ढाई लाख की आबादी में स्वास्थ्य सेवाएं सिफ़र

गाँव कनेक्शनगाँव कनेक्शन   20 April 2017 11:46 AM GMT

ढाई लाख की आबादी में स्वास्थ्य सेवाएं सिफ़रक्षेत्र में पीएचसी, सीएचसी और एक संयुक्त चिकित्सालय भी है, पर सुविधा कुछ भी नहीं।

गाँव कनेक्शन संवाददाता

लखनऊ। ढाई से तीन लाख की आबादी और इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवा के नाम पर मरीजों को मिलता है लखनऊ रेफर होने का पर्चा। कहने को क्षेत्र में पीएचसी, सीएचसी और एक संयुक्त चिकित्सालय भी है, पर सुविधा कुछ भी नहीं।

सरोजनी नगर से बंथरा के क्षेत्र में करीब 70 गांव आते हैं और यदि रात में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाये तो उसको लखनऊ ले जाने के आलावा ग्रामीणों के पास कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में मरीज की जान राम भरोसे ही होती है। ग्रामीणों का कहना है कि विधायक से लेकर अधिकारियों तक से कई बार मांग की गई कि उन्हें इतनी व्यवस्था मिले कि लोगों को मौके पर कम से कम इतना उपचार मिल सके कि वे मरीज को सुरक्षित बड़े अस्पताल तक पहुंचा सकें।

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हरौनी स्टेशन के पास बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल यह है कि वह खुद ही वेंटीलेटर पर हैं और उसमें ग्रामीणों को उपचार मिल जायेगा, यह सोचना ही बेइमानी होगी। इस पीएचसी पर करीब 15 गाँव की जिम्मेदारी है और इसमें कहने को तो प्रसव की व्यवस्था है, मगर यहां पर कोई भी महिला डॉक्टर नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र में चार नर्सों के भरासे ही प्रसव का कार्य है। साथ ही यहां पर पीएचसी प्रभारी खुद भी बीएचएमएस की डिग्री धारक हैं। ऐसे में यहां पर चल रही स्वास्थ्य व्यवस्था के बारे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

हरौनी गाँव के शीतला सिंह ने बताया कि कहने के लिए पीएचसी है, पर यहां पर उपचार कुछ भी नहीं है। अगर किसी की हालत बिगड़ जाये तो उसे प्राथमिक उपचार तक देने की व्यवस्था यहां पर नहीं है। वहीं, निवाजीखेड़ा गाँव के डॉ. राम सुमेर ने कहा कि अगर किसी की तबीयत खराब होती है तो वह पीएचसी जाने से अच्छा निजी डाक्टर के पास जाना उचित समझते हैं क्योंकि वहां पर जाने से सिर्फ समय ही खराब होता है। ग्राम रौतापुर के शिव बालक कहते हैं कि सबसे ज्यादा दिक्कत तो गरीबों की है क्योंकि उनके पास तो इसके अलावा कोई और विकल्प भी नहीं है।

हमारे पास जो भी संसाधन हैं, उसके हिसाब से लोगों को सुविधा देने का पूरा प्रयास करते हैं। मगर जो सुविधा हैं ही नहीं, उसके लिए तो आलाधिकारी ही कुछ कर सकते हैं। महिला डॉक्टर के लिए पत्र भेज चुके हैं, पर अभी तक तो तैनाती नहीं हुई है। ऐसे में गंभीर अवस्था में मरीज को सिर्फ लखनऊ भेजने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता है।
डॉ. अरूण कुमार सोनकर, पीएचसी प्रभारी, हरौनी

मरीजों के हाथ लगती है निराशा

ननमऊ ग्राम के डॉ. चन्द्रप्रकाश का कहना है कि पीएचसी में बड़े मर्ज का उपचार न मिले भले ही पर इतना तो उपचार हो कि मरीज को विशेषज्ञ डॉक्टर तक पंहुचने का समय मिल जाये। मन्नीखेड़ा ग्राम के सूर्यप्रकाश ने कहा कि कभी-कभी तो यह हालात हो जाती है कि छोटी समस्या पर भी पीएचसी से निराशा ही हाथ लगती है।

रमदासपुर गाँव के राहुल तिवारी कहते हैं कि सरोजनी नगर से बंथरा क्षेत्र में करीब 70 गाँव हैं और इनकी आबादी करीब ढाई से तीन लाख होगी पर उपचार के नाम पर कुछ भी नहीं है। ऐसे में गरीब व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी दिक्कत पहले मरीज को लखनऊ ले जाने की फिर वहां पर उसका उपचार कराने की होती है क्योंकि यहां पर इमरजेंसी के नाम पर सिर्फ खाना पूरी ही है।

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