‘पीलीभीत टाइगर रिजर्व’ में स्टाफ की कमी बन रही सुरक्षा कर्मियों के लिए ही खतरा

‘पीलीभीत टाइगर रिजर्व’ में स्टाफ की कमी बन रही सुरक्षा  कर्मियों के लिए ही खतरापीलीभीत टाइगर रिजर्व का मुख्य गेट।

अनिल चौधरी (स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क)

पीलीभीत। टाइगर रिजर्व के जंगल में वन्यजीव सुरक्षा के लिए स्टाफ की कमी होने के कारण प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारियों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। यहां वन दरोगा और वनरक्षकों के काफी पद खाली पड़े हैं, जिन पर अभी तक तैनाती नहीं हो सकी है। इस वजह से बाघ के जंगल से निकलकर भागने और हमला करने की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं। यही नहीं पर्याप्त संख्या में निरीक्षण स्टाफ न होने से जंगलों में होने वाली लकड़ी की चोरी भी लगातार जारी है। इसका कारण स्पष्ट है कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल में निरीक्षण अधिकारियों की संख्या बहुत कम है। ऐसे में जंगल की देख-रेख में एक या दो कर्मचारी ही एक साथ जा पाते हैं। बावजूद इसके इस दिशा में शासन द्वारा कोई भी कदम नहीं उठाया गया।

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रिक्त पदों का विवरण समय-समय पर मुख्यालय भेजा जाता है। शासन से इन सभी रिक्त पदों पर भर्ती की जानी हैं। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
कैलाश प्रकाश, डीएफओ, पीलीभीत

इस मामले में तीन दिन पहले हुए हालिया घटना को ही लें तो सूत्र बताते हैं कि टाइगर रिजर्व के ग्राम वाचर ताराचंद की मौत मामले में उस दिन महोफ रेंज की बनकटी बीट पर आग लगने की सूचना पर अकेले ही भेजा गया, जहां पर बाघ ने उस पर हमला करते हुए मार डाला। जंगल के समीप रहने वाले ग्राम टाहपौटा निवासी (60 वर्षीय) दीनदयाल बताते हैं कि "वन विभाग के पास वाचरों की संख्या बहुत कम है। इस कारण से ज्यादातर समय उन्हें लकड़ी चोरों को पकड़ने या आग से जंगल की सुरक्षा की निगरानी करने के लिए एक या दो वाचर ही भेज दिए जाते हैं। ऐसे में अक्सर वे जंगली जानवरों के हमले का शिकार हो जाते हैं।"

पीलीभीत टाइगर रिजर्व का प्रवेश द्वार।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व का 71288 हेक्टेयर जंगल पांच रेंजों माला, महोफ, बराही, हरीपुर और दियोरिया कला में फैला हुआ है, जिसमें लुप्तप्राय बाघ, तेंदुआ, हिरन, बंगाल फ्लोरिकन, हिस्पिडहियर, अजगर, मोर व अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए फील्ड स्टाफ तैनात रहता है, जो जीपीएस सिस्टम से निगरानी रखता है।

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ये पद हैं रिक्त

टाइगर रिजर्व में वन दारोगा के 50 पद स्वीकृत हैं जिनमें वर्तमान में केवल 19 कार्यरत हैं, जबकि 31 पद रिक्त पड़े हुए हैं। इसी तरह वनरक्षक के स्वीकृत 52 पदों में से 40 पर ही तैनाती है। 12 पद कई सालों से खाली पड़े हैं। इन रिक्त पदों पर भर्ती करने के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। स्टाफ की कमी के कारण जंगल के वन और वन्यजीवों की सुरक्षा बमुश्किल हो पा रही है।

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