‘अरे ब​हिनी स्कूल चलो अब तो जूता, मोजा और सूटर भी मिले वाला है’  

Karan Pal SinghKaran Pal Singh   16 Nov 2017 9:02 AM GMT

‘अरे ब​हिनी स्कूल चलो अब तो जूता, मोजा और सूटर भी मिले वाला है’  बच्ची को समझाती मीना मंच की छात्राएं।

म्योरपुर (सोनभद्र)। 'अरे बहिनी स्कूल काहे नहीं आ रही हो। इक महीना होय वाला है तुम स्कूल मा न दिखी हमका। दिक्कत का आय तुमका जो स्कूल नहीं आ रही हो। स्कूल मा खाना मिलत है। कपड़ा मिल गा है। अब जूता मिले वाले हैं, मोजा मिले वाले हैं, सूटरो मिले वाला है। नवा बैगो मिली। अब स्कूल रोज जाओ और घर का काम स्कूल से आवे के बाद करो।'

ये कहना है सोनभद्र के आदिवासी क्षेत्र म्योरपुर के काचन गांव की पूर्व माध्यमिक विद्यालय की मीना मंच की छात्राएं राधा, सोनामती, प्रभा, पुजा कुमारी का जो देवरी गांव की प्रिया को स्कूल आने के लिए प्रेरित कर रही हैं।जिला मुख्यालय से लगभग 89 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में स्थित म्योरपुर के काचन गांव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय की मीना मंच के बच्चे पूजा कुमारी (15 वर्ष), सोनमती यादव (14 वर्ष), प्रभा (15 वर्ष), राधा (12 वर्ष), राम अजोर (14 वर्ष), नितेश (15 वर्ष) ने कई गांव में बाल विवाह, बाल मजदूरी, स्कूल नहीं आने वाले बच्चों का सर्वे किया और बच्चों और उनके परिजनों को जागरूक किया।

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सर्वे के दौरान मीना मंच की छात्रा पूजा (14 वर्ष) देवरा गांव की एक महीने से स्कूल नहीं आने वाली प्रिया को स्कूल आने के लिए प्रेरित करती हैं और साथ ही उसे स्कूल आने के फायदे भी गिनाती है। पूजा स्कूल नहीं आने वाली लड़की से कहती है, 'काहे स्कूल नहीं ना आ रही हो। तबियत तो खराब नहीं है तुम्हाई, अभी धान ढो रही थी। अपने पापा से कहो की ये सब खेत का काम स्कूल के बाद कराया करें। कल से स्कूल आ जाना तुम्हाई पढ़ाई भी पीछे हो रही है। जाड़ा आ गवा है। अब स्कूल मा जूता, मोजा, सूटर और नवा बैग भी मिले वाला है।

स्कूल आवा करो हमाई तरह और मन लगा के पढ़ा करो। घर और खेतवा का काम स्कूल के बाद करा करो।' स्कूल नहीं जाने वाली देवरी गांव की प्रिया (14 वर्ष) बताती हैं, 'मैं कक्षा 8 में पढ़ती हूं। अभी खेतन मा काम ज्यादा है तो बापू ने कहा कि खेत का काम करा लो बाद में स्कूल चली जाना। एक महीना होने वाल है हम स्कूल न जा पा रहे हैं। अबही धान कट रहा है। आज हमरे स्कूल की मीना मंच की साथी हमको समझाए हैं। अब हम कल से स्कूल जावे लगब। बापू से भी बोल देब की स्कूल से आवे के बाद खेत का काम करबे।'

प्रिया के बापू सुखराम गौड़ (44 वर्ष) से मीना मंच के बच्चों ने जब प्रिया को स्कूल नहीं भेजने का कारण पूंछा तो सुखराम ने बताया, 'खेतवा मा काम ज्यादा है। मजूर लगा नहीं सकित है तो बिटिया और उनकी अम्मा से ही धान का बोझ ढुलवा रहे हैं। बिटिया स्कूल जाई तो खेतवा का सारा काम भी अहिकी अम्मा पर आ जाई।'

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मीना मंच के बच्चों ने सुखराम को बताया कि प्रिया को स्कूल भेजो उसकी पढ़ाई भी पीछे हो रही है और कहा कि जब बच्ची स्कूल न जाई तो आगे कैसे बढ़ी। खेत का काम स्कूल से आने के बाद भी कर लेई। सुखराम ये सब सुनने के बाद कहते हैं, 'ठीक है कल से बिटिया स्कूल आइ, खेतवा का काम स्कूल से आवे के बाद कर लेई।

मीना मंच के बच्चों द्वारा समझाने पर प्रिया के बापू उसे स्कूल भेजने को राजी हो गए। ऐसे ही मीना मंच के बच्चे अपने स्कूल आने से पहले और स्कूल की छुटृटी होने के बाद प्रतिदिन एक घंटे टोली बनाकर गांव में जाते हैं और रोज स्कूल नहीं आने वाले बच्चों के परिजनों को समझाते हैं और उन बच्चों को स्कूल पढ़ने के लिए वापस लाते हैं।

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