आम की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए नवंबर-दिसम्बर के महीने में करें छिड़काव  

आम की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए नवंबर-दिसम्बर के महीने में करें छिड़काव  साभार: इंटरनेट 

रोहित श्रीवास्तव/अवंकितश्रीवास्तव-स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

बहराइच। तराई का यह जिला जहां आम की पैदावारी में पिछले कुछ वर्षो से आ रही गिरावट को दूर करने के लिए वह उत्पादकता बढ़ाने के लिए करने आम की फसल को कीटों से बचाना जरूरी होता है, उचित समय पर अगर प्रबन्धन किया जाए आम की उत्पादकता बढ़ायी जा सकती है।

इस माह में आम के पेड़ो में गुजिया व मिज कीट का प्रकोप प्रारम्भ होता है, जिससे पेड़ो में फल लगने से पहले ही छति पहुंच जाती है। यही वजह है कि आमों में उत्पादकता की कमी देखी जा रही है।

जिला उद्यान अधिकारी महेश कुमार श्रीवास्तव बागवानी को कीट के प्रकार व नियत्रंण के लिए सलाह देते हुए कहते हैं, “इस समय गुजिया कीट के शिशु जमीन से निकलकर पेड़ों पर चढ़ते हैं और मुलायम पत्तियां मंजरियो व फलों से रस चूस कर क्षति पहुचाते हैं। इसके कीट देखने में एक से दो मिमी लम्बे व हल्के गुलाबी रंग के चपटे और मादा वायस्क कीट सफेद रंग के पंखहीन एंव चपटे होते हैं।”

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“इस कीट के नियंत्रण के लिए बागों की गहरी जुताई/गुड़ाई की जाए और शिशु कीट को पेड़ों पर चढ़ने से रोकने के लिए चल रहा यह माह नवम्बर, दिसम्बर आम के पेड़ के मुख्य तने पर भूमि से 50, 60 सेमी की ऊंचाई पर 400 गज की पॉलिथीन सीट की 50 सेमी चौड़ी पट्टी को तने के चारों ओर लपेट कर ऊपर व नीचे सूतली से बांधकर पॉलिथीन सीट के ऊपरी व नीचले हिस्से पर ग्रीस लगा देना चाहिए, जिससे कीट पेड़ो के उपर न चढ़ सके, “उन्होंने आगे बताया।

इसके अलावा शिशुओं को जमीन पर मारने के लिए दिसम्बर के अंतिम या जनवरी के प्रथम सप्ताह में 15-15 दिन के अंतर पर दो बार क्लोरपाइरिफास (15 प्रतिशत) चूर्ण दो सौ पचास ग्राम प्रति पेड़ के हिसाब से तने के चारों ओर छिड़काव करना चाहिए। अधिक प्रकोप की स्थिति में अगर यदि कीट पेड़ों पर चढ़ जाते हैं, तो ऐसी दशा में मोनोक्रोटोफास 36 ईसी 2.00 मिली. दवा को प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर आवश्यकतानुसार छिड़काव करें।

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इसी प्रकार आम के बौर में लगने वाले मिज कीट मंजरिया, तुरन्त बने फूलो एंव फली तथा बाद में मुलायम कोपलो में अण्डे देती है। जिसकी सूडी अंदर ही अंदर खाकर क्षति पहुचाती है। इस तरह कीट के नियंत्रण के लिए यह आवश्यक है कि बागो की जुताई/गुड़ाई की जाए और समय से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना चाहिए।

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