यूपी: दस साल पहले हाई कोर्ट द्वारा दिये गए आदेश के बावजूद शहरों में चल रहीं अवैध डेयरियां

Diti BajpaiDiti Bajpai   19 Sep 2017 8:50 AM GMT

यूपी: दस साल पहले हाई कोर्ट द्वारा दिये गए आदेश के बावजूद शहरों में चल रहीं अवैध डेयरियांगंदगी के बीच बंधे जानवर।                                           फोटो- विनय गुप्ता

लखनऊ। हाई कोर्ट के 2007 के आदेश के बावजूद उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हजारों की संख्या में फैली अवैध डेयरियों को पिछले दस वर्षों में प्रशासन शहर से बाहर कर पाने में नाकामयाब रहा है। शहरी विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने गाँव कनेक्शन को बताया कि अब इन्हें जल्द शहरी परिधि के बाहर किया जाएगा।

शहरों में धड़ल्ले से चल रहीं ये अवैध डेयरियां न सिर्फ गंदगी और बीमारियां बांट रही हैं, बल्कि नगर निगम के राजस्व को भी चपत लगा रही हैं। लखनऊ की ही बात करें तो नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में अवैध रूप से करीब 2600 डेयरियां चल रही हैं, जो शहर की तस्वीर बिगाड़ रही हैं।

ये भी पढ़ें- डेयरी व्यवसाय में मजदूरों की जगह ले रही हैं आधुनिक मशीनें

लखनऊ के गोमती नगर क्षेत्र में अवैध रूप से डेयरी चला रहे हरदोई के मूल निवासी बशीर खां (45 वर्ष) बताते हैं, “हम पिछले सात वर्षों से यहां पर डेयरी चला रहे हैं। गोमती नगर के कई घरों में दूध देने जाते हैं, अच्छे रुपए मिल जाते हैं। केवल हम ही नहीं, हमारे साथ कई परिवार हैं जो हरदोई से आकर लखनऊ में बसे हैं और डेयरियां चला रहे हैं।” अभी तक उत्तर प्रदेश के कुछ ही जिलों में शहर के बाहर कैटल कॉलोनी बनाई गई हैं। जहां बनी हैं, वहां पर भी अब तक बहुत ही कम संख्या में पशुपालकों ने डेयरी स्थानांतरित की है।

मेरठ जिले के डेयरी संचालक संघ के महामंत्री हाजी असलम बताते हैं, “सिर्फ मेरठ शहर में 2200 अवैध डेयरियां चल रही हैं। इन डेयरियों में 30 हजार से अधिक पशु हैं। शहर में करीब 70 फीसदी गंदगी इन डेयरियों की देन है। इसलिए इन्हें जल्द शहर से बाहर करना चाहिए।“

मेरठ में दो साल पहले डेयरी संचालकों ने नगर आयुक्त से मिलकर कैटल कालोनी मांग उठाई थी, लेकिन उसके बाद आज तक कुछ नहीं हुआ, ऐसे में समस्या जस की तस बनी हुई है।

लखनऊ के नगर आयुक्त उदय राज सिंह बताते हैं, “डेयरियों को हटाने के लिए एक बहुत बड़ी योजना की जरुरत है। उच्च न्यायालय ने ये कहा है कि इनको वैकल्पिक जगह दें। वैकल्पिक जगह के लिए एलडीए आवास विकास को कहा गया है कि आप लोग जमीन चिहिन्त करें, जहां इन डेयरियों को शिफ्ट किया जाए। उनका भी काम चल रहा है। निगम की तरफ से अभियान चलाकर डेयरियों को धीरे-धीरे हटाया जा रहा है।“

ये भी पढ़ें- वीडियो : इस डेयरी में गोबर से सीएनजी और फिर ऐसे बनती है बिजली

हाल में नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने लखनऊ के कुछ इलाकों में निरीक्षण किया था, जहां अवैध डेयरियों का संचालन होने पर नगर आयुक्त को इन डेयरियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का आदेश दिया था। इतना ही नहीं, मंत्री ने मंडलायुक्त अनिल गर्ग को इन डेयरियों को हटाने में पीएसी बल का उपयोग करने भी निर्देश दिए थे।

हाईकोर्ट ने शहर में चल रही डेयरियों पर सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया था कि डेयरियों को शहर से बाहर बसाया जाए। शहर के अंदर चलने वाली डेरियों को अवैध माना जाएगा। इसके बाद हाईकोर्ट ने एक और निर्देश था। इसमें कहा गया कि यदि डेयरियां शहर में वापस लौटती है तो उस क्षेत्र के थानाध्यक्ष या संबंधित अधिकारी को जिम्मेदार माना जाएगा। साथ ही उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।

कामधेनु वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष नवनीत महेश्वरी बताते हैं, “शहरों के कई इलाकों में जो नालियां जाम होती हैं, उनका सबसे बड़ा कारण होता है गोबर। इन अवैध डेयरियों में गोबर को बहा दिया जाता है, जबकि व्यवसायिक डेयरियों में गोबर को वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। इन डेयरियों में सबसे ज्यादा ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का प्रयोग किया जाता है। इन डेयरियों को हटाने के लिए शहर के बाहर की जगह जल्द से जल्द चिहिन्त करनी चाहिए।’’

कानपुर नगर में लगभग 2000 से ज्यादा अवैध डेयरियां संचालित की जा रही हैं। जबकि इसके लिए कानपुर विकास प्राधिकरण ने कानपुर के बिनगँवा में कैटल कॉलोनी बनाई है, इनमें डेयरी वालों को 149 भूखंड दिए गए, लेकिन कुछ लोगों को छोड़कर ज्यादातर लोगों ने अपने डेरियों को यहां शिफ्ट नहीं किया।

ये भी पढ़ें- भैंसा भी बना सकता है आपको लखपति, जानिए कैसे ?

शहर में वर्ष 2012 में तत्कालीन नगर आयुक्त एनकेएस चौहान ने नालियों और सीवर में गोबर बहाने पर रोक लगा दी थी और यदि ऐसा करते कोई पकड़ा जाता था तो उस पर चलान के साथ मुकदमा दर्ज होना था, मगर धीरे-धीरे स्थितियां जस की तस होती गईं।

कानपुर के नगर आयुक्त अविनाश सिंह कहते हैं, “वर्तमान में डेरियां कानपुर शहर के लिए एक बड़ी समस्या है और जल्द से जल्द इनको शहर से बाहर किया जाएगा और यदि कोई ऐसा नहीं करेगा तो उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करवाया जाएगा।“

हाल में मैंने खुद कुछ इलाकों में निरीक्षण किया है और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इन डेयरियों से जुर्माना वसूलते हुए इन्हें शहर के बाहर जल्द से जल्द शिफ्ट किया जाए।
सुरेश खन्ना, नगर विकास मंत्री

डेयरी संचालकों के बारे में उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बीबीएस यादव ने बताया, “जानकारी के अभाव में ये पशुपालक डेयरियों का संचालन कर रहे हैं। ज्यादातर इन डेयरियों में गंदगी तो मिलेगी ही, साथ ही इनका जो दूध है वो बिल्कुल हाईजीनिक नहीं होता है। न हाथों की सफाई, न उस बर्तन की, जिसमें उस दूध को रखा जाता है। जिनके घरों के सामने ये डेयरियां हैं, वहां तो इस दूध को नहीं बेच पाते हैं। दूसरे इलाके में बेच देते थे क्योंकि उनको नहीं पता होता कि वो कैसा दूध पी रहे है।”

हालांकि इलाहाबाद में शहरी क्षेत्र में चलने वाले अवैध डेयरी संचालकों को चरणों मे नोटिस देने का फैसला नगर आयुक्त हरिकेश चौरसिया की ओर से लिया गया है। सूची के पहले चरण में 50 डेयरी संचालकों को नोटिस दिया गया है। नोटिस देने के बाद प्रतिदिन 10 हज़ार रुपये के हिसाब से जुर्माना देय होगा। यहां के नगर निगम पशुधन अधिकारी धीरज गोयल बताते हैं, “नोटिस देने के बाद भी अगर शहरी क्षेत्र में अवैध रूप से डेयरी संचालित की जाती हैं, तो इन अवैध डेयरी संचालकों पर जुर्माना कड़ाई के साथ वसूला जाएगा।“

ये भी पढ़ें- ख़बर जो सवाल खड़े करती है : भारत में दूध उत्पादन तो खूब हो रहा है लेकिन पीने को नहीं मिल रहा है

हाई कोर्ट ने दिया था सख्त निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शहर की सीमा में स्थित ऐसी सभी डेयरी को शहर से बाहर करने के वर्ष 2007 में दिए गए निर्देशों का पालन करने को कहा था। तब कोर्ट ने कहा था कि वर्ष 1998 में सरकार ने इस संबंध में शासनादेश भी जारी किया है, इसके बावजूद अमल नहीं हो रहा है। चीफ जस्टिस डॉ. डीवाई चन्द्रचूड़ और जस्टिस यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने कहा था कि शहर के अंदर चलने वाली डेयरियों को अवैध माना जाएगा।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top