सीएम योगी समेत अन्य राजनेता पर दर्ज मुकदमे होंगे वापस

सीएम योगी समेत अन्य राजनेता पर दर्ज मुकदमे होंगे वापसउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। फोटो साभार: इंटरनेट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सीएम योगी सहित कई अन्य नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का फैसला लिया है। इस फैसले के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ सहित अन्य राजनेता कानून की नजरों में दोषमुक्त होंगे। इस आदेश को राज्यपाल राम नाईक के पास अनुमति के लिए भेजा गया है, जिसके बाद इस फैसले पर अंतिम मुहर लग जाएगी।

इसलिए किया गया केस दर्ज

आदेश के बाद अब योगी आदित्यनाथ सहित 13 अन्य लोगों के खिलाफ गोरखपुर के पीपीगंज थाने में दर्ज केस वापस ले लिए जाएंगे। इनमें सीएम योगी के अलावा केंद्रीय मंत्री शिवप्रताप शुक्ल भी हैं। इन 13 लोगों पर 1995 में निषेधाज्ञा लागू होने पर भी धरना-प्रदर्शन करने के कारण केस दर्ज किया गया था। योगी के खिलाफ मामले में गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया था।

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इन पर भी मुकदमा

निषेधाज्ञा उल्लंघन मामले में ही योगी के अलावा राकेश सिंह पहलवान, कुंवर नरेंद्र सिंह, समीर कुमार ‌सिंह, शिवप्रताप शुक्ला, विश्वकर्मा द्विवेदी, शीतल पाण्डे्य, विभ्राट चंद्र कौशिक, उपेन्द्र शुक्ला, शम्भूथशरण सिंह, भानुप्रताप सिंह, ज्ञान प्रताप शाही, रमापति त्रिपाठी के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। राज्य सरकार द्वारा आदेश जारी किए जाने के बाद मुकदमा वापस लेने के ‌लिए कोर्ट में अप्लीकेशन दिया जाएगा।

तमाम दर्ज हो जाते राजनीतिक मुकदमे

बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले 21 दिसंबर को प्रदेश की विधानसभा में कहा था कि जनप्रतिनिधियों समेत राजनीतिक लोगों के खिलाफ तमाम राजनीतिक मुकदमे दर्ज हो जाते हैं। 106/107 समेत कई केस ऐसे होते हैं, जिनके दर्ज होने का पता तब चलता है, जब वारंट आता है। ऐसे मामलों में कई बार गैर जमानती वारंट जारी हो जाते हैं। राज्य सरकार ऐसे 20 हजार मुकदमों को समाप्त करने जा रही है। साथ ही इस आदेश के बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी दोषमुक्त हो जाएंगे।

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दिया गया था निर्देश

बता दें कि योगी सरकार ने 20 दिसंबर को गोरखपुर जिला मजिस्ट्रेट को एक पत्र भेजा था, जिसमें यह निर्देश दिया गया था कि अदालत के सामने मामला वापस लेने के लिए एक आवेदन दायर किया जाए। सरकार के आदेश में कहा गया है कि 27 अक्टूबर को जिला मजिस्ट्रेट से प्राप्त पत्र के आधार पर और मामले के तथ्यों की छानबीन के बाद, यूपी सरकार ने इस मामले को वापस लेने का निर्णय लिया। गोरखपुर के अपर जिलाधिकारी रजनीश चंद्रा ने इस बात की पुष्टि की है कि शासन की तरफ से केस वापसी के लिए आवेदन करने का आदेश आया है, जिसके बाद अभियोजन अधिकारी को संबंधित कोर्ट में आवेदन करने के लिए कहा गया है।

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