किसान पाठशाला: बेहतर प्रचार-प्रसार के अभाव में किसानों को नहीं मिला पूरा लाभ  

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   21 Dec 2017 5:08 PM GMT

किसान पाठशाला: बेहतर प्रचार-प्रसार के अभाव में किसानों को नहीं मिला पूरा लाभ  एटा में आयोजित किसान पाठशाला में आए कृषक।

उत्तर प्रदेश। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी प्रयास कर रही हैं। इसी के तहत पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सरकार ने किसान पाठशाला आयोजन करने का फैसला लिया था।

विश्व मृदा दिवस के अवसर पर 5 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास 5 कालीदास मार्ग से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसान पाठशाला कार्यक्रम की शुरुआत की थी। किसान पाठशाला के पहले चरण कार्यक्रम 5 से लेकर 9 दिसंबर के बीच और दूसरा चरण 11 से लेकर 15 दिसंबर तक किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि प्रदेश में 15,000 से अधिक किसान पाठशाला लगाई गई, जिसमें कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेती के साथ उद्यान, पशुपालन और मत्स्य, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरकों के उपयोग की जानकारी दी गई।

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लेकिन बेहतर प्रचार-प्रसार न हो पाने के कारण कई जिलों में पाठशाला का आयोजन वैसा नहीं हो पाया जैसा होना चाहिए। प्रदेश के कई जिलों में तो किसानों ने पाठशाला का लाभ उठाया तो वहीं कई जिलों में पाठशाला तक किसान पहुंच ही नहीं पाए।

शुरुआत एटा जिले से करते हैं। यहां 72 न्याय पंचायतों में किसान पाठशाला का आयोजन दो चरणों में हुआ। कृषि विभाग को किसानों को खेती का ककहरा सिखाने के लिए यहां काफी जद्दोजहद का सामना करना पड़ा। किसानों को पाठशाला की ओर लाने के लिए कई स्थानों पर मिठाई की व्यवस्था करनी पड़ी। बावजूद इसके जिले की पाठशालाओं में किसानों की गिनती नाम मात्र की रही।

जनपद की कुल 72 न्याय पंचायतों में 4 से 9 दिसंबर और 11 से 15 दिसंबर तक दो चरणों में कुल 144 ग्राम पंचायतों में किसान पाठशाला का आयोजन किया गया। विभाग का दावा है कि प्रत्येक पाठशाला में 80 से 100 किसान शामिल हुए जबकि जमीनी हकीकत में इनकी संख्या 15 से 25 किसान तक रही। यही नहीं किसानों को पाठशाला तक लाने में विभाग को मिड-डे मील की तर्ज पर किसानों के लिए मिठाई का इंतजाम करना पड़ा। मारहरा ब्लॉक की न्याय पंचायत त्रिलोकपुर में आयोजित हुई किसान पाठशाला में शामिल हुए ग्राम जाहिदपुर निवासी किसान ज्ञान सिंह (45वर्ष) ने बताया "किसान पाठशाला में आने से लाभ है।

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अधिकारी एसएमएस मोहर सिंह कहते हैं "हमने किसान पाठशाला में किसानों को सभी महत्त्वपूर्ण जानकारियां दीं। विभाग की योजनाओं के बारे में बताया। मैंने खुद 20 पाठशालाओ में किसानों को सभी सुविधाओं से अवगत कराया। हमारी प्रत्येक पाठशाला में किसानों की संख्या 80 से 90 तक रही, प्रत्येक पाठशाला के लिए प्रमुख सचिव द्वारा मौखिक रूप से 1 हजार रुपए का बजट है।"

वहीं कुछ जिलों में पाठशाला का किसानों ने पूरा लाभ उठाया। औरैया में भी ऐसा हुआ। जिले की 75 न्याय पंचायतों के 150 विद्यालयों में लगभग 10 हजार किसानों को कृषि योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। पहली पाठशाला में किसानों को रबी, खरीफ और जायद की जानकारी दी गई। इस बारे में पाठशाला में आए किसान देवानंद कहते हैं "पाठशाला में जैविक खेती के बारे में किसानों को जानकारी दी गई। आय दोगुनी करने के लिए पशुओं को पालने की नसीहत दी गई।"

कन्नौज में भी किसान पाठशाला का आयोजन हुआ। गुगरापुर ब्लॉक से 19 किमी दूर प्राथमिक विद्यालय मधवापुर में पांच दिवसीय किसान पाठशाला का आयोजन हुआ। "हमारे गाँव मे किसान पाठशाला का आज पांचवां दिन है,हमे आज ऊसर बंजर भूमि सुधार के वारे में बताया गया जिसमें हमें जिप्सम नामक खाद का उपयोग करने को कहा गया। ब्लॉक में जो कृषि यंत्र छूट पर है उनके बारे में बताया गया। गेहूं का भण्डारण कैसे करे इसके बारे में भी बताया गया।" यह कहना है मधवापुर निवासी 50 वर्षीय शिवधार त्रिपाठी का।

वहीं मधवापुर गाँव निवासी किसान अरविंद कुमार (42) वर्ष बताते हैं, "हमारे गाँव मे पांच दिन तक किसान पाठशाला चला। तकनीकी प्रावधिक सहायक संदीप कुमार बताते हैं "प्राथमिक विद्यालय मधवापुर में पांच दिवसीय किसान पाठशाला का आयोजन हुआ। किसानों को फसल सुरक्षा, कीट एवं रोग नियंत्रण के बारे में जानकारी दी,इस समय कच्चे आलू की खुदाई चल रही तो किसान ज्यादा समय नही दे सके,लेकिन किसान भाइयों के चेहरे पर मुस्कान दिखी है। और हमारा दस दिन का किसान पाठशाला का कार्यक्रम गुगरापुर ब्लॉक में पूर्ण हुआ।"

वहीं उप निदेशक कृषि डॉ. राजेश कुमार कहतेे हैं, "एक पाठशाला के हिसाब से एक हजार रुपए आया था। 81 न्याय पंचायतों में दो-दो पाठशालाएं लगीं। प्रतिदिन दो-दो किलो लड्डू का वितरण हुआ।"

जबकि मेरठ में किसान पाठशाला कागजों पर चली। इस जिले में दूसरे चरण यानि 11 से 15 तक लगने वाली किसानों की पाठशाला में सिर्फ खानापूर्ति की गई। कहीं-कहीं तो पाठशाला में केवल किसान ने भाग लिया। गांव पाली निवासी किसान भंवर सिंह (56) बताते हैं "इस समय गेहूं बुवाई चल रही है, एक-एक दिन लेट हो रहा है। पाठशाला करेंगे तो पूरे साल खाएंगे क्या।" वहीं गांव दरियापुर निवासी हुकूम सिंह (44) बताते हैं "गन्ने की कटाई चल रही है। किसान पाठशाला में जाने के लिए समय ही नहीं है। पाठशाला बरसात के सयम होनी चाहिए थी।"

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इस बारे में जिला कृषि अधिकारी मेरठ, जसवीर तेवितया कहते हैं " पहले चरण में किसान स्कूलों में पहूंच गए थे, मैंने खुद दर्जनभर स्कूलों में किसानों को खेती संबंधी जानकारी दी है, लेकिन दूसरा चरण पूरी तरह फीका रहा, कई स्कूलों से तो विशेषज्ञ वापस लौट गए।"

इलाहाबाद में इस योजना का लाभ किसानों ने उठाया। यहां किसान पाठशाला में किसानों को सरकार की ओर से शुरू योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियों की ओर से दी गई। किसान पाठशाला का आयोजन दो चरण में जिले के 20 ब्लाकों के 177 ग्राम पंचायतों में किया गया। पाठशाला में किसानों को कम लागत पर अधिक उत्पादन के तौर तरीकों की जानकारी कृषि विशेषज्ञों ने दी। साथ ही साथ कृषि रक्षा अधिकारी ने बिना कीटनाशक के उपयोग किए फसलों की सुरक्षा की विधि भी किसानों को बताया। जिले के 177 ग्राम पंचायतों में किसान पाठशाला का आयोजन कर किसानों को खेती के उत्तम तरीके और लाभदायी योजनाओं की जानकारी दी गई।

इलहाबाद में किसान पाठशाला।

जिला कृषि अधिकारी डॉ अश्वनी कुमार सिंह के मुताबिक “ पाठशाला में किसानों के समस्या पर भी बात की गई। किसानों के समस्यायों का समाधान भी पाठशाला में दिया गया। कृषि निदेशालयों से अपर कृषि निदेशक (प्रशासन) और मंडल के टास्क फोर्स अधिकारी एस आर कौशल ने किसान पाठशाला में उपस्थित किसानों से फीडबैक लिया। वहीं उप कृषि निदेशक विजय सिंह द्वारा फसल की कटाई के बाद के प्रबन्धन खाद्य प्रसंस्करण तथा कृषि लागत कम करने के लिए सोलर पम्प तथा कृषि यंत्रों पर छूट के सम्बन्ध में कृषकों को विस्तार से जानकारी दी गयी।

वहीं किसानों के बीच असंतुष्टि के भाव भी दिखे। किसानों का कहना था कि एक दिन में किसानों की समस्या का समाधान नहीं हो सकता और नहीं कोई विशेष जानकारी दी जा सकती है। इसका आयोजन मासिक रूप से होना चाहिए।

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मेजा ब्लॉक के किसान नेता किशन लाल मौर्य (47 वर्ष) का कहना है "एक दिनी पाठशाला में सभी किसान नही पहुँच पाए इस वजह से इसका लाभ सभी किसानों तक नही पहुंच सकता।" वहीं कौड़ियार ब्लॉक के ग्राम प्रधान सुनील यादव के मुताबिक किसानों को योजनाओं की जानकारी दी गई, लेकिन उसकी कोई व्यवस्था अधिकारी अपने साथ नहीं लाये। किसान चंद्रपाल सिंह का कहना है कि पाठशाला में दूर-दराज से आये किसानों के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी जबकि जिला कृषि अधिकारी डॉ अश्वनी सिंह का कहना है कि शासन स्तर से हर केंद्र के लिए 500 रुपए की व्यवस्था की गई थी जो की उपलब्ध करा दिया गया था।

(इश्तेयाक अहमद, ओपी सिंह परिहार, मोहम्मद आमिल, सुंदर चंदेल आैर आशीष पांडेय की रिपोर्ट)

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