गोरखपुर, बनारस को नहीं मिल पायेगी लखनऊ जैसी मेट्रो!

गोरखपुर, बनारस को नहीं मिल पायेगी लखनऊ जैसी मेट्रो!लखनऊ के गोमतीनगर स्थित प्रशानिक भवन में मीडिया से बात करते हुए मेट्रोमैन श्री धरन।

लखनऊ मेट्रो का काम सही गति से चल रहा है, पूरा भरोसा है कि मेट्रो का पहला फेज मार्च 2019 तक पूरा हो जाएगा। यह जानकारी लखनऊ मेट्रो के मुख्य परामर्शदाता ई श्रीधरन ने दी। श्रीधरन लखनऊ मेट्रो के एमडी कुमार केशव के साथ मंगलवार को गोमतीनगर स्थित लखनऊ के प्रशानिक भवन में मीडिया से मुखातिब थे। उन्होंने संकेत दिया कि गोरखपुर और वाराणसी में लखनऊ की मीडियम मेट्रो की जगह लाइट मेट्रो चलाई जा सकती है।

प्रेस से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि, चारबाग से बाबू केडी सिंह स्टेडियम तक अंडरग्राउंड मेट्रो का काम समय से पहले पूरा हो जाएगा। इसके अलावा स्टेडियम से मुंशीपुलिया तक 8.5 किलोमीटर तक का काम, जो पहले समय से पीछे चल रहा था अब सही गति से चल रहा है। इसी तरह एयरपोर्ट सेक्शन पर भी काम समय से पूरा होने की संभावना है।

मेट्रो के निमार्णकार्य की वजह से लखनऊवालों को होने वाली दिक्कतों पर श्रीधरन बोले, अभी आप लोगों को समस्या का सामना तो करना पड़ रहा है लेकिन निर्माणकार्य पूरा होने के बाद हम आपको सड़कों और फुटपाथ का सौन्दर्यीकरण करके देंगे। जेब्रा क्रॉसिंग, लाइटिंग और फुटपाथ वगैरह देखकर आपको ये लगेगा ही नहीं कि यह इलाका लखनऊ का हिस्सा है। मेट्रो मैन के नाम से मशहूर श्रीधरन का कहना था, हमारे सामनेमुख्य समस्या थी गोमती नदी के आरपार पुल बनाने की। खुशी की बात है कि इसका रास्ता निकाल लिया गया है। इस पर पुल सितंबर 2018 तक पूरा हो जाएगा।

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लखनऊ के लिए मेट्रो की दूसरी लाइन पर श्रीधरन ने कहा, लखनऊ की जरूरत के हिसाब से दूसरी लाइन की बहुत आवश्यकता है। यह 12.5 किलोमीटर लंबा होगा इसका मुख्य हिस्सा अंडरग्राउंड होगा। शहर के लिए एक लाइन काफी नहीं है। फिलहाल हम केंद्र सरकार की नई मेट्रोपॉलिसी के अनुसार अपनी डीपीआर की फिर से समीक्षा कर रहे हैं। नई मेट्रो पॉलिसी के मुताबिक किसी भी महानगर में मेट्रो ट्रेन को अनुमति देने से पहले दूसरे कम खर्चीले विकल्पों पर विचार करना जरूरी है। इनमें बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट, ट्राम, बस रैपिड ट्रांजिट जैसी व्यवस्थाएं शामिल हें।

मेट्रोमैन श्री धरन।

यूपी के दूसरे शहरों में मेट्रो पर काम कब शुरू होगा इस पर श्रीधरन का कहना था, हम यूपी के दूसरे शहरों के लिए डीपीआर तैयार कर रहे हैं। ये शहर हें कानपुर, गोरखपुर, आगरा, मेरठ, वाराणसी। इलाहाबाद के डीपीआर पर भी काम चल रहा है। गोरखपुर के लिए लखनऊ जैसी मेट्रो होगी या नहीं इस पर उनका कहना था कि थ्री टीयर शहरों या 20 लाख से कम आबादी वाले शहरों में लाइट मेट्रो चलाने पर विचार हो रहा है। इस हिसाब से वाराणसी और गोरखपुर के लिए लखनऊ से थोड़ी हल्की लाइट मेट्रो मिलने की उम्मीद है। इसका संचालन लखनऊ में चलने वाली मीडियम मेट्रो से सस्ता होता है। दिल्ली की मेट्रो हैवी मेट्रो है और देश में अपनी तरह की अकेली है।

ई श्रीधरन ने बताया कि हम प्रदेश सरकार से आग्रह करेंगे कि डीपीआर पर विचार करने के दौरान हमें कानपुर, आगरा में प्रारंभिक तैयारी जैसे जमीन का अधिग्रहण वगैरह करने का काम करने की अनुमति दी जाए।इससे समय की बचत होगी।

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