आम उत्पादन में भारी गिरावट का निर्यात पर भी असर  

आम उत्पादन में भारी गिरावट का निर्यात पर भी असर  आम का उत्पादन।

लखनऊ (भाषा)। मौसम की मार की वजह से उत्तर प्रदेश के आम बागवानों को इस साल भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उत्पादन में करीब 70 प्रतिशत की गिरावट होने के कारण निर्यात भी बेहद मामूली है।

आल इण्डिया मैंगो ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष इंसराम अली ने बताया, ''इस साल आम का उत्पादन बमुश्किल 10 से 15 लाख टन का हुआ है, जो पिछले साल के 44 लाख टन के मुकाबले काफी कम है। इस बार आम की पैदावार में लगभग 70 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है।'' उन्होंने कहा कि पिछली बार दुबई, मस्कट और सउदी अरब में करीब चार हजार टन आम का निर्यात किया गया था लेकिन इस दफा पैदावार बेहद कम होने की वजह से आम का निर्यात भी नहीं हो रहा है। कुछ आम उत्पादक निर्यात कर रहे हैं लेकिन कुल निर्यात लगभग न के बराबर होगा।

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अली ने यह भी बताया कि आम निर्यातकों की वाजिब मांगों को लेकर सरकार का रवैया अब तक उदासीन बना हुआ है. आलम यह है कि पिछले साल किये गये आम निर्यात का अनुदान निर्यातकों को आज तक नहीं मिला.

मालूम हो कि पिछले साल बम्पर फसल के कारण दाम कम होने की वजह से लखनवी रसीले आम का जायका लगभग हर वर्ग तक पहुंचा था। पिछली बार जो आम 15 से 20 रुपये किलोग्राम बिका था, वह इस साल 50 रुपये से भी ज्यादा के दामों पर बिक रहा है। आम के उत्पादन में यह गिरावट समय से पहले लगातार पुरवा हवा चलने और पेड़ों में एक किस्म का फंगस लगने की वजह से हुई है।

उत्तर प्रदेश की 'मैंगो बेल्ट' लखनऊ स्थित मलीहाबाद, बख्शी का तालाब के साथ-साथ सहारनपुर, सम्भल, अमरोहा, बाराबंकी तथा मुजफ्फरनगर जिलों तक फैली है। उत्तर प्रदेश में आम का रकबा करीब ढाई लाख हेक्टेयर है। प्रदेश में पैदा होने वाली आम की मशहूर किस्मों में दशहरी, चैसा, फाजली, गुलाब खस, लंगड़ा, मल्लिक और आम्रपाली प्रमुख हैं।

प्रदेश में आम उत्पादकों तथा इस फल से बननी वाली चीजों के निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिये पर्यटन विभाग की ओर से लखनउ में तीन दिवसीय 'मैंगो फेस्टिवल' आयोजित किया जा रहा है। इसमें लोगों को आम से बनी बिरयानी, मुर्ग आम और आम मुर्ग कोरमा का लुत्फ मुहैया कराया जा रहा है। इसके अलावा आम मलाई टिक्का, आम शाही पनीर और आम कलेजी जैसे व्यंजन भी लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बने हुए हैं।

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