‘मैम ने कहा है स्कूल आओ पर बोर्ड परीक्षा नहीं दे पाओगी’

‘मैम ने कहा है स्कूल आओ पर बोर्ड परीक्षा नहीं दे पाओगी’छात्रा मनीषा शंखवार। फोटो: गाँव कनेक्शन

अजय मिश्र/मोहम्मद परवेज

गाँव कनेक्शन, स्वयं कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

कन्नौज। दलित छात्रा के फीस न दे पाने को लेकर काटे गए नाम का प्रकरण जब प्रमुख सचिव ने संज्ञान लिया तो अफसरों में हड़कंप मच गया। अपनी बचाने के चक्कर में जिम्मेदार पीड़िता को धोखा देते हुए भविष्य से खिलवाड़ करने में जुटे हुए हैं। एडमिशन की गलत अप्लीकेशन भी छात्रा से लिखवा ली गई है।

घर आई थी मैडम

शहर के गोमती देवी गर्ल्स इंटर कॉलेज कन्नौज में कक्षा 10 की छात्रा रही मनीषा शंखवार बताती हैं, "घर पर स्कूल में खाना बनाने वाली दीदी आई थीं। वह स्कूल में मैडम के पास ले गईं। कुछ अधिकारी भी घर पर आए थे।उनके साथ भी मैडम थीं। स्कूल में किताबें दी गईं, एक ड्रेस भी दी, लेकिन मैडम ने कहा कि बोर्ड परीक्षा नहीं दे पाओगी। अगले साल परीक्षा दे पाओगी।"

तो भला मैं किताबों का क्या करूंगी

मनीषा आगे बताती हैं, "जब मुझे परीक्षा ही देने को नहीं मिलेगी तो किताबों का क्या करूंगी। स्कूल जाने से क्या फायदा। मेरी तो साल बर्बाद हो गया। मुझसे एडमिशन होने की एक अप्लीकेशन भी लिखवा ली गई है।"

सिर्फ स्कूल आने की बात कही

मनीषा की मां मिथलेष ने 'गाँव कनेक्शन' को बताया, "मैं अपनी बेटी के साथ स्कूल गई थी। कुछ अधिकारी और मैडम गाड़ी में बिठाकर मुझको विकास भवन भी ले गए थे। वहां पर एक अप्लीकेशन लिखवा ली गई, पर बोर्ड परीक्षा देने से मना कर दिया गया है। सिर्फ स्कूल आने की बात वहां की मैडम ने कही है।"

तो बोर्ड का फार्म भर जाएगा

इस बारे में प्रधानाचार्य दिव्या शर्मा बताती हैं, "बच्ची का स्कूल में पुनः प्रवेश करा दिया गया है। इस साल बोर्ड परीक्षा नहीं दे पाएगी। किताबें और ड्रेस छात्रा को दे दी गई है। डीआईओएस को लिखकर दे दिया है कि साइट लॉक है खुलवा दी जाए तो बोर्ड का फार्म भर जाएगा।’’

अब कुछ नहीं हो सकता

कन्नौज के डीआईओएस विमलेश विजयश्री बताते हैं, "मामले की जानकारी नहीं है। कल एक फोन आया था। निर्धारित समय पर अगर फीस नहीं जमा हुई है तो अब कुछ नहीं हो सकता है। उस समय बोर्ड की फीस सब्मिट हो जाती तो स्कूल फीस बाद में भी जमा हो सकती थी। हमारे स्तर से कुछ नहीं हो सकता है। अगर फार्म नहीं भरा और फीस नहीं जमा है तो स्वाभाविक है कि हो भी नहीं सकता। अब तो बोर्ड के सेंटर डिसाइड होने जा रहे हैं, जहां से रोल नंबर डिसाइड होता है। अब जिले स्तर से कुछ नहीं हो सकता है।"

मांगी गई है विशेष अनुमति

वहीं, कन्नौज के जिला प्रोबेशन अधिकारी अश्वनी त्रिपाठी बताते हैं, "कक्षा 10 में छात्रा को भेजा जाने लगा है। किताबें और ड्रेस दिला दी गई है। स्थिति को देखते हुए भोजन भी स्वीकृत करा दिया गया है। छात्रा बोर्ड परीक्षा नहीं दे पाएगी। प्रधानाचार्या ने डीआईओएस को लेटर भेजा है। उसमें बोर्ड परीक्षा फार्म भराने के लिए विशेष अनुमति मांगी गई है। कहा गया है कि जब फार्म भराए जा रहे थे तो छात्रा नहीं आ रही थी।"

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