टूरिज्म : यूपी आए हैं तो इन सात गाँवों को जरुर देंखे

टूरिज्म : यूपी आए हैं तो इन सात गाँवों को जरुर देंखेरामेश्वर गाँव

लखनऊ। होप संस्था पिछले कुछ समय से विलेज टूरिज्म को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही थी। उसने पूर्वांचल के सात गाँवों की रिपोर्ट बनाई थी, उनके इस प्रयासों से प्रभावित होकर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के सचिव सुमन बिल्ला ने होप संस्था से वह रिपोर्ट मांगी है।

होप संस्था के रवि मिश्र और दिव्यांशु उपाध्याय बताया कि उन्होंने पर्यटन मंत्रालय को यह रिपोर्ट भेज दी है। होप संस्था में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, काशी विद्यापीठ जैसे कई प्रतिष्ठित संस्थानों के लगभग 300 छात्र छात्राएं शामिल हैं। इन छात्र - छात्राओं ने मिलकर यह रिपोर्ट बनाई है। इस रिपोर्ट में इन सात गाँवों को शामिल किया गया है -

1- औरंगाबाद

गोरखपुर शहर से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गाँव भटहट ब्लॉक में आता है। यह उत्तर प्रदेश का ऐसा गांव है, जहां पर टेराकोटा का सबसे अधिक काम होता है। टेराकोटा फ्लावर पॉट और तरह-तरह के सजावटी इस गाँव के लोग बनाते हैं। गाँव के हर घर में टेराकोटा का काम होता है और देश ही नहीं विदेशों में भी यहां का बना सामान जाता है। होप संस्था का मानना है कि अगर इस गांव को विलेज टूरिज्म के रूप में प्रमोट किया जाए तो अधिक से अधिक मात्रा में व्यापारी तथा सैलानी दोनों ही इस गांव की ओर अपना रुख करेंगे जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सुधार आएगा और स्थानीय नागरिक शहरों की ओर जाने की वजह गाँव में रोजगार बढ़ेगा।

टेराकोटा

2- नगवां

बलिया जनपद से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव शहीद मंगल पांडे का पैतृक गांव है। होप संस्था का कहना है कि एक ऐतिहासिक गांव होने के कारण इस गांव को विलेज टूरिज्म के रूप में प्रमोट किया जा सकता है। 1857 की क्रांति का बिगुल बजाने वाले इस गांव को इसलिए भी प्रमोट किया जाना चाहिए ताकि उस गांव से लोगों का एक भावनात्मक लगाव हो सके और यह गांव दुनिया में अपनी एक पहचान बना सके। क्रांतिकारी मंगल पांडे की स्मृति में इस गांव में उनके नाम पर शहीद मंगल पांडे इंटर कॉलेज एवं राजकीय महिला महाविद्यालय नामक विद्यालय हैं। इसके साथ ही गांव में मंगल पांडे के दो स्मारक भी हैं और गांव में उनका पैतृक घर भी है जिस को पर्यटन के रूप में बढ़ावा दिया जा सकता है।

3- चुनार ( दरगाह शरीफ मार्ग)

वाराणसी शहर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मिर्जापुर जनपद का यह गांव अपनी हस्तकला शिल्प के लिए आकर्षण का केंद्र है। सन 1980 से लेकर अब तक इस गांव की खासियत है यहां घर - घर और हर वर्ग के लोग सिर्फ यही कार्य करते हैं। यहां के लोग अपने हाथों से मिट्टी एवं प्लास्टर ऑफ पेरिस का प्रयोग कर के तरह-तरह की खिलौने, मूर्तियां, नए नए तरीके के कप प्लेट और अन्य उपयोगी वस्तुएं तैयार की जाती हैं। गांव में स्थित लगभग ढाई सौ घरों के लोगों का प्रमुख रोजगार यही है। यहां पर लोग नेपाल, बिहार, मध्य प्रदेश एवं पूरे उत्तर प्रदेश और अन्य शहरों से आकर व्यापार के लिए व अन्य निजी उपयोग के लिए सामान ले जाते हैं। इस गाँव के बगल में चुनार का किला है जो पर्यटन के दृष्टिकोण से मशहूर है। होप संस्था का कहना है कि इस गाँव को भी विलेज टूरिज्म के रूप में प्रमोट किया सकते हैं।

ये भी पढ़ें- अयोध्या में श्री राम लगाएंगे टूरिज्म का बेड़ा पार

हस्तशिल्प

4- रामेश्वर

बनारस एयरपोर्ट से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित करीब 1200 अबादी का यह गांव वरुणा नदी के तट पर बसा हुआ है। इसी वजह से इस गांव की खूबसूरती और बढ़ जाती है जिसको देखने देश - विदेश के लोग आते हैं। इस गांव में लगभग 11 धर्मशाला है जहां आसानी से रुक कर छुट्टियां मनाई जा सकती हैं। गांव का एक विधान यह भी है इस गांव में जो आता है वह एक रात रुकता है। काशी में विख्यात पंचकोशी यात्रा का तीसरा पड़ाव इसी गांव में पड़ता है। यहां रामेश्वर भगवान शिव का मंदिर है। ऐसा कहते हैं कि इस शिवलिंग की स्थापना खुद भगवान राम ने की थी।

5, 6-दीनापुर और धनीपुर

वारणसी से लगभग 12 किलोमीटर व प्रसिद्ध बौद्ध पर्यटन स्थल सारनाथ से लगभग 4 से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह दोनों गांव जो एक दूसरे के पास हैं। पूर्वांचल के ये गांव ऐसे है जहां पर सबसे अधिक फूलों की खेती की जाती है। इन गाँवों में घर - घर लोग सिर्फ फूलों की ही खेती करते हैं। पूर्वांचल की सभी प्रमुख मंडियों में इन गाँवों से फूल जाते हैं। गांव में 12 महीने गुलाब (अलग-अलग प्रजाति के) की खेती होती है। इसके साथ ही गुड़हल यानि अरहुल, गेंदा, बेला, आदि की भी कई किस्में उगाई जाती हैं। होप संस्था का मानना है कि अगर इन गाँवों को विलेज टूरिज्म के रूप में प्रमोट किया जाए तो यह अच्छा पर्यटन स्थल बन सकते हैं।

7. चिरईगांव

यह गाँव वाराणसी शहर से लगभग 10 से 12 किलोमीटर दूर स्थित है। इस गाँव की लगभग 80 प्रतिशत आबादी मुरब्बा और अचार बनाने का काम करती है। इस गांव में ऐसे कई स्वयं सहायता समूह है जिसमें गांव की महिलाएं जुड़कर कार्य करती हैं। यह गांव नारी सशक्तिकरण के लिए एक बेहतरीन उदाहरणों में से एक है इनके कार्यों का और अधिक से अधिक बढ़ावा देने के उद्देश्य इस गांव को विलेज टूरिज्म के लिए प्रमोट करना चाहिए।

ये भी पढ़ें- ताजमहल से हर साल भारत को होती है करोड़ों रुपये की कमाई, ये है आंकड़ा 

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top