ऐसे कैसे निर्मल होगी गंगा : 12000 करोड़ रुपए में खर्च हुए मात्र 1800 करोड़ 

Rishi MishraRishi Mishra   6 Jun 2017 6:54 PM GMT

ऐसे कैसे निर्मल होगी गंगा : 12000 करोड़ रुपए में खर्च हुए  मात्र 1800 करोड़ केंद्र सरकार ने 12000 करोड़ रुपए खर्च करने का फैसला किया था।

लखनऊ। पतित पावनी गंगा को आचमन योग्य बनाने का केंद्र सरकार का सपना किस तरह से पूरा होगा, उसका जवाब मिल गया है। खुद केंद्र सरकार ने सूचना के अधिकार तहत पूछे गए प्रश्नों के जो जवाब दिए हैं, उससे हकीकत सामने आ चुकी है। नमामि गंगे परियोजना जिसके तहत तीन साल में केंद्र सरकार ने 12000 करोड़ रुपए खर्च करने का फैसला किया था, उसमें से केवल 5500 करोड़ का प्रावधान किया गया। 3300 करोड़ पास हुए और मात्र 1800 करोड़ का ही खर्च किया जा सका है। ऐसे में गंगा किस तरह से निर्मल होगी ये एक बड़ा सवाल है। सूचना के अधिकार में पूछे गए एक सवाल में इस बात का जवाब मिला है।

भारत की जीवनदायिनी गंगा को पुनर्जीवन देने के सम्बन्ध में समय-समय पर किए गए बड़े-बड़े वादों की बात न की जाए तो बात कुछ अधूरी सी रहेगी । क्या आप जानते हैं कि वैज्ञानिक दृष्टि से गंगा का जल पीने और नहाने के योग्य नहीं रह गया है और इसकी पूरी जिम्मेदारी हमारी सरकारों की है। राजधानी लखनऊ के सिटी मांटेसरी स्कूल की राजाजीपुरम शाखा में कक्षा 11 की 15 वर्षीय छात्रा ऐश्वर्या पाराशर द्वारा लगाई गई एक आरटीआई के जवाब से जो चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। उसने केंद्र के गंगा साफ सफाई पर किए गए बड़े-बड़े वादों की हवा निकाल दी है।

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ऐश्वर्या ने अप्रैल माह की 15 तारीख को भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय में एक आरटीआई दायर कर साल 2014 से 2017 तक के समय में नमामि गंगे योजना पर किए गए खर्चे और गंगा सफाई योजनाओं के संबंध में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठकों की जानकारी मांगी थी। जिसके जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय के अवर सचिव एवं केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी प्रवीण कुमार ने ऐश्वर्या का आरटीआई आवेदन का जवाब दिया।

भारत सरकार के जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय को ट्रांसफर कर दिया था। इस मंत्रालय के अवर सचिव के. के. सपरा ने बीते मई की 29 तारीख को ऐश्वर्या को एक पत्र भेजकर इस संबंध में सूचना दी है सपरा ने ऐश्वर्या को बताया है कि वित्तीय वर्ष 2014 -15 में गंगा साफ सफाई के लिए 2053 करोड़ों रुपयों का बजट प्रावधान किया गया। जिसमें से महज 326 करोड़ रुपए रिलीज किए गए और केवल 170 करोड़ 99 लाख रुपए ही खर्च हो पाए।

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इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2015 -16 में गंगा साफ सफाई के लिए 1650 करोड़ों रुपयों का बजट प्रावधान किया गया। जिसमें से 1632 करोड़ रुपए रिलीज किए गए और केवल 602 करोड़ 60 लाख रुपए ही खर्च हो पाए। वित्तीय वर्ष 2016-17 में 1675 करोड़ रुपयों का बजट प्रावधान कर निर्गत किए गए लेकिन केवल 1062 करोड़ 81 लाख रुपए ही खर्च किए जा सके हैं। गंगा साफ सफाई के लिए पिछले तीन सालों में 12000 करोड़ रुपयों का बजट देने की बात कही गई है। उसमें से 5378 करोड़ ही बजट में दिए जाते हैं से उसमें 3633 करोड़ रुपए खर्च करने के लिए निकाले जाते हैं जिसमें से केवल 1836 करोड़ 40 लाख रुपए ही वास्तव में खर्चे जाते हैं। गंगा साफ सफाई पर खर्च की गई यह धनराशि खर्चे के लिए निकाली गई धनराशि की 50% है यानी कि खर्चे के लिए जितना धन वास्तव में निकाला गया उसमें से भी आधा खर्च नहीं हो पाया है। धनराशि बजट में निर्धारित 5378 करोड़ की धनराशि की महज 34% ही है।

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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की वेबसाइट है कि नमामि गंगे कार्यक्रम की शुरुआत जून 2014 में हुई थी और उस समय गंगा सफाई के इस कार्यक्रम को 5 वर्षों में 20000 करोड़ का बजट देने की बात कही गई थी। इस आधार पर 3 वर्षों का निर्धारित बजट 12000 करोड रुपए मानते हुए हैं अब तक हुए 1836.40 करोड़ के खर्चे को ऐश्वर्या ने निर्धारित बजट का 15.30% होने के आधार पर नाका फी बताया है।

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वित्तीय वर्ष 2017-18 में गंगा सफाई के लिए 2550 करोड़ का बजट रखा गया है। जिसमें बिना पैसा रिलीज हुए ही अब तक 25 करोड़ 71 लाख रुपए खर्चे जा चुके हैं। गंगा साफ सफाई की मीटिंग के संबंध में मांगी गई सूचना पर सपरा ने ऐश्वर्या को भारत सरकार की वेबसाइट देखने की बात कही जिसके आधार पर ऐश्वर्या ने बताया कि राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की अब तक छह मीटिंग हो चुकी हैं जिनमें से तीन की अध्यक्षता पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की है एक की अध्यक्षता वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है और दो की अध्यक्षता जल संसाधन नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने की है।

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