दरोगा की हत्या ने खड़े किये कई सवाल, क्या अपराधियों को रासुका का भी डर नहीं ? 

दरोगा की हत्या ने खड़े किये कई सवाल, क्या अपराधियों को रासुका का भी डर नहीं ? मृत चौकी इंचार्ज दरोगा सहजोर सिंह

लखनऊ। यूपी में जिन पर बदमाशों की धर-पकड़ करने की जिम्मेदारी है अपराधी उनको भी नहीं बख्श रहे हैं। मामला पश्चिम यूपी के बिजनौर जिले का है, जहां बेखौफ बदमाशों ने शुक्रवार देर शाम एक दरोगा की बीच सड़क पर गला रेत कर हत्या कर दी। इस निर्मम हत्या की खबर पूरे शहर में जंगल में आग की तरह फैल गई। वहीं घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस महकमे में हडकंप मच गया। मौके पर पहुंचे आलाधिकारियों ने कई टीमें गठित कर आरोपियों को जल्द पकड़ने के निर्देश दिए हैं।

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बिजनौर में मंडावर थाने की बालावाली चौकी इंचार्ज दरोगा सहजोर सिंह मलिक शुक्रवार शाम सरकारी कार्य से अपनी चौकी से थाने गए थे और शाम होने पर बाइक से चौकी के लिए वापस लौट रहे थे कि, तभी बीच रास्ते में कुछ अज्ञात बदमाशों ने उनकी बाइक को रोक लिया। जब तक चौकी इंचार्ज कुछ समझ पाते बदमाशों ने दरोगा की लूट के बाद धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी। साथ ही उनकी सर्विस पिस्टल भी बदमाश लूटकर फरार हो गए। रात करीब आठ बजे राहगीरों ने दरोगा सहजोर सिंह की बाइक घटनास्थल के पास गोपालपुर गॉंव के पास कांच की फैक्ट्री के पास पड़ा देखा। ग्रामीणों ने सुनसान जगह पर बाइक खड़ी देख सड़क किनारे जाकर देखा तो दरोगा का शव खून से लथपथ खेत में पड़ा था। दरोगा की हत्या की खबर सुन मौके पर आस-पास के ग्रामीण घटनास्थल पहुंच गए। वहीं ग्रामीणों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। सूचना पाकर मौके पर डीएम, एसपी के अलावा अन्य आला अधिकारी भी पहुंच गए। सहजोर सिंह मलिक मूल रूप से शामली जिले के रहने वाले थे और वर्तमान में मेरठ जिले में कंकरखेड़ा बाईपास के पास परिवार सहित रहते थे।

वहीं एसपी अतुल शर्मा के मुताबिक, दरोगा की हत्या गन्ना काटने वाली बलकटी से की गई है और इसकी जांच कर आरोपियों के धर-पकड़ के लिए कई टीमें गठित कर दी गई है। उधर बरेली जोन के एडीजी बृजराज का कहना है कि, घटना के खुलासे के लिए उच्चाधिकारियों को लगा दिया गया है। साथ ही कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है, जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जायेगा।

लूट नहीं हत्या के मकसद से आए थे बदमाश

बिजनौर में दरोगा सहजोर सिंह के हत्या मामले में अधिकारियों ने घटनास्थल को देखने के बाद बताया कि, ऐसा लग रहा है कि, बदमाशों का मकसद चौकी इंचार्ज सहजोर सिंह मलिक की हत्या करना ही था और इसके लिए पहले से बदमाश खेतों में घात लगाएं बैठे थे। साथ ही बदमाशों के पास पहले से ही रेंकी थी कि, दरोगा थाने से अकेले चौकी के लिए लौट रहे थे, जिसके बाद बदमाशों ने इस निर्मम हत्या को अंजाम दिया।

दरोगा को हेलमेट उतारने का भी मौका नहीं दिया

दरोगा सहजोर सिंह के साथ बदमाशों ने इतनी हैवानियत की है कि, उन्होंने बाइक पर हेलमेट लगाए दरोगा को हेलमेट पहने ही मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने इस पहलु की ओर जांच शुरू कर दी है कि, इसके पीछे बदमाशों का मकसद यह हो सकता है कि, कहीं दरोगा बच जाएं तो आरोपियों की शिनाख्त न हो पाएं।

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यूपी में पुलिस पर हुए हमलों में अबतक यह हुई कार्रवाई

एक आकड़े के मुताबिक, प्रदेश में पुलिस पर हुए बीते सालों तक हमलों में 3071 लोगों को नामजद किया गया था। कई मामलों में विवेचना से 813 लोगों के नाम प्रकाश में आए। जबकि कुल आरोपित लोगों की संख्या 3884 है। इनमें से अभी तक 1969 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जबकि 899 आरोपियों ने आत्मसमर्पण किया हैं। इस तरह के मामलों में 16 आरोपियों के यहां कुर्की तक की कार्रवाई हो चुकी है। 12 आरोपियों पर एनएसए तक लगाया गया था। वहीं 162 आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। 990 आरोपियों के खिलाफ गुंडा एक्ट और निरोधात्मक कार्रवाई की गई, जबकि फरार हुए 627 आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी हैं, जिन्हें पकड़ने का प्रयास जारी है।

मायावती कार्यकाल में पुलिस पर हमले के आकड़े

मायावती के शासनकाल पर अगर नजर डाली जाए तो 2007-08 में पुलिस पर 75 बार हमले हुए। 2008-09 में यह आंकड़ा 101 हो गया था। 2009-10 में पुलिस पर 103 बार हमले हुए। जबकि 2010-11 में पुलिस पर 124 हमले हुए। सरकार के अंतिम वर्ष 2011-12 में पुलिस पर 144 हमले हुए। तो कुल मिलाकर बसपा सरकार में पुलिस पर 547 बार हमले किए गए थे, जिसकी गवाही पुलिस के सरकारी आकड़े बताते हैं।

सपा सरकार में पुलिस पर हुए हमले

समाजवादी पार्टी की सरकार में पुलिस पर हमलों की संख्या में खासा इजाफा हुआ था। विधानसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट की बात करें तो अखिलेश यादव के शासनकाल के चार सालों में मायावती के कार्यकाल से ज्यादा बार पुलिस को निशाना बनाया गया। 2012-13 में पुलिस पर 202 बार हमले किए गए थे, जबकि 2013-14 में पुलिस पर 264 हमले हुए। 2014-15 में पुलिस पर 300 बार हमले हुए। इसी तरह से 2015-16 में पुलिस पर 278 बार हमले किए गए थे। कुल मिलाकर सपा शासनकाल में पुलिस को 1044 बार निशाना बनाया गया था।

योगी सरकार में पुलिस पर हमले के आकड़े

  • -27 जून 2017 को मुजफ्फरनगर में मीट कटान की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस पर स्थानीय लोगों ने हवाई फायरिंग सहित पथराव कर पीट दिया था।
  • 8अप्रैल 2017 को मेरठ में जातीय हिंसा में पुलिस की पिटाई।
  • 9 मई 2017 को गोरखपुर में भाजपा विधायक आईपीएस से भिड़ गए थे।
  • 17 जून 2017 को कानपुर के बर्रा क्षेत्र में एक दरोगा को पब्लिक ने जमकर पीट दिया।
  • 25 जून 2017 को भाजपा नेताओं ने बुलंदशहर में सीओ से अभद्रता की।
  • सहारनपुर में जातीय हिंसा को लेकर भाजपा सांसद राघव लखनपाल पर एसएसपी आवास पर पुलिस कर्मचारियों से मारपीट का आरोप लगा।

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