जिन दिव्यांगजनों ने दिव्यांगता को चुनौती माना उन्हें मिलीं सफलता : योगी

Sanjay SrivastavaSanjay Srivastava   3 Dec 2017 4:39 PM GMT

जिन दिव्यांगजनों ने दिव्यांगता को चुनौती माना उन्हें  मिलीं सफलता : योगीमुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी।

लखनऊ (भाषा)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने व्यापक जन जागरुकता की कमी और असावधानी को भी बढ़ती दिव्यांगता का कारण बताते हुए आज कहा कि अगर समय से टीकाकरण कराया जाए तो बड़ी संख्या में बच्चों को पोलियो से बचाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने विश्व दिव्यांग दिवस पर यहां आयोजित राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह में कहा कि बहुत से ऐसे मानवीय कारण हैं, जिनके कारण दिव्यांगता बढ़ी है, समय पर टीकाकरण कराएं तो बहुत से बच्चों को पोलियोग्रस्त होने से रोका जा सकता है।

उन्होंने कहा, जब हम सावधानी नहीं बरतते, तब सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने के व्यापक जागरुकता अभियान का हिस्सा नहीं बन पाते तो एक प्रतिभा दिव्यांगता की चपेट में आकर जीवन के लिए जूझती है, समाज की संवेदना उसके साथ होनी चाहिए। इस समस्या के समाधान की दिशा में हमारे स्तर पर भी बेहतर प्रयास होना चाहिए।

योगी ने कहा कि जिन दिव्यांगजनों ने थोड़ा भी प्रयास किया, तो दिव्यांगता उनके जीवन की सफलता को कभी बाधित नहीं कर पाई।

अरुणिमा सिन्हा ने एक कृत्रिम पैर के सहारे एवरेस्ट को फतह किया, वहीं युवा आईएएस अधिकारी सुहास एल. वाई ने पिछले दिनों बीजिंग में एशियन पैराबैडमिंटन में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। जहां लोगों ने दिव्यांगता को चुनौती मानते हुए उसका सामना किया, उन्हें सफलता मिली। जो लोग उसे अभिशाप मानकर चुपचाप बैठ गए, तो सामाजिक विषमता की तरह ही विकलांगता भी उनके जीवन में बाधा बन जाती है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए काम हुआ, जिन्होंने आगे बढ़कर चुनौती की तरह लेकर उसका मुकाबला किया, वे सफल हुईं, जहां लोग नियति का खेल मानकर चुप बैठे उनके लिए यह अभिशाप बन गया। हमें किसी भी बुराई को अभिशाप नहीं बनने देना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मान्यता है कि इस धरती पर कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं हो सकता है। सरकार और इस क्षेत्र में काम करने वाले संगठन अगर एक योजक के रूप में काम शुरू करें तो हरेक व्यक्ति की प्रतिभा का लाभ समाज और देश को प्रदान किया जा सकता है।

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उन्होंने कहा कि सभी धर्मों में सेवा को परम धर्म के रुप में मानते हुए उसे सर्वोच्च स्थान दिया गया है, सेवा का कोई विकल्प नहीं हो सकता और ना ही सौदेबाजी हो सकती है, जब हम सेवा को निष्काम भाव के साथ पात्रों तक पहुंचाते हैं तो हम पुण्य के भागी बनते हैं. वह कार्य परमार्थ होता है। जब हम सेवा के साथ व्यापार करने लगते हैं तो वह व्यक्ति के लिए परमार्थ का विषय ना होकर उसके पतन का कारण बनता है।

योगी ने कहा कि प्रदेश के दिव्यांग कल्याण विभाग ने बेहतर प्रयास किेए हैं, उनकी सरकार ने दिव्यांगों की पेंशन 300 से बढ़ाकर 500 रुपए प्रतिमाह किया है।

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