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पुल से गुजरना खतरे से खाली नहीं, ज़िम्मेदार अंजान 

पुल से गुजरना खतरे से खाली नहीं, ज़िम्मेदार अंजान अंग्रेजों के समय का बना हुआ एक पुल जर्जर अवस्था में है।

अरविन्द्र सिंह परमार, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

ललितपुर। जिले के पाली तहसील में अंग्रेजों के समय का बना हुआ एक पुल आज इतनी जर्जर अवस्था में है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन इस पुल की मरम्मत के लिए कोई अधिकारी ध्यान नहीं देता है। वहीं, यह पुल दो दर्जन से अधिक गाँवों को जोड़ता है।

बुंदेलखंड के ललितपुर जनपद से 80 किमी. दूर पूर्व-दक्षिण दिशा पाली तहसील के जामनी बांध के ऊपर नीम खेरा और पारौल के बीच अंग्रेजी शासन के समय पुल बना था। आज ये पुल पूरी तरह से टूट रहा है। दो दर्जन से अधिक गाँवो के लोग पुल न होने की वजह से प्रभावित है, रोज हजारों लोग निकलते हैं।

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वहीं पारौंल गाँव के रमेश (50 वर्ष) बताते हैं, “बरसात के दिनों में तो रास्ता बंद हो जाता है। दूसरे गाँव में राशन की दुकान है। नदी नाव से पार कर पाते हैं। दोनों तरफ का दस रूपए किराया लगता है। अगर पैसा नहीं होता ऐसी स्थिति में नाव वाले को कोटे का आधा लीटर मिट्टी का तेल या गेहूं देना पड़ता है।” पुल ऐसा टूट चुका है कि गड्ढों में तब्दील हो चुका है। गहरे-गहरे गड्ढे हैं। चार पहिया तो दूर की बात, मोटर साइकिल निकालना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। हल्लू ढीमर (50 वर्ष) बताते हैं, “राहगीर रोज चोटिल होते हैं। बरसात में दूसरे गाँव में जाने के लिए 30 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है।”

कर चुके हैं चुनाव बहिष्कार

सिगरवारा गाँव के बाबू लाल (70 वर्ष) पुल पर जाते हुए बताते हैं, “मुझे ध्यान नहीं है कि ये पुल कब बना था, यहां से निकलना आए दिन का काम है। बरसात के दिनों में निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। क्षेत्र की बड़ी समस्या है। चार पहिया वाहन नहीं निकल पाता।” पंचायत के ग्रामीण पुल की मांग को लेकर विधान सभा चुनाव बहिष्कार कर चुके हैं, फिर भी इस पुल को बनवाने के लिए कोई नहीं सुनता।

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