अब सभी विभागों के ठेके के लिए ऑनलाइन करना होगा आवेदन, जानिए क्या होता है ई-टेंडरिंग

अब सभी विभागों के ठेके के लिए ऑनलाइन करना होगा आवेदन, जानिए क्या होता है ई-टेंडरिंगकैबिनेट मीटिंग में लिया गया फैसला 

लखनऊ। यूपी सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट मीटिंग में सभी विभागों के ठेके के लिए ई-टेंडरिंग को जरूरी बताया है। साथ ही इस प्रक्रिया को तीन महीने के अंदर लागू करने के निर्देश भी दिए हैं। बताया जा रहा है कि यह फैसला अलग-अलग विभागों में ठेका देने में होने वाले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए किया जा रहा है।

ई टेंडरिंग प्रक्रिया क्या है

पहले सामान्य तौर से निविदापत्र को भर कर सीलबंद लिफाफे में बंद करके उसको निविदा बक्से में डालना होता था। एक निर्धारित समय के बाद जब इस बक्से को खोला जाता था, तो उसमें जिस भी फर्म की ओर से सबसे कम राशि काम को करने के लिए अंकित की जाती थी, उसको टेंडर दे दिया जाता था। मगर इस मैनुअल सिस्टम में जम कर धांधलियां की जाती हैं। ठेकेदारों का सिंडिकेट नए लोगों को टेंडर डालने ही नहीं देता है इसलिए अब ई-टेंडरिंग को राज्य सरकार शुरू करने जा रही है जिसमें पूरी टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। सबंधित विभाग की वेबसाइट पर जाकर टेंडर की सारी प्रक्रियाओं को एक फार्म भरने की तरह पूरा करना होगा। निविदा शुल्क (टेंडर फीस) के भुगतान और धरोहर राशि (ईएमडी) के भुगतान व वापसी की प्रक्रिया भी भौतिक प्रारूप में न करके ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से की जाएगी। ई-प्रोक्योरमेंट के तहत बिड्स व डाटा की गोपनीयता, सुरक्षा और अनुरक्षण का दायित्व एनआईसी का होगा। ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली में नियमों व प्रक्रियाओं में कोई परिवर्तन नहीं किया जा रहा है, अपितु वर्तमान नियमों और प्रक्रियाओं के अन्तर्गत ही केवल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उपयोग करते हुए टेंडरिंग की कार्यवाही की जाएगी।

ई-टेंडरिंग के फायदे

जानकारों का मानना है कि भ्रष्टाचार का एक प्रमुख स्रोत है उचित जानकारी समय पर उपलब्ध न होना। सारी जानकारी फाइलों में दबी होती है और भ्रष्टाचार का सारा खेल यहीं से शुरू होता है। ई-टेंडरिंग व्यवस्था से काम में पारदर्शिता आएगी। भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं होगी और किसी भी प्रकार के आरोप-प्रत्यारोप भी नहीं लगेंगे।

पहले सभी विभागों से निविदाएं आमंत्रित की जाती थीं। इसमें होता ये था कि ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से ठेका पहुंच रखने वालों को ही मिलता था। पहुंच रखने वाला व्यक्ति ही निविदा डाल पाता था।

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