जीएसटी का असर पड़ेगा। एलयू के छात्रों को अगले सत्र से फीस के साथ 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से देना होगा, इतना ही नहीं वहां की विभिन्न सेवाओं पर भी 18 प्रतिशत जीएसटी लगाय गया है। बीते दिनों एलयू में जीएसटी लागू कर दिया गया। जीएसटी लगने के साथ ही अगले सत्र से पढाई भी महंगी हो जाएगी|

एलयू की तरफ से इस संबंध में एक सर्कुलर जारी किया गया है, जिसमें पार्किंग, कैंटीन और दूसरी नॉन- एजुकेशन सर्विसेस में तत्काल प्रभाव से जीएसटी लागू कर दिया गया है। अगले सत्र से फीस और एडमिशन फॉर्म में भी जीएसटी अलग से देना होगा।

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वित्त अधिकारी पीसी मिश्रा ने बताया"यूनिवर्सिटी और इससे संबद्ध सारे कॉलेजों में यह सर्कुलर लागू किया जा रहा है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी की ओर से जो भी सर्विसेस हैं उनमे 18 प्रतिशत जीएसटी जोड़ा गया है|"

कॉलेज बढ़ा सकते हैं फीस

शिक्षकों की माने तो कालेज़ों से जो जीएसटी लिया जाएगा उसका असर छात्रों पर पड़ेगा।कॉलेज वाले फीस बढ़ा सकते हैं |

इन सुविधाओं पर देना होगा जीएसटी

छात्रों को कैंटीन, पार्किंग, एडमिशन फॉर्म, कोर्स फीस, ट्रांसक्रिप्ट फीस, माइग्रेशन फीस,प्रोविजिनल डिग्री आदि पर जीएसटी देना होगा।

कॉलेजों को संबद्धता के लिए, नए और पुराने कोर्सों की एसोसिएशन फीस, कोर्सों की संबद्धता के लिए होने वाले निरीक्षण फीस, सब्जेक्ट नॉमिनेशन के लिए, यूनिवर्सिटी हॉल फीस, यूनिवर्सिटी उपकरणों के प्रयोग पर,कम्युनिटी सेंटर आदि के लिए जीएसटी देना होगा|

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शैक्षणिक संस्थाओं में जीएसटी की छूट है,विश्वविद्यालय को किसी सी.ए से राय लेना चाहिए या वो खुद जीएसटी के अधिकारियों से बात करे और तथ्यों के आधार पर लागू करे। इस तरह से जीएसटी लगाना पूरी तरह गलत है।
विवेक सिंह, छात्र नेता

यूनिवर्सिटी को खुद ही पूरी जानकारी नहीं है

लखनऊ यूनिवर्सिटी में बड़ी जोर-शोर से जीएसटी का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया था और ये भी कहा गया था की जीएसटी पढ़ाने वाला लविवि देश का पहला विश्वविद्यालय है। मगर हालात यह है की अपने ही यहाँ किन चीज़ों पर जीएसटी लगाना है और कहाँ नहीं, अभी यह तक किसी को पता नहीं है।

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