पीजीआई में नये प्रयोग को बढ़ावा देंगे : यूपी सरकार

पीजीआई में नये प्रयोग को बढ़ावा देंगे : यूपी  सरकारपीजीआई में मनाया गया 22वें दीक्षान्त समारोह

लखनऊ। लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआई) में शनिवार को 22वें दीक्षान्त समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को डिग्री दी गई। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने नये प्रयोग करने की बात कही, जिसके लिए सरकार ने एसबीआई से 473 करोड़ रुपए का लोन लिया है।

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने शनिवार को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के 22वें दीक्षान्त समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा, ‘’इस कार्यक्रम में डिग्री पाने वाले विद्यार्थी अपना नया जीवन प्रारम्भ करने से पहले मेहनत करते हुए ईमानदारी से अपने दायित्वों के निर्वाह का संकल्प लें।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को डिग्री वितरित की

राज्यपाल ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को प्रदान की जाने वाली डिग्री के सर्टिफिकेट दिए। उन्होंने कहा, ‘’किसी पाठ्यक्रम को पूरा कर उसमें डिग्री हासिल करना काफी मेहनत और लगन का काम है। राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

ये भी पढ़े- डॉक्टरों ने बयां की अपनी परेशानी, कहा- एक डॉक्टर को करना पड़ता है चार के बराबर काम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीक्षान्त समारोह में कहा, ‘’भारतीय मंशा में ऐसा माना जाता है कि दीक्षा लेने के बाद जब स्नातक बाहर निकलता है, तो वह अपने प्रोफेशनल दौर में प्रवेश करता है। इस कार्यक्रम में डिग्री प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थी अब अपने प्रोफेशनल दौर में प्रवेश कर रहे हैं। विद्यार्थियों को ईमानदारी से सत्य की राह पर चलने की शपथ लेनी चाहिए।

ये भी पढ़े- यूपी में मेडिकल सुविधाएं : 20 हजार लोगों पर एक डॉक्टर और 3500 लोगों पर है एक बेड

उन्होंने संस्थान के डॉक्टरों को नए प्रयोग करने की सलाह दी। पीजीआई के डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को यह प्रयास करना चाहिए कि उत्तर प्रदेश के लोगों को इलाज के लिए राज्य के बाहर न जाना पड़े। पीजीआई की मदद राज्य सरकार हर सम्भव प्रयास कर रही है। इसकी सहायता के लिए सरकार ने एसबीआई से 473 करोड़ रुपए का लोन लिया है। राज्य सरकार पीजीआई के विकास और शोध कार्यों में पूरी मदद करेगी और धन के अभाव में इसका कोई भी कार्य नहीं रुकेगा।

मुख्यमंत्री ने पीजीआई में नये प्रयोग की बात की

उन्होंने पूर्वांचल में फैलने वाले इंसेफलाइटिस रोग का उदाहरण हुए कहा, “इस पर गहन शोध करने की आवश्यकता है। यदि इस पर पहले ही कार्य किया जाता, तो आज पूर्वांचल और उत्तर पश्चिम बिहार में इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता था।

ये भी पढ़ें-

यूपी के झोलाछाप डॉक्टर : बीमारी कोई भी हो सबसे पहले चढ़ाते हैं ग्लूकोज

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

Share it
Top