युवा कल्याण विभाग : नींद में निजाम, 80 हजार खपाने को 42 लाख का इंतजाम

युवा कल्याण विभाग : नींद में निजाम, 80 हजार खपाने को 42 लाख का इंतजामफोटो साभार :- युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग यूपी

लखनऊ। ग्रामीण प्रतिभाओं और युवाओं को खेलकूद में बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश में युवा कल्याण विभाग कार्यरत है। प्रदेश सरकार की अनदेखी इस विभाग में इस कदर है कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। इसी का एक उदाहरण आगरा जिला है। जिले में युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग में पिछले दो वर्षों से खर्च करने के लिए महज 80 हजार रुपये का सरकारी बजट मिला है। हैरानी वाली बात ये कि इस विभाग के कर्मचारियों पर सरकार सालाना 42 लाख से अधिक खर्च करती है।

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र में खेल की स्थिति खराब है। यहां के खिलाड़ी प्रशिक्षण और मौके के अभाव में खेल छोडऩे को मजबूर हैं। जो आगे बढ़ाना चाहते हैं उन्हें गाँव छोडऩा पड़ता है। हालांकि खेलों को बढ़ावा देने के लिए युवा कल्याण विभाग है, लेकिन वह भी बजट का रोना लेकर कुछ नहीं करता। प्रदेश के कई जिलों में पिछले दो वर्षों से बजट नहीं आया है। बिना बजट के ग्रामीण प्रतिभाएं कैसे निखरेंगी और आगे बढ़ेंगी ये एक सोचने वाला प्रश्न है।

आगरा जिले में 15 ब्लॉक हैं। इन सभी में युवा कल्याण अधिकारी के साथ तीन क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी और एक कनिष्ठ सहायक तैनात है। इस प्रकार से 15 बीओ, 15 खेल प्रशिक्षक और 15 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सहित कुल मिलाकर 45 कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में तीन क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी सहित एक कनिष्ठ सहायक कार्यरत हैं।

हाल ही में शासन की ओर से विभाग को स्पेशल बजट के तौर पर 80 हजार रुपये दिसंबर में सांस्कृतिक और खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन कराने के लिए जारी किए गए हैं। यह मजाक से कम नहीं कि 42 लाख रुपये से अधिक सालाना तनख्वाह पाने वाले अधिकारी-कर्मचारी दो साल में सिर्फ 80 हजार से आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा बना रहे हैं। कारण यह भी कि विभाग के पास योजनाओं पर खर्च के लिए पिछले दो साल से बजट नहीं है, तमाम योजनाएं अधर में लटकी हैं। विभागीय अधिकारी और कर्मचारी जनपद में पंजीकृत 400 प्रांतीय रक्षक दल के जवानों को हर माह तैनाती देने का काम कर रहे हैं। गांव-देहात के युवाओं को खेलकूद में आगे बढ़ाने का जिम्मा युवा कल्याण विभाग पर है।

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बजट का फैसला शासन स्तर से लिया जाता है। 2015 से अभी तक कोई बजट नहीं आया है। हाल में सांस्कृतिक और खेलकूद कार्यक्रम कराने के लिए जिला योजना के तहत 80 हजार का बजट मिला है।
आदित्य कुमार, जिला युवा कल्याण अधिकारी, आगरा

बजट के अभाव में मिनी स्टेडियम नहीं बने

युवा कल्याण विभाग को जनपद के हर विकास खंड में 6-7 एकड़ जमीन तलाश कर एक मिनी स्टेडियम का निर्माण कराना था, लेकिन बजट के अभाव में स्टेडियम नहीं बन सके। आगरा के अकोला और जगनेर विकास खंड में स्टेडियम बनाने का प्रस्ताव भी भेजा गया, लेकिन अब शायद ही वहां स्टेडियम बने।

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पिछली सरकार में बना स्टेडियम अभी तक नहीं हुआ हैंडओवर

जिला युवा कल्याण अधिकारी आदित्य कुमार बताते हैं, "किरावली ब्लॉक में एक स्टेडियम है जिसके लिए 2015-16 में 1.43 करोड़ बजट आया था। वह भी अभी तक विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया है।" अब केंद्र सरकार पायका योजना के स्थान पर ‘खेलो इंडिया खेलो’ योजना लांच करने जा रही है। सवाल यह कि बिना बजट के कैसे खेलेगा इंडिया। इतना ही नहीं विभाग अब बिना बजट के गाँव में अंडर-16 खेलकूद (क्रिकेट नहीं) प्रतियोगिताएं भी नहीं करा पा रही हैं।

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कई जिलों में यही हाल

औरैया जिले के जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी विनीत कुमार तिवारी बताते हैँ, "इस वर्ष विभाग को सांस्कृतिक और खेलकूद कार्यक्रम कराने के लिए 30 हजार रुपए का बजट आया था। इस बजट को क्षेत्र में सांस्कृतिक और खेलकूद कार्यक्रम में खर्च कर दिया गया है। हमारे विभाग में तीन लोगों का स्टाफ है।" वहीं कन्नौज जिले के जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी अमिताभ कुमार बताते हैँ, "वर्ष 2015-16 में जिले में संस्कृतिक कार्यक्रम के लिए 10 हजार रुपए और जिले में खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए 50 हजार का बजट आया था। जो कार्यक्रम में खर्च कर दिया गया था। उसके बाद से अभी तक कोई बजट नहीं आया है। विभाग में चार लोगों का स्टाफ है।"

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