पढ़ाई करने से रोकते थे माता-पिता तो छोड़ दिया घर 

Diti BajpaiDiti Bajpai   15 Nov 2017 9:55 PM GMT

पढ़ाई करने से रोकते थे माता-पिता तो छोड़ दिया घर श्रावस्ती से करीब 5 किमी दूर उच्च प्राथमिक विद्यालय सतीचौरा गाँव में छठवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं प्रिया रावत।

श्रावस्ती। ''मैं स्कूल जाकर पढ़ना चाहती थी, लेकिन मेरे मम्मी-पापा मुझे घर का काम सीखने के लिए कहते। काम न करो तो मारते थे तो एक दिन मैंने घर ही छोड़ दिया। अब मैं अपनी नानी के साथ रहकर पढ़ रही हूं। मीना मंच में भी हमको यहीं बताया गया कि शिक्षा बहुत जरुरी है।'' यह कहना था 13 वर्षीय प्रिया रावत का।

अब और बच्चों को कर रही हैं प्रेरित

श्रावस्ती जिला मुख्यालय से करीब 5 किमी दूर उच्च प्राथमिक विद्यालय सतीचौरा गाँव में प्रिया छठवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं। प्रिया के परिवार वालों ने उसे पढ़ने से बहुत रोका, लेकिन उसने हार नहीं मानी और आज वो खुद तो स्कूल आ ही रही हैं, साथ ही और भी बच्चों को स्कूल में आकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

यह भी पढ़ें: किसी ने स्कूल में दाखिला दिलवाया तो किसी ने रोकी बाल मजदूरी

पढ़ाई करेंगे और कुछ बनेंगे

''पांचवीं की पढ़ाई के बाद मम्मी-पापा ने बोला कि अब घर का काम करो, बकरी चराओ, लेकिन मुझे यह काम अच्छा नहीं लगता था। मुझे छठवीं में एडमिशन लेना था, लेकिन नहीं लेने दिया।'' प्रिया ने आगे बताया, ''एक दिन सुबह-सुबह मैं अपने गाँव से नानी के यहां आ गई। फिर यहां पर एडमिशन ले लिया। दो साल से अपने घर नहीं गए, पढ़ाई करेंगे और कुछ बनेंगे।''

इसलिए जाना जाता है मीना मंच

यूनिसेफ द्वारा 11 से 14 वर्ष के बीच किशोरी बालिकाओं का एक मंच है, जिसे मीना मंच के नाम से जाना जाता है। मीना एक काल्पनिक नाम है, जिसका सृजन यूनिसेफ ने किया है। किशोरी लड़कियों के साथ लैंगिक भेदभाव, उनके स्वास्थ्य, अशिक्षा, बाल विवाह, बालश्रम जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए मीना मंच का गठन किया गया है।

अनीता ने गाँव में बच्चों का ग्रुप बनाकर रोक दिया सरिता का बाल विवाह

इंग्लिश में बात करना अच्छा लगता है

प्रिया मुस्कुराते हुए बताती हैं, ''हमको स्कूल ड्रेस पहनना और इंग्लिश में बात करना अच्छा लगता है। मेरी एक छोटी बहन है जो मुझसे एक साल छोटी है वो अभी नहीं पढ़ रही है। अब मम्मी पापा उससे घर का काम कराते हैं। मुझे उसको भी पढ़ाना है।''

उत्तर प्रदेश के छह जिलों में विश्व बाल दिवस के मौके पर यूनिसेफ और गाँव कनेक्शन की ओर से साझा प्रयास किया जा रहा है। बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने, बाल विवाह रोकने, बाल श्रम को रोकने जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए मीना मंच के बच्चे अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।

प्रिया भी उनमें से एक बच्ची

सतीचौरा गाँव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में पिछले 20 वर्षों से प्रधान शिक्षिका नाज़मा बेगम बताती हैं, ''इस समय धान की कटाई का काम चल रहा है। ऐसे में ज्यादातर अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं। तो उन बच्चों को स्कूल लेकर आने का काम हमारे स्कूल के मीना मंच के बच्चे करते हैं। प्रिया भी उन्ही में से एक है, ये पढ़ाई के लिए अपने परिवार से तो लड़ी है। साथ जो बच्चे स्कूल नहीं आते हैं, उनको घर से भी बुलाकर लाती है।''

बाल दिवस : अपने परिवार से लड़कर बहनों का स्कूल में कराया दाखिला

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top