लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे बीटीसी अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज, दर्जनों घायल

विधान भवन के सामने प्रदर्शन कर रहे बीटीसी अभ्यर्थियों पर पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। सड़क पर प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। दर्जनों अभ्यर्थी घायल हो गए।

लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे बीटीसी अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज, दर्जनों घायल

लखनऊ। सहायक अध्यापक भर्ती के रिक्त पदों को भरे जाने की मांग को लेकर विधान भवन के सामने प्रदर्शन कर रहे बीटीसी अभ्यर्थियों पर पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। सड़क पर प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। दर्जनों अभ्यर्थी घायल हो गए।


लाठीचार्ज के दौरान भगदड़ मच गई। खून से लथपथ अभ्यर्थियों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं पुलिस ने इसके बाद करीब एक दर्जन अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर हजरतगंज कोतवाली ले आई। सभी लोग उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के बैनर तले एकजुट हुए थे।

दोपहर करीब एक बजे सैकड़ों की संख्या में बीटीसी अभ्यर्थी विधान भवन के सामने आ धमके। इस दौरान सभी ने सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप लगाते हुए नारेबाजी करते हुए सड़क जाम करने की कोशिश करने लगे। लगातार दूसरे दिन यातायात बाधित होता देख पुलिसकर्मियों ने लाठियां फटकारकर प्रदर्शनकारियों को सड़क के किनारे ढकेल दिया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने सभी को समझा- बुझाकर प्रदर्शन खत्म कराने की कोशिश की लेकिन वह उच्चाधिकारियों के साथ वार्ता हुए बगैर मानने को तैयार नहीं थे।

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काफी देर इंतजार के बाद भी कोई नतीजा न निकलता देख प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। प्रदर्शनकारी जैसे ही आगे बढ़े पुलिस कर्मियों ने लाठियां भांजना शुरू कर दिया। लाठीचार्ज होते ही चीख पुकार के साथ भगदड़ मच गई। जो जहां मिला उसे वहीं लाठियों से पीटा। इस दौरान दर्जनों अभ्यर्थी घायल चोटिल हो गए।

12 नवंबर को होगी सुनवाई

भर्ती प्रक्रिया के विज्ञापन में न्यूनतम अहर्ता 40 से 45 प्रतिशत थी लेकिन बाद में सरकार ने इसे घटाकर 30 से 33 प्रतिशत कर दी। जिसे ध्यान में रखकर सभी अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी पर परीक्षा का परिणाम 40 से 45 प्रतिशत अहर्ता के आधार पर जारी कर दिया गया। जिसके चलते कई अभ्यर्थी परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो सके। 68 हजार 500 सहायक अध्यापक भर्ती में से 28 हजार पद खाली रह गए। नौकरी के लिए आवेदन किया था अब लाठियां मिल रही हैं। वहीं अन्य अभ्यर्थियों का कहना है कि कोर्ट ने भर्ती प्रक्रियां में हुई धांधली पर सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। अगर धांधली के आरोप सही पाए जांएगे तो भर्ती प्रकिया निरस्त होगी। लेकिन हमारी मांग न्यूनतम अर्हता व रिक्त पदों को भरे जाने को लेकर हैं। जिसके सम्बन्ध में आगामी 12 नवंबर को कोई में सुनवाई भी होनी है।

ये है कोर्ट का फैसला


इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्‍तर प्रदेश सरकार द्वारा दिसम्‍बर 2016 में सहायक अध्‍यापक के 12460 पदों पर की गयी भर्ती को नियम विरुद्ध करार देते हुए गुरूवार को निरस्‍त कर दिया था। अदालत ने एक अन्‍य निर्णय में प्रदेश के प्राइमरी स्‍कूलों में सहायक अध्‍यापकों के 68500 खाली पदों के सापेक्ष की गयी भर्ती की भी पूरी प्रक्रिया की सीबीआई जांच के आदेश दे दिये।

न्‍यायमूर्ति इरशाद अली की पीठ ने सहायक अध्‍यापकों के 12460 पदों के मामले में दायर कई याचिकाओं का सामूहिक निस्तारण करते हुए यह आदेश दिये। अदालत ने कहा कि 21 दिसम्‍बर 2016 को तत्‍कालीन अखिलेश यादव सरकार द्वारा जारी विज्ञापन के आधार पर की गयी सहायक अध्‍यापकों की भर्ती उत्‍तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (शैक्षिक) सेवा नियमावली 1981 के खिलाफ थी। अदालत ने सरकार को आदेश दिये हैं कि वह अभ्‍यर्थियों के चयन के लिये नियम-कायदों के अनुरूप नये सिरे से प्रक्रिया शुरू करे। अदालत ने इसके लिये राज्‍य सरकार को तीन माह का समय दिया है। इसी पीठ ने एक अन्‍य फैसले में इस साल 23 जनवरी को जारी विज्ञापन के तहत प्राइमरी पाठशालाओं में सहायक अध्‍यापकों के 68500 पदों पर शुरू की गयी सम्‍पूर्ण भर्ती प्रक्रिया की सीबीआई जांच के आदेश दिये।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी साबित होने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सक्षम प्राधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जानी चाहिये। न्‍यायालय सीबीआई को इस मामले में अपनी प्रगति रिपोर्ट 26 नवम्‍बर को पेश करने के आदेश देने के साथ-साथ मामले की जांच छह माह में पूरी करने के निर्देश भी दिये हैं।

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