अब पोर्टल से पता चलेगा मिड डे मील वितरण में कितनी है पारदर्शिता

Meenal TingalMeenal Tingal   6 April 2017 2:27 PM GMT

अब पोर्टल से पता चलेगा मिड डे मील वितरण में कितनी है पारदर्शितामिड डे मील में पारदर्शिता लाने के लिए जल्द ही पोर्टल की शुरुवात की जाएगी ।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। मिड-डे मील के वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए इसका ब्योरा अब ऑनलाइन किए जाने की तैयारी हो रही है। इसके लिए पोर्टल बनाने की कवायद जल्द ही शुरू होगी। इस पोर्टल पर मिड-डे मील वितरण से जुड़ी जानकारियां कभी भी आसानी के साथ प्राप्त की जा सकेंगी। जिले और ब्लॉक स्तर पर स्कूलों की रिपोर्ट प्रतिदिन के हिसाब से पोर्टल पर दर्ज होगी।

प्रदेश में लगभग 1.98 लाख प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूल हैं, जिसमें लगभग 1.96 करोड़ बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इन सभी बच्चों को मिड-डे मील के तहत दोपहर का भोजन उपलब्ध करवाया जाता है।

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लखनऊ से लगभग 35 किमी दूर काकोरी ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय कठिंगरा के प्रधानाचार्य शाहिद अली आब्दी ने बताया कि , “मिड-डे मील वितरण से जुड़ी जानकारी यदि पोर्टल पर उपलब्ध होगी तो इसमें काफी हद तक पारदर्शिता आएगी।” ऐसा देखा गया है कि स्कूलों में पंजीकृत बच्चों में से लगभग 50 फीसदी बच्चे ही खाना खाते हैं।

इसमें एक खेल यह भी होता है कि जो बच्चे खाना नहीं खाते हैं उनकी गिनती भी इसमें कर ली जाती है, लेकिन पोर्टल के माध्यम से इस पर भी नजर रखी जाएगी। अभी तक हर दिन कंट्रोल रूम द्वारा हर स्कूल के शिक्षक के पास फोन करके इस बात की जानकारी प्राप्त की जाती है कि कितने बच्चों ने आज खाना खाया। पोर्टल पर जिलेवार और ब्लॉकवार तरीके से स्कूलों का ब्योरा दर्ज होगा।

लखनऊ से 40 किलोमीटर दूर स्थित बख्शी का तालाब ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय खानपुर में प्रधानाध्यापक देवेन्द्र मिश्रा कहते हैं, “पोर्टल पर सारी जानकारी उपलब्ध होने से उन बच्चों के साथ न्याय होगा, जिनको खाना नहीं मिल पाता और कागजों में दर्ज हो जाता है। चूंकि पोर्टल पर कोई भी जानकारी प्राप्त कर सकता है इसलिए पारदर्शिता आएगी। साथ ही इस बात की जानकारी भी हर रोज होती रहेगी कि स्कूल में कितने बच्चे उपस्थित रहते हैं।”

क्या है मिड-डे-मील योजना

मध्याह्न भोजन योजना देश के 2408 ब्लॉकों में एक केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम के रूप में चल रही है। इस योजना का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना, लाभवंचित वर्गों के गरीब बच्चों को नियमित रूप से स्कूल आने और कक्षा के कार्यकलापों पर ध्यान केन्द्रित करने में सहायता करना व ग्रीष्मावकाश के दौरान अकाल-पीड़ित क्षेत्रों में प्रारंभिक स्तर के बच्चों को पोषण सम्बन्धी सहायता प्रदान करना है।

कुछ समय पहले एक जनहित याचिका दायर की गई थी उसी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने पोर्टल बनाने का आदेश दिया है। यह व्यवस्था देश के सभी प्रदेशों में लागू होगी। जल्द ही प्रदेश में पोर्टल तैयार होगा, जिससे मिड-डे मील के वितरण में पारदर्शिता लायी जा सके।
नीलम, उपनिदेशक, मध्याह्न भोजन प्राधिकरण

मध्याह्न भोजन योजना देश के 2408 ब्लॉकों में 15 अगस्त 1995 को आरंभ की गई थी। वर्ष 1997-98 तक यह कार्यक्रम देश के सभी ब्लाकों में आरंभ कर दिया गया। वर्ष 2003 में इसका विस्तार शिक्षा गारंटी केन्द्रों और वैकल्पिक व नवाचारी शिक्षा केन्द्रों में पढ़ने वाले बच्चों तक कर दिया गया। अक्टूबर 2007 से देश के शैक्षणिक रूप से पिछड़े 3479 ब्लाकों में इसकी शुरुआत हुई। फिर वर्ष 2008-09 से यह कार्यक्रम देश के सभी क्षेत्रों में उच्च प्राथमिक स्तर पर पढ़ने वाले सभी बच्चों के लिए कर दिया गया। राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना विद्यालयों को भी प्रारंभिक स्तर पर मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत एक अप्रैल 2010 से शामिल किया गया।

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