नाम के लिए बना अस्पताल, नहीं आते चिकित्सक  

नाम के लिए बना अस्पताल, नहीं आते चिकित्सक  खंडहर बन गया स्वास्थ्य केन्द्र

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

औरैया। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर सुविधा का दावा करने वाली सरकार इस क्षेत्र में विफल दिखाई दे रही है। जिले में ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं कितनी बद्तर हैं, ये अस्पताल को देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है।

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जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर हाईवे से दक्षिण दिशा में बसे गाँव बसतंपुर में उप स्वास्थ्य केंद्र बना हुआ है, अस्पताल में एक चिकित्सक, एक एएनएम और एक चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी की तैनाती है, लेकिन अस्पताल एएनएम के भरोसे चल रहा है। चिकित्सक को आने के लिए अस्पताल में फुर्सत नहीं है और एएनएम हफ्ते में एक से दो दिन अस्पताल का चक्कर भर लेती और उपस्थित रजिस्टर में हस्ताक्षर कर चली जाती हैं। ये तैनाती सिर्फ कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है।

चिकित्सालय में उग आयी है घास।

बसंतनपुर गाँव निवासी टीका राम (50 वर्ष) कहते हैं, “गाँव में अस्पताल तो बन गया, लेकिन स्वास्थ्य सेवाए नहीं हैं। चिकित्सक का कोई पता नहीं कब आता है और कब चला जाता है गाँव के लोगों को बीमारी होने पर शहर जाना पडता है।"

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गाँव के लोगों की माने तो यहां अस्पताल में महीने में एक या दो दिन के लिए एएनएम आती है जो टीकाकरण करके चली जाती हैं। बीमारी होने पर गाँव के लोगों को शहर लेकर मरीज को ले जाना पड़ता है। यहां चिकित्सक को तो कोई जानता तक नहीं है।

अस्पताल का गेट सड़ चुका है, आक्सीजन गैस का सिलेंडर धूल फांक रहा, जाला लगना साबित करता है कि यहां कभी कोई नहीं आता है। जब से अस्पताल बना है तब से बिल्डिंग भी धूल फांक रही है। यहां सवाल सबसे बडा इस बात है कि जब चिकित्सकों को यहां बैठना ही नहीं था तो अस्पताल बनवाने और उपकरण में खरीदने में पैसा क्यों खर्च किया गया। गाँव में स्वास्थ्य सेवाए बहुत ही दयनीय स्थिति पर है।

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बसंतपुर गाँव के प्रधान रामजीत कठेरिया (40 वर्ष) ने बताया, “गाँव में बने अस्पताल में एएनएम जब कभी टीका लगाने आती हैं चिकित्सक भी कभी आ गए तो ठीक है नहीं आए तो ठीक है, स्वास्थ्य विभाग में शिकायत के बावजूद नहीं आते हैं चिकित्सक।"

मुख्य चिकित्साधिकारी गिरीश कुमार इस बारे में कहते हैं, “चिकित्सक और एएनएम को सुबह आठ बजे अस्पताल पहुंचने के निर्देश हैं, अगर कोई चिकित्सक समय से नहीं पहुंचता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।"

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