उत्तर प्रदेश

अब ‘बैड टच’ की ऑनलाइन शिकायत कर सकेंगे बच्चे

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क / गाँव कनेक्शन

अलीगढ़। प्रदेश के स्कूलों में बच्चों को गुड टच और बैड टच की जानकारी दी जा रही है, लेकिन जानकारी के बाद भी बच्चो में जागरूकता नहीं देखी जा रही है, इसी को देखते हुए अब बच्चे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत पॉक्सो ई बॉक्स (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) शुरू किया है।

पॉक्सो ई बॉक्स की शुरुआत

गुड टच और बैड टच के बारे में बच्चों को जागरूक करने के बाद अब उन्हें शोषण के खिलाफ शिकायत करने की पहल की गई है। अक्सर देखा जाता है कि बच्चों के साथ होने वाली बैड टच घटनाओं के बारे में बच्चे अपने अभिभावको को नहीं बता पाते इससे बहुत से बच्चे डर के कारण लंबे समय तक शारीरिक शोषण सहते रहते हैं। अपनी बात वो किसी से कह नहीं पाते। इसी को देखते हुए राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग ने पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत पॉक्सो ई बॉक्स की शुरुआत की है। यहां पर कोई भी बच्चा ऑनलाइन शिकायत कर सकता है। ई बॉक्स के बारे में बच्चों को जागरूक करने के लिए सीबीएसई ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं।

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चित्रों के माध्यम से बताएं अपनी शिकायत

बेवसाइड पर छह फोटोग्राफ्स दिए गए हैं, इनको देखकर बच्चे अपने साथ होने वाले क्राइम को पहचान सकता है। ई बॉक्स में शिकायत करने के लिए बच्चे को www.ncpcr.gov.in पर जाना होगा। वेबसाइट के होमपेज पर पॉक्सो ई-बॉक्स दिखाई देगा। इसमें बने बटन पर क्लिक करते ही शिकायत का विकल्प खुल जाएगा। बच्चे अपनी शिकायत की कैटेगिरी समझ सकें, इसके लिए चित्र पोर्टल पर डाले गए हैं। अपनी शिकायत से संबंधित चित्र पर क्लिक कर शिकायत दर्ज की जा सकती है।

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फोन से भी दर्ज होगी शिकायत

अगर किसी बच्चे के पास मोबाइल या ई-मेल की सुविधा नहीं है, तो वो ऑनलाइन अपनी शिकायत दर्ज कराने के बजाए 9868235077 या 1098 पर संपर्क कर सकते हैं।

बच्चों को मिलेगी तत्काल सहायता

पॉक्सो ई-बॉक्स शिकायत प्रणाली पूरे देश में व्यापक स्तर पर लागू की गई है। ऑनलाइन व्यवस्था लागू कराने के पीछे मंशा है कि बच्चों को तत्काल सहायता उपलब्ध हो सके और उनकी समस्याओं का त्वरित निस्तारण हो सके। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की वेबसाइट पर यह सर्वे दिखाया गया है कि 53 फीसद बच्चों को अपने जीवन काल में यौन शोषण का सामना करना पड़ता है।

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