महिलाओं को पीड़ित नहीं जाबाज समझ करे मजबूत

महिलाओं को पीड़ित नहीं जाबाज समझ करे मजबूतइस सेशन की अगुवाई हिंदुस्तान टाइम्स की रेजिडेंट एडिटर सुनिता ऐरन कर रहीं थीं।

लखनऊ। यूपी पुलिस की ओर से शनिवार को डॉयल 100 के हॉल में अस्तित्व नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महिला बअपराध संबंधित अलग-अलग मुद्दों पर परिचर्चा की शुरुआत डिजिटल माध्यम से महिला उत्पीड़न की ओर था। जहां इस सेशन की अगुवाई हिंदुस्तान टाइम्स की रेजिडेंट एडिटर सुनिता ऐरन कर रहीं थीं।

उन्होंने सेशन शुरू होने पर कहा कि, आज तकनीकी का सकारात्मक इस्तेमाल होने के साथ ही गलत मानसिकता वाले लोगों द्धारा इसका दुरूपयोग भी किया जाने लगा है। डिजिटल क्षेत्र में हो रही हिंसा में महिलाओं को भिन्न-भिन्न प्रकार से शिकार बनाया जा रहा है और उनकी निजिता पर वार होता है तो कभी उनके चरित्र का हनन। इसे रोकने के लिए सुनिता ऐरन ने अपने पैनल में शामिल सभी लोगों को अपने सुझाव रखने को दिए। इस दौरान एक पीड़िता ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि, महिलाओं को पीड़ित नहीं जाबाज समझना चाहिए, क्योंकि उनकी हिम्मत ही होती है वह समाज में घुम रहे अपराधी किस्म के लोगों से लड़ने की हिम्म्त जुटा पाती है। पीड़िता की इस बात को सुन पूरा हॉल तालियों की गड़गड़हाट से गुज उठा।

पीड़िता ने आगे बताया कि, मैं एक लॉ स्टूडेंट थी और कॉलेज हास्टल में रहती थी, लेकिन इस दौरान मेरी फोटो किसी ने सोशल मीडिया में वायरल कर दी, जिसके चलते मुझे हॉस्टल छोड़ना पड़ा, फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी और इसका डट कर सामना किया। इस मौके पर भारत सरकार की ओर महिला व बाल विकास मंत्रालय की ओर अस्सिटेंट सेक्टरी लक्ष्मी भव्या भी मौजूद रहीं।

लक्ष्मी भव्या ने कहा कि, मौजूदा वक्त में फेसलेस अपराधियों को पकड़ना बहुत मुश्किल हो गया है। साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए साइबर एक्सपर्ट दिनेश यादव ने कहा कि, पुलिस को पीड़िता के प्रति अपना रवैया बदलने की जरुरत है, क्योंकि कोई भी पीड़िता अपने साथ डिजिटल मीडिया पर हुए उत्पीड़न की शिकायत करने थाने तो जाती है, लेकिन पुलिस खराब व्यवहार को देख कर वह अपना मुंह बंद कर चुप बैठ जाती है। वहीं पैनल में शामिल विशाखा भट्टाचार्य ने कहा कि, ऑन लाइन शादी भी आज डिजिटल अपराध की श्रेणी में आ गया है। क्योंकि ज्यादातर पुरुष शादी की साइटों पर अपनी गलत प्रोफाइल बना कर महिलाओं को अपने झांसे में फंसा लेते हैं।

घरेलू हिंसा महिलाओं की खुदकुशी की बन रही वजह

देश भर में मौजूदा वक्त में घरेलू हिंसा सबसे मुख्य मुद्दा बन गया है, जिसे लगाम लगा पाने में सरकारें नाकाम है। हालांकि इसके लिए सख्त कानून बने है, लेकिन आरोपी कानून की लचर व्यवस्था का फयादा उठाकर बच निकलते हैं। इस मुद्दे पर पर परिचर्चा करने के लिए पैनल हेड अंजु दुबे पाण्डेय ने सभी सहयोगियों से उनके विचार मांगे। जहां मशहूर कहानीकार नीलेश मिसरा ने कहा कि, यह समस्या तबतक जीवित रहेगी जबतक सरकारें महिलाओं संबंधित योजना आसानी से उन तक पहुंचा से। उन्होंने कहा कि, संवादहीनता होने के चलते महिलाओं को उनके हक के बारे में नहीं मालूम होता है। साथ ही यूपी पुलिस की तारिफ करते हुए कहा कि, देश का उत्तर प्रदेश पहला राज्य बना है, जिसने पीड़ित को यह बताया कि, सोशल मीडिया पर शिकायत करते ही पुलिस आपके दरवाजे तक तत्काल पहुंच जायेगी। इस मौके पर मशहूर एंकर ऋचा अनिरूद्ध ने कहा कि, कोई भी पीड़िता अगर पुलिस से फोन कर अपनी शिकायत दर्ज कराये तो उससे इतने सवाल पूछ लिए जाते हैं कि वह शिकायत करने की दोबारा हिम्मत ही नहीं जुटा पाती।

क्लासों के सिलेबस में महिला जेंडर की बराबरी की शिक्षा देनी चाहिए

अस्तित्व सेमिनार में समाज सेविका मंजू अग्रवाल ने अपने सुझाव में कहा कि, स्कूलों में बचपन से ही जेंडर की पढ़ाई करानी चाहिए, जिससे महिला अपराधों पर रोकथाम लगे सके। उन्होने कहा कि, बचपन से ही महिलाओं को सीखा दिया जाता है कि, वह दबी-कुचली है उन्हें अपनी बात रखने का कोई हक नहीं है और वह पराया धन है, जिसके चलते महिलाएं बचपन से ही कमजोर हो जाती हैं। वहीं इस मौके पर सीजेएम रश्मि सिंह ने न्यायिक व्यवस्था पर सवाल उठाते कहा कि, कोई भी महिला पीड़ित अगर न्याय न मिलने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाती है तो कचहरी के दरवाजे पर कुछ वकील उन्हें लूटने का प्रयास करते है। इसके पीछे वजह उन्होंने बताई कि, पुलिस वाले ज्यादातर घरेलू हिंसा मामले में मुकदमा नहीं दर्ज करते है, जिसके चलते उन्हें कोर्ट का सहारा लेना पड़ता है।

मसाज पार्लर मानव तस्करी का सबसे बड़ा अड्डा

पूर्व डीजीपी पीएम नयार ने कहा कि, यूपी सहित पूरे देश भर में मसाज पार्लर जैसा गैर-कानूनी धंधा फूल-फल रहा है, जहां गरीब महिलाओं की तस्करी कर उन्हें जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया जाता है। जिसके रोकने के लिए कई कड़े कदम उठाने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि, इन पार्लर पर जाने वाले ग्राहक सबसे बड़े अपराधी है, क्योंकि वह अगर ऐसे मसाज पार्लर पर जाना बंद कर दें तो महिलाओं की तस्करी कर इन पार्लरों पर अवैघ कारोबार नहीं चलाया जायेगा।

. डॉ.नेहा आनंद (मनोवैज्ञानिक) : जब भी किसी महिला या बच्चे के साथ ये घटना घटती है तो हम उन्हें समझ ही नहीं पाते, उनकी बातों को उनकी फीलिंग्स को जाने बिना ही हम फैसले पर आ जाते है। जिसका बाद में उन पर लंबे अरसे तक गलत असर देखने को मिलता है। आप उनके बाहरी घाव देखते है, लेकिन जो घाव उनके अंदर हुए है उनको जानना बहुत जरुरी है। हम मनोवैज्ञानिक उनके अंदर के घाव को देखते है। क्यों कि हम उनके अंदर झांकने की कोशिश करते है, हम उनको समझ सकते है।

आप की पुलिस के पास ऐसी घटना के बाद कोई ऐसा एक्सपर्ट नहीं है जो घटना के तुरंत बाद उनको उस तरह से देख पाए जैसी उनकी जरुरत है। हमारी पूरी पुलिसिंग को अब इन सभी घटनाओं से निपटने के लिए एक्सपर्ट्स की जरुरत है। इन सभी चीजों से निपटने के उपाय भी है। अगर हम इन घटनाओं के लिए अपनी पुलिस को जागरूक करें, साथ ही हर घटनाओं के बाद भावनात्मक फॉलोअप करें, बच्चियों को सशक्त बनाए इन सभी चीजों से हम इस प्रकार की घटनाओं को रोक सकते है।

प्रेरणा अग्रवाल (एच.आर.टी.सी.एस.) : महिलायें जहां काम करती है वहाँ इन घटनाओं को रोकने के लिए हमें नियम बनाने होगें। मै जिस संस्था में काम करती हूँ वहाँ हर डिपार्टमेंट की अपनी एक इंटरनल कमेटी है। कर्मचारी कितनी भी छोटी पोस्ट पर हो या किसी बड़ी पोस्ट पर हो उसे हमारे नियम मानने होते है। हम सबको ट्रेनिंग देते है कि आपको कार्य क्षेत्र में किस तरह से काम करना है ताकि किसी महिला को शारीरिक शोषण से बचाया जा सके। हमारे यहाँ जितनी भी इंटरनल कमेटी है उसमें आप चुबीस घंटे में किसी भी वक्त शिकायत कर सकते है ओर आपकी शिकायत को गुप्त रखा जाता है। इस प्रकार से टाटा जैसी बड़ी संस्थाएं काम करती है। इसलिए हमारा मानना है कि अगर in सभी चीजों को अपनाया जाय तो महिलाओं का यौन उत्पीडन रोका जा सकता है।

सरिता सिंह : (सदस्य सर्व शिक्षा अभियान ) : उत्तर प्रदेश में प्राइमरी स्कूल की संख्या 56680 है। 746 कस्तूरबा गाँधी स्कूल है। शिक्षा विभाग बच्चों की यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं को रोकने के लिए काम कर रहा है। हम अपने हर बच्चे को जागरूक कर रहे है ताकि वो किसी भी ऐसी दूषित समस्या से अपने आप को बचा सके। Good Touch Bad Touch के बारे में हम बच्चों को खुल कर बता रहे। हमारी कोशिश है कि हम अपने हर बच्चे को इसकी जानकारी दे सके ताकि वो ऐसी किसी भी घटना से खुद को बचा सके। हम कहीं पीछे है तो वो है काउंसलर की संख्या में। हमें ज्यादा की संख्या में काउंसलर की आवश्यकता है ताकि बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न जैसी घटनाएं घटने के बाद उन्हें शि तरीके से ठीक किया जा सके।

सची सिंह (समाजसेवी) : यौन उत्पीडन महिला का हो या किसी बच्ची का हमें पता ही नहीं होता है कि हम जाएँ तो जाय कहाँ। हम सही जगह नहीं पहुँच पाते, हम में से दस प्रतिशत लोग ही है जिन्हें ये पता है कि हमें कहाँ जाना है। हमें हर बच्चे को बताना होगा कि वो हमें इन चीजों के बारे में खुल के बताये , बल्कि माता पिता को अपने बच्चों के साथ इन समस्याओं पर बात करनी होगी तभी आप इन समस्याओं से निकल सकते है। हमारे स्कूल जहाँ आपका बच्चा पढता है वहां ये देखना होगा कि क्या स्कूल अपने यहाँ पुलिस वेरिफिकेशन के बाद लोगों को नौकरी पर रखता है। ड्राईवर, स्वीपर, कंडक्टर, चपरासी ये ऐसी कुछ नौकरियाँ है जिन पर हमारे बच्चे ज्यादा जल्दी संपर्क में आते है। ऐसा करने से हम बच्चों के यौन उत्पीड़न को स्कूल के अंदर या बाहर होने से रोक सकते है।

साहब हम पुलिस वालों का भी दर्द सुन लिजिए

घरेलू हिंसा पर चर्चा के दौरान जालौन जनपद से आई महिला थाना एसओ नीलेश कुमारी ने कहा कि, सब लोग पुलिस को कोसते है कि, वह महीलाओं के उत्पीड़न के मामले में हिलाहवाली करती है, लेकिन पुलिस को अगर किसी पीड़िता को थाने पर रखना पड़े तो इसकी थाने पर कोई व्यवस्था नहीं है। शायद हम पुलिस वालों के भी बहुत से दर्द है, जिसे कोई सुनने वाला नहीं है।

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