एक हिंदू, दूसरी मुस्लिम, न कोई पहचान, फिर भी एक-दूसरे के पति को कर रहीं किडनी दान 

एक हिंदू, दूसरी मुस्लिम, न कोई पहचान, फिर भी एक-दूसरे के पति को कर रहीं किडनी दान प्रतीकात्मक तस्वीर साभार इंटरनेट

नई दिल्ली। भारत में अंगदान के लिए आज भी वहीं पुरानी परंपराओं वाली सोच हैं। पुरानी परंपराओं के अनुसार अंगदान करने से मोक्ष प्राप्ति में बाधक होती है। बहुत ही कम लोग अपने रिश्तेदारों-परिचितों की मृत्यु के बाद उनके अंग दान करते हैं। जीते-जी अंग दान करना तो और भी रेयर है। भारत में कानूनी तौर पर होने वाले अंगदान से केवल तीन से पांच प्रतिशत मरीजों की मांग पूरी हो पाती है।

एशियन एज की रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब दो लाख लोग किडनी दान और करीब 85 हजार लोग लीवर दान की कतार में हैं। ऐसे में दो महिलाएं न केवल अंगदान बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द्र की भी मिसाल बनकर पेश आई हैं। एशियन एज की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश की 49 वर्षीय सरोज और 50 वर्षीय सायरा बानो एक दूसरे के पतियों की जान बचाने के लिए एक-दूसरे के पतियों को किडनी दान कर रहे हैं।

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एक दूसरे के पतियों को किडनी देने का लिया फैसला

दोनों महिलाएं मेरठ के एक अस्पताल में अपने पति को अपनी किडनी दान करने के लिए पहुंची थीं। दोनों महिलाओं का ब्लड ग्रुप अपने पति के ब्लड ग्रुप से मैच नहीं किया इसलिए उन्होंने ये रास्ता निकाला। सरोज का ब्लड ग्रुप सायरा के पति से मिलता है इसलिए वो उसे किडनी दान करना चाहती है। वहीं सायरा का ब्लड ग्रुप सरोज के पति से मिलता है इसलिए वो उसे किडनी देना चाहती है। सरोज और सायरा ने एक दूसरे के पतियों को किडनी दान करने के लिए मन बना लिया है। दोनों ने डॉक्टरों से भी परामर्श ले लिया है। सब कुछ ठीक रहा है और अंगदान के लिए जरूरी इजाजत मिल गई तो जल्द ही दोनों के पति स्वस्थ होंगे।

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भारत में हर वर्ष करीब दो लाख लोग किडनी के लिए कराते हैं पंजीकरण

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लीवर खराब होने की शिकायत वाले केवल तीन प्रतिशत को दूसरे से लीवर दान में मिल पाता है। किडनी दान के लिए हर साल औसतन दो लाख लोग पंजीकरण कराते हैं लेकिन करीब आठ हजार का ही लीवर बदल पाता है। हृदय और फेफड़ों के दान की भी यही स्थिति है और करीब एक प्रतिशत मरीजों को ही समय पर जरूरी अंग मिल पाते हैं।

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अंगदान के मामले में दुनिया के सबसे पिछले देशों में भारत

भारत में हर साल औसतन 2.5 लाख मौतें विभिन्न अंगों के खराब होने के कारण होती हैं। साल 2016 में भारत में अंगदान की दर प्रति 10 लाख 0.8 व्यक्ति रही। भारत के उलट स्पेन में प्रति 10 लाख अंगदान की दर 36, क्रोएशिया में 32 और अमेरिक में 26 है। यानी अंगदान के मामले में भी भारत दुनिया के सबसे पिछले देशों में है।

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