इस सत्र में भी शायद ही समय से मिल पाएं छात्रों को किताबें

इस सत्र में भी शायद ही समय से मिल पाएं छात्रों को किताबेंछपाई की प्रक्रिया से गुजरते हुए किताबों के वितरण में लम्बा समय लग सकता है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। पिछले वर्ष परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को छमाही परीक्षा के बाद नयी किताबें मिल सकी थीं। इस वर्ष भी कुछ ऐसी ही संभावना नजर आने लगी हैं। हाल यह है कि किताबों की छपाई के टेंडर की प्रक्रिया भी अभी पूरी तरह से सम्पन्न नहीं हो सकी है। इसके बाद छपाई की प्रक्रिया से गुजरते हुए किताबों के वितरण में लम्बा समय लग सकता है।

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सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 1.98 लाख प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले 1.96 करोड़ बच्चों के लिए इस बार भी लगभग 250 करोड़ रुपए की किताबों की छपाई होनी है, जो बच्चों को सरकार द्वारा मुफ्त दी जाती हैं। लगभग 13 करोड़ किताबों की छपाई इस बार होनी है। पाठ्य पुस्तक अधिकारी अमरेन्द्र सिंह कहते हैं, “टेंडर के लिए विज्ञापन हो चुका है और टेक्निकल बिड खुल चुकी है। फाइनेंशियल बिड बुधवार को खुलने की प्रक्रिया होगी।

इसके बाद रेट आने और आर्डर दिये जाने के बाद छपाई की प्रक्रिया सम्पन्न होगी। संभावना है कि जुलाई तक किताबों का वितरण शुरू हो जाये।” उन्होंने कहा कि अभी टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने पर जब पब्लिशर्स द्वारा रेट दिये जायेंगे, तब ही यह बताया जा सकता है कि इस बार कितने की छपाई होनी है, लेकिन संभावना है कि इस बार भी लगभग 250 करोड़ रुपये की छपाई होगी।” पिछले वर्ष टेंडर की प्रक्रिया में पेंच फंस जाने से छपाई में देरी होना बताया गया तो इस बार विधान सभा चुनाव के चलते टेंडर देर से होने की बात शिक्षाधिकारियों ने कही।

उधर कालीचरण इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. महेन्द्रनाथ राय कहते हैं कि शिक्षा विभाग को हमेशा से पता होता है कि किताबों का वितरण स्कूलों में होना है और किताबों की छपाई समय से होनी चाहिये। परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है और माध्यमिक स्कूलों में जुलाई से शुरू हो जायेगा, लेकिन अभी तक टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है। इस बार भी किताबें छमाई परीक्षा तक भी नहीं मिल सकेंगी, ऐसी संभावना नजर आ रही है।” उन्होंने कहा “सरकार सही से ध्यान नहीं दे रही है, केवल मंत्री बदल देने से शिक्षा व्यवस्था सही नहीं होगी। उन शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपनी होगी जो सही तरह से निभा सकें।”

टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिये थी, लेकिन विधान सभा चुनाव के कारण टेंडर में देरी हुई है। फिलहाल टेंडर की प्रक्रिया जारी है और किताबों की छपाई जल्द ही शुरू होगी।
ललिता प्रदीप, संयुक्त शिक्षा निदेशक, बेसिक

पढ़नी पढ़ती हैं पुरानी किताबें

वहीं, पूर्व माध्यमिक विद्यालय, कठिंगरा, काकोरी के प्रधानाध्यापक शाहिद अली आब्दी कहते हैं, “परिषदीय स्कूलों में एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। नयी कक्षा में बच्चों को नयी किताबें पढ़ने का मन करता है, लेकिन पुरानी पढ़नी पड़ती हैं। किताबों का वितरण सत्र की शुरुआत में ही हो जाना चाहिये, लेकिन ऐसा कभी होता नहीं है। ऐसा लग रहा है कि इस बार भी बच्चों को किताबों के लिए लम्बा इंतजार करना होगा।

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