हर हाल में लोगों की मदद करने वाली कानपुर देहात की कंचन मिश्रा को मिला बाबा साहेब नोबेल पुरस्कार 

Neetu SinghNeetu Singh   13 April 2017 9:02 PM GMT

हर हाल में लोगों की मदद करने वाली कानपुर देहात की कंचन मिश्रा को मिला बाबा साहेब नोबेल पुरस्कार गायक उदित नारायण कंचन को अवॉर्ड देते हुए

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। कानपुर देहात जिले में अगर कोई ज़रूरतमंद पुरुष या महिला को थाने से लेकर अस्पताल तक अगर कोई असुविधा होती है तो हर कोई कंचन मिश्रा को खोजता है। जनसमुदाय की 24 घंटे मदद करने में तत्पर रहने वाली कंचन को उनके सराहनीय कार्यों के लिए मुंबई में बाबा साहेब नोबेल अम्बेडकर अवॉर्ड 2017 से सम्मानित किया गया।

‘मेरी बड़ी बेटी इंटर में पढ़ रही थी। एक टीचर द्वारा ने बेटी को बहुत परेशान किया, बेटी के एग्जाम की कॉपी स्कूल से गायब कर दी थी, कोर्ट में केस किया और हम जीत गए।’ ये कहना है कंचन मिश्रा (45 वर्ष) का। बेटी को न्याय दिलाने के साथ ही कंचन समाज सेवा करने के लिए प्रेरित हुई। चार वर्षों से समाज सेवा कर रही कंचन को कई बार सम्मानित किया जा चुका है। अभी हाल ही में 11 अप्रैल को मुंबई में अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार काउंसिल द्वारा बाबा साहेब अम्बेडकर नोबेल अवॉर्ड लेने के साथ प्रदेश की दूसरी महिला रही। ये पुरस्कार मुंबई में कई जानी-मानी हस्तियों के बीच शाहिद कपूर की माँ नीलिमा अजीम के हाथों दिया गया।

महिलाओं की फरियाद सुनतीं कंचन मिश्रा

कानपुर देहात के अकबरपुर में रहने वाली कंचन मिश्रा बताती हैं, ‘गरीबों की सेवा करना और उनकी मदद करना मुझे अच्छा लगता है। जानकारी के अभाव में ग्रामीण लोग किसी भी योजना का लाभ पाने या कोई भी प्रशासनिक मदद के लिए महीनों भटकते रहते हैं, अगर मेरी उनसे मुलाकात हो जाती है तो मैं उन्हें सही जानकारी और सही विभाग तक पहुंचा देती हूं।’ वो आगे बताती हैं, ‘बहुत ही पिछड़े गाँवों में स्वास्थ्य टीम की मदद हेल्थ कैम्प लगवाना, खुले में शौच जाने को लेकर प्रेरित करना, गाँव-गाँव जाकर सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना हमारी दिनचर्या में शामिल है।’

कंचन को उनके सामाजिक कार्यों के लिए कोई पैसा नहीं मिलता है बल्कि ये उनका अपना शौक है। दबंगों से पीड़ित परिवार हो या फिर मुसीबत में फंसा कोई व्यक्ति हो हर किसी की पैरवी करना इन्हें अच्छा लगता है। कानपुर देहात के पुखरायां में हुए ट्रेन हादसे में भी कंचन घायलों को अस्पताल लेकर गई और उनके परिजनों से मिलवाने में भी मदद की। जिले में इन्हें पारिवारिक न्यायालय में काउंसलर के पद पर नियुक्त किया गया है, राज्य पोषण मिशन में मंडलीय सदस्य, प्रधानमन्त्री आवास योजना में तीन सदस्यी समिति में सदस्य,समाज कल्याण विभाग में भी नामित सदस्य है।

कंचन मिश्रा द्वारा गोद लिए गये बनारअलीपुर गाँव की कैलाशा देवी (60 वर्ष) का कहना है, ‘जब से बिटिया गाँव आने लगी है तब से कोई भी समस्या होती है बिटिया को ही बता देते है, हमारे गाँव में कई बार डाक्टर आ चुके हैं, अधिकारी भी बहुत बार आते हैं ।’ वो आगे बताती हैं, ‘हमारे गाँव में कुछ लोगों ने कंडे भर दिए थे बिटिया के समझाने पर अब उसका इस्तेमाल करने लगे है, जब बिटिया गाँव आती हैं तो बहुत ज्ञान की बातें बताती हैं।’

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