वाराणसी में रेप पीड़ित बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए धरने पर बैठा मायूस परिवार

वाराणसी में रेप पीड़ित बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए धरने पर बैठा मायूस परिवारधरने पर बैठा परिवार

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

वाराणसी। पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में करीब एक माह से बलात्कार पीड़ित बच्ची और उसके परिजनों ने न्याय के लिए थानेदार से लेकर कप्तान के यहां गुहार लगाई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पीड़ित परिवार अब सड़क पर धरने पर बैठ गया है।

जिला मुख्यालय से करीब दस किमी दूर ग्राम सभा चांदपुर स्थित चौराहे पर रविवार दोपहर बलात्कार पीडि़त बच्ची के परिजन ग्रामीणों के साथ धरना पर बैठ गए। धरना लोगों का आरोप है कि करीब एक माह बाद भी पुलिस द्वारा सही रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई और स्थानीय पुलिस अन्य आरोपितों को बचा रही है। परिजनों ने चेतावनी दी कि जब तक पुलिस सही मुजरिम को सामने नहीं लाएगी, तब तक हम लोग यहां बैठे रहेंगे।

मंडुवाडीह थाना क्षेत्र के नवापुरा की नट बस्ती में 18 मई को मजदूर संजय ने मां के साथ सो रही पांच साल की अबोध बच्ची को धीरे से उठाया और कुछ दूर एक खेत में ले गया, जहां उसने मासूम के साथ दुष्कर्म किया। ग्रामीणों को आता देख संजय भाग रहा था, जिस पर ग्रामीणों की नज़र पड़ गई और उन लोगों ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस के हवाले कर दिया। बच्ची का इलाज बीएचयू के ट्रामा सेंटर में कराया गया। इलाज के दौरान एसएसपी नितिन तिवारी बच्ची को देखने पहुंचे थे। उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर देख अपने पास से 50 हजार रुपए इलाज के लिए देने का ऐलान किया था।

धरना स्थल पर बच्ची के माता-पिता के अलावा मौजूद नाना हाथ जोड़कर बोले, "आज हमें थक हारकर इस मैदान में आना पड़ा। मेरे साथियों, मेरे गाँव के लोग इस दुख की घड़ी में मेरा साथ दे। शासन-प्रशासन जब तक सही मुजरिमों को सामने नहीं लाती है, तब तक हम लोग यहीं पर बैठे रहेंगे।"

मौके पर मौजूद सरिता पटेल ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार आरोपित संजय ने पुलिस को बताया था कि मेरे साथ तीन और लोग थे। जानकारी होने के बावजूद पुलिस उन तीनों आरोपितों को बचा रही है। प्रशासन ने कहा कि बच्ची को मुआवजा मिल गया, लेकिन अभी तक पीडि़ता को कोई मुआवजा नहीं मिला है। इस संबंध में एसएसपी को अवगत कराया गया, लेकिन उन्होंने भी अनसुना कर दिया। घटना के दो दिन बाद बीएचयू ट्रामा सेंटर में बच्ची से मिलने पहुंची कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा भी पहुंची थी, लेकिन आश्वासन के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।

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