यूपी सरकार ने किया दो करोड़ से अधिक लघु एवं सीमांत किसानों का फसली कर्ज माफ

यूपी सरकार ने किया दो करोड़ से अधिक लघु एवं सीमांत किसानों का फसली कर्ज माफकर्ज़ माफ होने से खिले लाखों किसानों के चेहरे।

लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के दो करोड से अधिक लघु एवं सीमांत किसानों का बड़ा तोहफा दिया है। चुनाव से पहले किए अपने वादे के अनुसार बीजेपी सरकार ने किसानों का कर्ज़ा माफ कर दिया है। ये फैसला मंगलवार को योगी सरकार की पहली कैबिनेट में लिया गया। इस फैसले से प्रदेश के राजकोष पर 36359 करोड रुपए का बोझ आएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की पहली बैठक में राज्य के किसानों के हित में ये बड़ा फैसला किया गया जो विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा के लोक कल्याण संकल्प पत्र में प्रमुख मुद्दा था। कैबिनेट बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने लखनऊ में संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह हमारे संकल्प पत्र का हिस्सा है।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी चुनाव के दौरान ऐलान किया था कि भाजपा की सरकार बनने पर पहली कैबिनेट बैठक में ही लघु एवं सीमांत किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा।'' सिंह ने कहा कि लघु एवं सीमांत किसानों के विषय में जो महत्वपूर्ण निर्णय कैबिनेट ने किया है, वह फसली रिण से संबंधित है।

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गत वर्ष सूखा पड़ा, ओलावृष्टि हुई और बाढ़ आयी जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ। ‘‘उत्तर प्रदेश में लगभग दो करोड़ 30 लाख किसान हैं, जिनमें से 92. 5 प्रतिशत यानी 2.15 करोड़ लघु एवं सीमांत किसान हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘उनका ऋण माफ किया गया है। कुल 30, 729 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया गया है क्योंकि ये किसान बड़ा ऋण नहीं लेते इसी अंदाज से एक लाख रुपए तक का ऋण उनके खाते से माफ किया जाएगा।''

सिंह ने कहा कि साथ ही सात लाख किसान और हैं, जिन्होंने कर्ज लिया था और उसका भुगतान नहीं कर सके, जिससे वह ऋण गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) बन गया और उन्हें कर्ज मिलना बंद हो गया। ऐसे किसानों को भी मुख्य धारा में लाने के लिए उनके कर्ज का 5630 करोड रुपए माफ किया गया है। ‘‘इस तरह कुल मिलाकर किसानों का 36, 359 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया गया है।

3.60 लाख करोड़ का होता है यूपी का बजट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश का बजट लगभग 3.60 लाख करोड़ का होता है। जिसमें से 36000 करोड़ रुपये राज्य सरकार लघु एवं सीमांत किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने में खर्च कर देगी। ऐसे में राजकोषीय घाटे को संभालने के लिए सरकार को खर्च में कटौती या कुछ नये उपकरों का प्राविधान राज्य सरकार के आगाजी बजट में करेगी। जिससे जनता पर बोझ बढ़ने की आशंका है। फिलहाल सरकार की ओर से इस तरह का कोई इशारा नहीं किया गया है। मगर ये होना तय माना जा रहा है।

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सीमांत और लघु किसान जिसकी जोत 2.50 एकड़ से कम की है, वह आमतौर से 50 हजार तक का लोन बीज, खाद, कीटनाशक, छोटे कृषि उपकरण खरीदने के लिए लेता है। मगर इसके भुगतान में देरी होने पर कई बार ये लाखों तक पहुंच जाता है। किसान नेता शेखर दीक्षित का कहना है कि किसान ब्याज की असली परेशानी से परेशान है। इसलिए एक लाख रुपये तक की कर्जमाफी कुछ राहत तो देती है मगर पूरी तरह से पीड़ामुक्ति नहीं हो सकी है।

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योगी कैबिनेट ने गेहूं की सीधी खरीद का फैसला लेकर किसानों को एक और तोहफा दिया है।

राजस्व का दस फीसदी कर्ज माफी में चला जाएगा

हाल ही में जारी स्टेट बैंक की रपट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2016-17 में उत्तर प्रदेश सरकार का कुल राजस्व 3,40,255.24 करोड़ रुपये था और यदि इसमें से करीब 36 हजार करोड़ रुपये की ऋण माफी पर व्यय किए जाते हैं तो यह सरकार के कुल राजस्व का करीब 10 फीसदी से भी अधिक होगा। होगा। भारतीय स्टेट बैंक की एक शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 के आंकड़ों के मुताबिक अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों का उत्तर प्रदेश में 86,241.20 करोड़ रुपये का किसान ऋण बकाया है। इसमें प्रत्येक ऋण औसतन 1.34 लाख रुपये का बनता है।

यूपी की 40 फीसदी आबादी करती है खेती

सामाजिक आर्थिक एवं जातीय जगगणना-2011 के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश की ग्रामीण आबादी का करीब 40 प्रतिशत कृषि कार्य में लगे हुए हैं। वहीं 2010-11 की कृषि जनगणना के अनुसार राज्य में कृषि भूमि रखने वालों में 92 प्रतिशत छोटे या सीमांत किसान हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता कैबिनेट मंत्री सिध्दार्थनाथ सिंह ने कहा कि, हम इन 92 फीसदी किसानों को लाभान्वित कर रहे हैं।


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