जानवरों के आतंक से किसान छोड़ रहे मूंगफली की खेती

जानवरों के आतंक से किसान छोड़ रहे मूंगफली की खेतीबंदरों के आतंक से गाँव में परेशान हो रहे किसान

बाराबंकी।
जिले में गोमती नदी से सटे गाँवों में मूंगफली की खेती कर रहे किसानों के लिए बंदर और सियार जैसे जानवर सिरदर्द बने हुए हैं। नदी के किनारे बसे गाँवो के किसान आज से लगभग तीन से चार साल पहले बड़े स्तर पर मूंगफली की खेती करते थें, लेकिन जानवरों के बढ़ते आतंक के कारण किसानों ने मूंगफली की खेती करना बंद कर दिया है।

अजमल पट्टी गाँव के किसान जैनेन्द्र अवस्थी (30 वर्ष) ने बताया , " बन्दरों व सियारों के कारण यहां किसानों के लिए मूंगफली की फसल को बचाना काफी मुश्किल साबित हो रहा है,जिसकी वजह से अब क्षेत्र में कोई भी मूंगफली की खेती नहीं करता है।"


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वहीं अजमल पट्टी गाँव के ही रहने वाले रविंद्र अवस्थी ने बताया कि " पहले मूंगफली की खेती करने में काफी फायदा होता था और एक बीघे में सिर्फ 1,000 से 1,500 की लागत अाती थी और एक बार बीज बोने के बाद खेत की निराई की जाती थी। उसके बाद जब फसल तैयार हो जाती थी तो 10,000 से 15,000 तक का फायदा प्रति बीघे किसान को होता था।लेकिन अब जानवरों के डर से यहां के किसान मूंगफली की खेती नहीं कर रहे हैं।'' क्षेत्र में नौ बिस्वा में मूंगफली बोने वाले किसान दयाराम बताया कि इस बार क्षेत्र में सिर्फ उन्होंने ही मूंगफली को खेती की है और इस बार उनको मेहनत भी काफी करनी पड़ रही है।उन्होंने इस बार मूंगफली को बन्दरो,सियारों व् नीलगाय से बचाने के लिए खेत के किनारे किनारे बांस बांधे हैं और वो इस समय दिन रात खेत में ही रहते है।

गोमती नदी से मात्र एक किलोमीटर पर बसे गाँव कामलाबाद के निवासी गुड्डू विश्वकर्मा बताते हैं, "अब मूंगफली में बिलकुल भी फायदा नहीं होता है और जो फल लगता भी है उसे बंदर और सियार खा लेते हैं, जिसके कारण लागत भी नहीं निकल पा रही है।"

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