मध्य प्रदेश के आंदोलन की आंच लखनऊ तक पहुंची

मध्य प्रदेश के आंदोलन की आंच लखनऊ तक पहुंचीमध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का पुतला फूंकते कांग्रेस कार्यकर्ता

लखनऊ। मध्य प्रदेश में भड़के किसान आंदोलन में 2019 का सियासी गणित तय करने को लेकर तीर चलना शुरू हो गए हैं। निशाने पर भाजपा है और तीरंदाज विपक्षी दल बन चुके हैं। भाजपा इस समय पूरी तरह से रक्षात्मक नजर आ रही है। जबकि विपक्षी केंद्र और राज्य की सरकार पर हमलावर हैं। मध्य प्रदेश का असर उत्तर प्रदेश पर भी नजर आ रहा है।

राजधानी लखनऊ विरोध का गढ़ बन गई है। यहां एक ओर तो राहुल गांधी के हिरासत में लिये जाने के बाद में कांग्रेसियों ने मार्च निकाला और एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का पुतला फूंका। तो दूसरी ओर भाकियू के विभिन्न गुटों ने भी जीपीओ पर धरना प्रदर्शन किया। समाजवादी पार्टी किसानों के गोली मारे जाने पर भाजपा और केंद्र सरकार से जवाब मांग रही है। दूसरी ओर, प्रदेश भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार और इसके बाद भाजपा की प्रदेशों में बनी सरकारों ने इतना ज्यादा काम किया है कि, 2019 में फिर से भाजपा की सरकार बनेगी।

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एमपी के सीएम का पुतला फूंका

राहुल गांधी की नीचम में गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस के पदाधिकारियों ने एमपी के सीएम शिवराज का पुतला माल एवेन्यू में फूंका। यहां कांग्रेसी हजरतगंज की ओर कूंच करना चाह रहे थे। मगर पुलिस ने बेरीकेटिंग कर के कांग्रेसियों को रोका। जिसके बाद में यही पर इन लोगों ने एमपी के सीएम का पुतला फूंक दिया। जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भी धरना प्रदर्शन कर के भाजपा और केंद्र सरकार का विरोध किया।

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समाजवादी पार्टी की ओर से मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार को किसानों की जरा भी चिंता नहीं है जबकि भाजपा शासित राज्यों में उनसे बर्बर व्यवहार किया जा रहा है। मंदसौर में किसानों पर पुलिस ने गोलियां बरसाईं जिससे आधा दर्जन किसानों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हैं। वहां कफ्र्यू लगा है। महाराष्ट्र के नासिक में भी किसान आंदोलन जारी है।

कर्ज से बेहाल हैं किसान

सपा के मुख्य प्रवक्ता ने बताया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने चुनाव के समय 2022 तक किसानों की आय दुगुना करने की घोषणा की थी। उस दिशा में किंतु कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। किसानों को उनके उत्पाद का न्यूनतम मूल्य भी दिलाने का काम नहीं हुआ। किसान कर्ज से बेहाल है। उत्तर प्रदेश में कर्जमाफी की घोषणा के बावजूद किसान को कुछ नहीं मिला है। किसानों के साथ यह धोखाधड़ी का खेल चल रहा है। केंद्र सरकार किसानों की आवाज दबाने के लिए बर्बरता के साथ पेश आ रही है।

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जहां समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की यह किसानों के प्रति संवेदनशीलता है कि उनकी ओर दो-दो लाख रूपए मृतक किसानों के आश्रितों को देने की घोषणा के तत्काल बाद मजबूरीवश मध्य प्रदेश सरकार को भी मुआवजा देने का निर्णय लेना पड़ा। जवाब में बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा कि, केंद्र सरकार ने तीन साल में इतना अधिक किसानों के लिए किया है कि किसान केवल भाजपा को ही वोट देंगे। 2019 में एक बार फिर से केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि नीम कोटेड यूरिया, मृदा हेल्थ कार्ड, उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सिंचाई योजना से केंद्र सरकार किसानों का जम कर भला कर रही है।

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