बाल विवाह से खुद को बचाने वाली रेहाना आज औरों को बचा रही 

Basant KumarBasant Kumar   7 May 2017 4:33 PM GMT

बाल विवाह से खुद को बचाने वाली रेहाना आज औरों को बचा रही रेहाना 

श्रावस्ती। रेहाना ने न सिर्फ अपना बाल विवाह रोका, बल्कि आज महिला समाख्या के साथ मिलकर दूसरों को बाल विवाह को रोकने के लिए जागरूक कर रही हैं। उनके इस कदम से वह क्षेत्र में अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनी हैं।

“मेरी शादी 13 साल की उम्र में एक 25 साल के युवक से की जा रही थी। तब मैं आठवीं में पढ़ रही थी और शादी रोकना चाहती थी, लेकिन घर और समाज के डर से खामोश थी। डरते-डरते महिला समाख्या की एक दीदी से मिली और उनके सहयोग से शादी करने से मना कर दिया। लोगों ने बहुत बुरा भला कहा, लेकिन मैं अपने काम से उन्हें जवाब देती रही।’’ प्रदेश के श्रावस्ती जिला मुख्यालय से 50 किमी. दूर गाँव बुलडा परसावना की रहने वाली रेहाना (23 वर्ष) सिर पर दुप्पटा डालते कहती हैं।

रेहाना आगे बताती हैं, ‘‘तब मैंने खुद की शादी रोकी थी और आज मैं महिला समाख्या से जुड़कर दूसरी नाबालिग लड़कियों की शादी रोक रही हूं। श्रावस्ती में बाल विवाह एक बहुत बड़ी समस्या है। यहां ज्यादातर लड़कियों की शादी कम उम्र में ही हो जाती है।”

मेरी शादी 13 साल की उम्र में एक 25 साल के युवक से की जा रही थी। तब मैं आठवीं में पढ़ रही थी और शादी रोकना चाहती थी, लेकिन घर और समाज के डर से खामोश थी। डरते-डरते महिला समाख्या की एक दीदी से मिली और उनके सहयोग से शादी करने से मना कर दिया।
रेहाना

2014 में आई यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे विश्व में 15.6 करोड़ पुरुषों की तुलना में करीब 72 करोड़ महिलाओं की शादी 18 साल से कम उम्र में हुई। इनमें से एक तिहाई संख्या (लगभग 24 करोड़) भारतीय महिलाओं की है। बाल विवाह को लेकर इण्डिया स्पेंड की एक रिपोर्ट के अनुसार 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में लगभग 17 लाख भारतीय बच्चोँ में से 6 प्रतिशत बच्चे जो 10 से 19 की उम्र के बीच में हैं, शादीशुदा हैं और बहुत से अपने से कहीं बूढ़े व्यक्तियों के साथ शादी के बंधन में बढ़े हैं।उत्तर प्रदेश और बिहार में शादीशुदा बच्चों की संख्या सबसे अधिक 2.8 मिलियन है।

देश में लगभग 17 लाख भारतीय बच्चोँ में से 6 प्रतिशत बच्चे जो 10 से 19 की उम्र के बीच में हैं, शादीशुदा हैं. फोटो- इन्टरनेट

रेहाना कहती हैं, “ महिला समाख्या की दीदी की मदद से मेरी शादी रुकी और आज मैं खुद महिला समाख्या से जुड़कर नाबालिक लड़कियों की शादी रुकवा रही हूं।” रेहाना आगे बताती हैं, “जब मैं अपनी शादी रोकी तो मेरे घर वाले तो ज्यादा नाराज़ नहीं हुए, लेकिन आसपास के लोगों ने बहुत उल्टा बोला था। मैं उन्हें बोलकर जवाब नहीं दी, मैं दसवीं, बारहवीं, बीए और एमए फर्स्ट डिविजन से पास की और इस तरह लोगों के सैकड़ों सवालों का जवाब दिया था। लोगों की बातों की परवाह किये बिना मैं अपने मन के जिंदगी जीती रही थी। 2014 में मेरी शादी हुई और आज मैं महिला समाख्या के साथ काम कर रही हूं।”

मेरे गाँव में और आस पास नाबालिग लड़कियों की शादी तब भी आम बात थी और कुछ हद तक आज भी है। लेकिन मेरे शादी नहीं करने के निर्णय और सफलता के बाद गाँव में बहुत बदलाव आया और आज कुछ हद तक कम शादियां हो रही है।
रेहाना

वह आगे कहती हैं कि मेरे गाँव में और आस पास नाबालिग लड़कियों की शादी तब भी आम बात थी और कुछ हद तक आज भी है। लेकिन मेरे शादी नहीं करने के निर्णय और सफलता के बाद गाँव में बहुत बदलाव आया और आज कुछ हद तक कम शादियां हो रही है। रेहाना अफ़सोस जाहिर करते हुए बताती हैं, मेरी ननद की पिछले दिनों कम उम्र में ही शादी कर दी गई थी। मैं रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन मेरा कहा नहीं सुना गया। एक साल बाद वो गर्भवती हुई और बड़े ऑपरेशन के बाद बच्चा हुआ। बड़े ऑपरेशन के बाद बच्चा तो बच गया, लेकिन माँ की मौत हो गयी। कम उम्र में शादी होने के कारण लड़कियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

कानून होने के बाद भी नहीं रुक रहा बाल विवाह

लखनऊ हाईकोर्ट के वकील महेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि बाल विवाह अब भी हमारे समाज में जगह बनाए हुए है। इसमें अशिक्षा के साथ-साथ मजबूत कानून का नहीं होना है। बाल विवाह को रोकने के लिए मजबूत कानून के साथ-साथ कानून को मजबूती से लागू किया जाए और जो भी बाल विवाह में शामिल हो तो उसे सख्ती से सज़ा दी जाए।

ग्रामीण इलाकों में अभी भी लोग लड़कियों को बोझ समझते है। उनकी जल्द से जल्द शादी करा देना चाहते है। आजकल हम क्षेत्र में बाल विवाह पर सख्ती से काम कर रहे हैं तो जब हम किसी की शादी रोकते हैं तो वो हमसे लड़ने को तैयार हो जाते हैं।
इंदु, प्रमुख, महिला समाख्या श्रावस्ती

आज भी लड़कियों को समझते हैं बोझ

महिला समाख्या श्रावस्ती की प्रमुख इंदु बताती हैं, ग्रामीण इलाकों में अभी भी लोग लड़कियों को बोझ समझते है। उनकी जल्द से जल्द शादी करा देना चाहते है। आजकल हम क्षेत्र में बाल विवाह पर सख्ती से काम कर रहे हैं तो जब हम किसी की शादी रोकते हैं तो वो हमसे लड़ने को तैयार हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि हम उनके खिलाफ काम कर रहे हैं लेकिन हम लोगों बेहतर जिंदगी के लिए ही ऐसा करते हैं। कम उम्र में शादी करना अब भी यहाँ आम बात है। अगर हम रोकते हैं तो स्थानीय नेता दबाव बनाते हैं, लेकिन हम काफी सजगता से नाबालिग लड़कियों की शादी रोकने का काम कर रहे हैं और लोगों में बल विवाह को लेकर जागरूकता फैला रहे हैं।

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