यूपी में बाढ़ ने बिगाड़ दिया कृषि विभाग का गणित, अब तक हजारों एकड़ फसल तबाह

Ashwani NigamAshwani Nigam   18 July 2017 7:46 PM GMT

यूपी में बाढ़ ने बिगाड़ दिया कृषि विभाग का गणित, अब तक हजारों एकड़ फसल तबाहउत्तर प्रदेश में बाढ‍़ का एक दृश्य।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने इस साल खरीफ सीजन में पिछले साल के मुकाबले फसलों की बुवाई का क्षेत्रफल और खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है लेकिन प्रदेश में बाढ़ के कहर ने किसानों के साथ ही कृषि विभाग को भी चिंतित कर दिया है। कृषि विभाग के निदेशक ज्ञान सिंह ने बताया '' इस खरीफ सीजन में पिछले साल 91.44 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुवाई के मुकाबले इस साल 91.58 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य तय किया गया था लेकिन पूरे प्रदेश में अभी तक 10.49 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है। जो निर्धारित लक्ष्य का मात्र 11.46 प्रतिशत है।''

उत्तर प्रदेश में घाघरा, राप्ती, सरयू, गंगा, यमुना और इनकी सहायक नदियां तबाही मचाए हुए हैं। बाढ़ से लाखों लोग बेघर हो गए हैं वहीं खेती योग्य हजारों हेक्टेयर जमीन पानी में डूब चुकी है। जिसमें बुवाई और बिना बुवाई वाले दोनों क्षेत्र शामिल हैं। उत्तर प्रदेश सिंचाई और जल संसाधन विभाग की तरफ से 18 जुलाई को जारी बाढ़ बुलेटिन के अनुसार प्रदेश में प्रदेश के तराई और गंगा बेसिन वाले क्षेत्र सबसे ज्यादा बाढ़ से प्रभावित हैं।

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लखीमपुर के रहने वाले रमेन्द्र जनवार ने बताया '' उत्तर प्रदेश का तराई क्षेत्र बाढ़ फिर डेंजर जोन बन गया है। बाढ़ से हजारों एकड़ फसल तबाह हो चुकी है। पशुओँ को चारा नहीं मिल पा रहा है। भू-कटान की जद मेँ आने वाले गांवों में लोग अपने हाथों से अपनी खून पसीने की कमाई से बनाए गए आशियाने तोड़ रहे हैं, खिड़की, दरवाजें और ईंट सहित जितना सामान बचा सकें उसे बचाने में लगे हैं। हजारों लोग विस्थापित होकर सडकों के किनारे खुले आसमान के नीचे रातें गुजार रहे हैं। ''

सिंचाई विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित जिले लखीमपुर खीरी, बहराइच, इलाहाबाद, मीरजापुर, बलिया, गोंडा और महराजगंज हैं, वहीं गोरखपुर, वाराणसी अैर चंदौली में भी से सबसे ज्यादा लोग प्रभावित हैं। यह ऐसे जिले हैं जहां पर खरीफ की मुख्य फसल धान की सबसे ज्यादा खेती होती है। इन जिलों में खरीफ सीजन की मक्का, ज्वार, बाजरा, तिल, उर्द, मूंग, अरहर, मूंगफली, तिल और सोयाबीन जैसी फसलों की बुवाई भी बहुत कम हुई है।

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ऐसे में उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने पिछले साल खरीफ में पैदा हुए 185.11 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न के मुकाबले इस बार जो 194.62 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है उसपर असर पड़ता दिख रहा है। गोरखपुर जिले के सहजनवा तहसील के पाली ब्लाक के ग्राम कलानी निवासी लोकेश तिवारी ने बताया '' बाढ़ के कारण उनकी 3 बीघा धान की खेती पानी में डूब गई। हमारे गांव के अधिकतर किसानों के खेत बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं। '' हालांकि कृषि विभाग का दावा है कि बाढ़ कम होते ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बुवाई को तेज किया जाएगा।

कषि विभाग के लिए राहत की खबर यह है पिछले दो दिनों में प्रदेश में खतरे के निशान से उपर बह रही नदियों में गिरावाट आई है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता सूचना प्रणाली संगठन सुरेश चंद्र शर्मा ने बताया ''दो दिन से प्रदेश में भारी बरसात में कमी आई है जिसके कारण 18 जुलाई को प्रदेशभर के जो आंकड़े मिले हैं उसके मुताबिक नदियों का पानी घटा है। ''

बाढ़ से बचाने वाली 189 परियोजनाएं अधूरी, 100 करोड़ से ज्यादा खर्च

उत्तर प्रदेश में हर साल बाढ़ की तबाही से जहां घर और मकान तो ढहते ही हैं वहीं खेती योग्य उपजाऊ जमीन भारी पैमाने पर तबाह होती है। नदियों के किनारे रहने वाले किसान इस बात को लेकर सहमे रहते हैं कि वह खेत में बुवाई करें कि नहीं क्योंकि बाढ़ सबकुछ बहा ले जाती है। उत्तर प्रदेश में पिछले साल बाढ़ से 25 जिलों में लगभग एक करोड़ आबादी प्रभावित हुई थी। सिंचाई विभाग के अनुसार प्रदेश में 29.44 लाख हेक्टेयर भौगोलिक क्षेत्र में से 7.336 लाख हेक्टयर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के अंतगर्त आता है।

बाढ़ नियंत्रण और इसके उचित प्रबंधन की मांग पिछले कई दशक से उठ रही है लेकिन अभी तक राज्य योजना के तहत मात्र 1.54 लाख हेक्टेयर जमीन को ही बाढ़ सुरक्षित बनाया गया गया है। उत्तर प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण को लेकर पिछली सरकारें कितनी गंभीर रही है इसके बानगी के लिए यह बताना जरूरी है कि 21 साल बाद 23 अप्रैल 2017 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यता में बाढ़ नियंत्रण परिषद स्थायी समिति की बैठक हुई थी। स्थिति यह है कि प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण के लिए 189 परियोजनाएं अधूरी हैं।

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