आजमगढ़ शराब से मौत मामला: ‘शराब न बेचें तो हमारे बच्चे भूखों मर जाएंगे’

Ashutosh OjhaAshutosh Ojha   9 July 2017 11:48 PM GMT

आजमगढ़ शराब से मौत मामला: ‘शराब न बेचें तो हमारे बच्चे भूखों मर जाएंगे’आजमगढ़ के केवटहिया गांव में शराब के सेवन से युवकों के मौत के बाद रोते-विलखते परिजन।

आजमगढ़। “हम शराब बनाकर न बेचें तो हमारे बच्चे भूखे मर जाएंगे। अपने बच्चों का मुंह देखकर हमें यह काम करना पड़ता है।“ यह कहना है आजमगढ़ के केवटहिया गाँव की माया देवी (35 वर्ष) का। बता दें कि आजमगढ़ में जहरीली शराब के सेवन से 18 लोगों की मौत हुई है, जिसमें से 10 लोग इसी गांव के थे।

केवटहिया गाँव में जो शराब बनती है, उसे गाँव में कटहवा कहते हैं। यह शराब गुड़ से बनती है और इसकी कीमत मात्र 10 रुपये होती है। गाँव के गरीब लोग ही इस कच्ची शराब को पीते हैं और इसी से ही गाँव में कई लोगों का गुजर बसर भी चलता है। स्थानीय लोगों की माने तो ये यहां का कुटीर उद्योग है।

आजमगढ़ जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर थाना रौनापुर इलाके के केवटहिया गाँव की मीरा (34 वर्ष) बताती हैं, “हमारे छह बच्चे हैं। हम कहाँ जाएं, कैसे अपना गुजारा चलाएं। मेरा पति नशे में रहता है। हम अपने बच्चों को जैसे-तैसे करके पाल रहे हैं। गांव में पुलिस, डीएम , मंत्री, नेता सब मतलब से आते हैं। कोई हमारे लिए नहीं आता, यहां बस पैसे या वोट लेने सब आते हैं।''

संबंधित खबर : आजमगढ़ : शराब से मौत मामले में आठ गिरफ्तार, एक हजार लीटर शराब जब्त

मीरा आगे बताती हैं, “हमारे पास सिर्फ 2 बीघा जमीन है। उसमें ज्यादा कुछ होता नहीं। और बाढ़ में तो पूरा खेत ही डूब जाता है। हम किसको सुनाए अपनी समस्या। हमारे यहां बच्चा भी मजबूरी में शराब पीता है। मेरे गाँव में 30 लोग मेरे सामने मर गए। मुझे पता है कि एक दिन हम भी मर जायेंगे, लेकिन तब तक जीने के लिये कुछ तो करना ही पड़ेगा।

गांव के कुछ बच्चे ही स्कूल पहुंचते हैं

मूलभूत सुविधाओं को तरसते इस गांव में सुनीता के चार बच्चे हैं, इनके बच्चे स्कूल नहीं जाते। इसी गॉंव की माया देवी ( 35 वर्ष) बताती हैं, “मेरे पांच बच्चे हैं, कहाँ से लाऊं राशन, हमारा पति भी मजदूरी के नाम पर नाम मात्र ही कमाता है। वो ईंट भठ्ठे पर मजदूरी करता है। राशन हमको मिलता नहीं, कार्ड कभी बना ही नहीं। ना पीला कार्ड है, न नीला कार्ड है। हम किसके पास जाएँ। हम भी चाहते हैं कि हम अच्छा काम कर गुजारा करें, लेकिन इस गाँव में आज तक कोई योजना नहीं आयी। ग्रामीणों के मुताबिक गांव के कुछ बच्चे ही स्कूल जाते हैं वो भी मिड डे मील के लिए।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top