कौशल विकास के नाम पर युवतियों को दिया झांसा, पुलिस ने जिस्मफरोशी के आरोप में भेजा जेल

Abhishek PandeyAbhishek Pandey   20 Dec 2017 6:24 PM GMT

कौशल विकास के नाम पर युवतियों को दिया झांसा, पुलिस ने जिस्मफरोशी के आरोप में भेजा जेलकौशल विकास के नाम पर युवतियों को दिया झांसा, पुलिस ने जिस्मफरोशी के आरोप में भेजा जेल

लखनऊ। भारत में मानव तस्करी इस कदर हावी है कि तस्कर भोली-भाली युवतियों को केंद्र सरकार की कौशल विकास योजना का मखौल बना जिस्मफरोशी के दलदल में धकेलने का काम कर रहे हैं।

ऐसा ही एक ताजा मामला उत्तर प्रदेश की लखनऊ पुलिस ने बीते महीने उजागर किया है, जहां कुछ लोग नार्थ ईस्ट की नाबालिग लड़कियों को कौशल विकास के तहत नौकरी दिलाने का वादा कर यहां लेकर आ गए। इसके बाद उन युवतियों को गोमतीनगर के विनयखंड में एक मसाज पार्लर में नौकरी दिलवा दी। नौकरी पाने की खुशी नार्थ-ईस्ट की युवतियों के अंदर इतनी अधिक थी कि, उन्होने अरूणाचल अपने घरवालों को फोन कर हर महीने रुपए भेजने की बात कही। लेकिन उन युवतियों को यह नहीं पता था कि, जिसे वह साधारण नौकरी समझ रही थी असल में वह एक ऐसा दलदल था, जिसमें घुसने के बाद वहां से बाहर निकलना नामुमकिन है।

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धीरे-धीरे युवतियों से मसाज के स्थान पर संचालक जिस्मफरोशी का जबरन धंधा करवाने लगे। इस बीच लखनऊ पुलिस को सूचना मिली कि गोमती नगर के विनय खण्ड -4 में आयुर्वेदिक थाई स्पा और सैलून में जिस्मफरोशी का धंधा चल रहा है। पुलिस ने पार्लर पर छापा मार ग्राहकों सहित अरूणाचल की युवतियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की इस कार्रवाई पर जनता में भूरी-भूरी प्रशांसा हुई, लेकिन इसके बिल्कुल उलट कहानी का दूसरा पहलु पुलिस देखना ही भूल गई कि जो युवतियां पहले से ही मानव तस्करी का शिकार होकर आई हैं, उन्हें घर भेजने के स्थान पर पुलिस ने लखनऊ की गोसाईगंज जेल की काल कोठरी दिखा दी।

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वहीं दूसरी ओर घटना की सूचना पाकर अरूणालच से लड़कियों के परिवारवाले 1 महीने से लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं और अपनी बेटियों को रिहा कराने के लिए न्याय की भींख मांग रहे हैं। जबकि युवतियों की अदालत में जमानत याचिका खारिज कर दी गई। युवतियों के घरवालों का कहना है कि, जेल भेजने से पहले पुलिस को अपने स्तर से अरूणाचल से लड़कियों के संबंध में चरित्र सत्यापन करना चाहिए था। उन्होने कहा, "जब हम लखनऊ जेल में लड़कियों से मिले, उन्होंने हमें बताया कि वे स्पा में चल रहे अवैध गतिविधियों से बिल्कुल अनजान थे।''

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पकड़ी गई एक लड़की के पिता ने कहा कि जो लोग अरूणाचल के तिरप जिले में उनके पड़ोसी हैं, वह इस साल 5 मई को दिल्ली स्थित अमेज़िंग नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के गुवाहाटी केंद्र में कौशल विकास कार्यक्रम में दाखिला करवाया था। कंपनी ने प्रधानमंत्री की कौशल विकास योजना के तहत गुवाहाटी में अपने केंद्र में प्रशिक्षण प्रदान करने का एक बोर्ड भी लगाया था। माता-पिता ने कहा कि, प्रशिक्षण आयोजकों ने 24 जून को लखनऊ में टेडीपुलिया के पास लड़कियों को लिसा स्पा और मसाज सेंटर में इंटर्नशिप के लिए एक महीने करवाया। जिसके बाद लड़कियों ने कुछ समय के लिए वहां काम किया और बाद में नौकरी के आश्वासन पर गोमती नगर सैलून उन्हें भेज दिया गया। जहां लड़कियों को इसका इल्म नहीं था कि, जिस स्थान पर वह काम कर रही हैं, वहां जिस्मफरोशी का धंधा चल रहा है।

वहीं लड़कियों के घरवालों की मदद करने वाले हाईकोर्ट के वकील आईबी सिंह ने बताया कि, नार्थ-ईस्ट से लड़कियों को कौशल विकास के नाम पर तस्करी कर जिस्मफरोशी सहित कई अन्य धंधों में धकेला जा रहा है। जबकि इन लड़कियों के पकड़े जाने पर पुलिस लड़कियों पर कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार कर लेती है, जबकि कहानी की तह तक पुलिस नहीं जाना चाहती है। आखिर इतनी दूर से लड़कियों को यूपी, दिल्ली तक लाने वाले शख्स कौन है। उन्होंने कहा कि, लड़कियों के माता-पिता के पास कौशल विकास कार्यक्रम के नामांकन पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज भी हैं।

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आईबी सिंह ने कहा कि लखनऊ पुलिस ने बगैर तथ्यों की पुष्टि किए बिना लड़कियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उन्होंने कहा कि, अदालत को इस पूरी घटना के अनुक्रम और पुलिस की लापरवाही के संबंध में पूरी जानकारी दूंगा। उन्होंने कहा कि, पुलिस ने लड़कियों के परिवारवालों को गिरफ्तारी की कोई सूचना नहीं दी। वहीं गोमती नगर के सीओ दीपक कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस को एक शिकायतकर्ता ने लिखित जानकारी दी थी।

इस शिकायत के बाद ही मसाज पार्लर पर छापा मारा गया, जहां से इन दो लड़कियों सहित पांच अन्य स्थानीय लड़कियों को गिरफ्तार किया गया। जबकि दो ग्राहकों को भी मौके से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। उधर पूरे प्रकरण की जांच कर रही सीओ कैंट तनु उपाध्याय ने कहा कि, मसाज पार्लर पर गोमतीनगर पुलिस ने छापा मारा था, जिसके बाद जांच का जिम्मा मुझे सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि, विवेकानंद समाजिक संगठन से अरूणाचल की युवतियों की जानकारी मिली है, जिसकी जांच जारी है कि, मामला मानव तस्करी से जुड़ा हुआ है की नहीं।

भारत में मानव तस्करी के आकड़े

राष्ट्रीय अपराध रिकोर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े के अनुसार वर्ष 2016 में भारत में मानव तस्करी के 8,000 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिसमें 182 विदेशियों सहित कुल 23,000 पीड़ितों को रिहा कराया गया है। देशभर में वर्ष 2015 के 6,877 मामलों की तुलना में पिछले साल कुल 8,312 मामले सामने आए। एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में कुल 15,379 पीड़ितों में से 9,034 पीड़ितों यानी कुल 58 प्रतिशत की आयु 18 वर्ष से कम थी। वहीं वर्ष 2016 में रिहा कराए गए 14,183 पीड़ितों की आयु 18 वर्ष से कम थी।

मानव तस्करी के सबसे अधिक 3,579 मामले (कुल का करीब 44 प्रतिशत) पश्चिम बंगाल में दर्ज किए गए. वर्ष 2015 में असम पहले और पश्चिम बंगाल 1,255 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर था। असम में वर्ष 2016 में मानव तस्करी के 91 मामले दर्ज किए गए, जो वर्ष 2015 के 1,494 मामलों की तुलना में काफी कम थे। सूची में इस बार राजस्थान दूसरे नंबर पर रहा जहां 1,422 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद गुजरात में 548, महाराष्ट्र में 517 और तमिलनाडु में 434 मामले दर्ज किए गए।

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