स्कूलों में मुफ्त बंटने वाले सेनेटरी पैड का उत्तर प्रदेश में नहीं आया बजट

स्कूलों में मुफ्त बंटने वाले सेनेटरी पैड का उत्तर प्रदेश में नहीं आया बजटप्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्कूलों में छात्राओं की कम उपस्थिति को रोकने के लिए कवायद कम होती नजर आ रही है। छात्राओं की उपस्थिति के लिए प्रदेश सरकार ने कई तरह की योजनाएं शुरू की थी जिसमें स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त सेनेटरी पैड योजना भी है। लेकिन इस वर्ष सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 12वीं तक की बच्चियों को मुफ्त सैनिटरी पैड दिए जाने की योजना का बजट नहीं जारी किया गया।

मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय ने यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों और स्कूलों में भी सेनेटरी नैपकिन पैड्स मुहैया करवाने के निर्देश दिए थे। इसके पीछे तर्क था कि छात्राओं को पीरियड्स के समय घर पर ही रहना पड़ता है। जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है।

बजट नहीं तो कैसे बांटे सैनेटरी पैड

लखनऊ के अपर चिकित्साधिकारी डॉ. बीके श्रीवास्तव बताते हैं, "अभी तक इस वर्ष का सेनेटरी पैड का बजट नहीं आया है। जल्द ही स्कूलों में छात्राओं को बांटे जाने वाले सेनेटरी पैड का पैसा आने की उम्मीद है।" सीएमओ डॉ. जीएस बाजपेई ने बताया, "पिछले साल चार महीने का बजट दिया गया था। इसके बाद इसके लिए कोई बजट ही आवंटित नहीं किया गया। स्कूल खुले हैं, लेकिन कोई भी पैसा इस मद में नहीं आया है।" लखनऊ यूनिवर्सिटी की प्रफेसर निशी पांडेय का कहना है, "सरकार को इस पर फोकस करना चाहिए। यह योजना ड्रॉपआउट रेट कम करने में काफी मददगार होगी। यह बच्चियों के स्वास्थ्य के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है।"

पीरियड्स के कारण बच्चियां छोड़ रही स्कूल : सर्वे

साल 2011-12 में मंत्रालय की स्टैटिस्टिक्स ऑन स्कूल एजुकेशन में जारी किए गए आंकड़े चौकाने वाले थे। इसमें इस वर्ष दसवीं तक स्कूल छोड़ने वाली बच्चियों का आंकड़ा 50.7 फीसदी रहा। यूपी का आंकड़ा 52 फीसदी रहा। बच्चियों में आधे से ज्यादा दसवीं तक पहुंचते-पहुंचते स्कूल छोड़ देती हैं। एलयू में इंस्टिट्यूट ऑफ विमिन स्टडीज की पूर्व डायरेक्टर प्रफेसर निशी पांडेय के मुताबिक स्कूल छूटने का एक प्रमुख कारण पीरियड्स है।

नहीं दिया जा रहा छात्राओं को प्रशिक्षण

बीते साल किशोरी स्वास्थ्य योजना के तहत शहर को 13 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया था। सरकारी स्कूलों में स्वास्थ्य विभाग ने सैनिटरी पैड्स तो खरीदकर बांट दिए, लेकिन शिक्षकों और छात्राओं को प्रशिक्षण के लिए कोई कवायद नहीं की।

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