एनजीटी के मानकों की धज्जियां उड़ा रहे ईंट भट्ठे 

Sundar ChandelSundar Chandel   21 Nov 2017 1:48 PM GMT

एनजीटी के मानकों की धज्जियां उड़ा रहे ईंट भट्ठे  इनमें 28 भट्टे तो इनमें प्रतिबंधित वन अभ्यारण्य क्षेत्र में संचालित

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मेरठ। एक तरफ मेरठ सहित पूरा एनसीआर प्रदूषण की आग में जल में रहा है। सरकार इसके लिए तरह-तरह के नियम बना रही है, लेकिन जनपद में 50 ईंट भट्टे बिना अनुमति के ही चल रहे हैं। इन भट्टों ने न तो पर्यावरण विभाग से एनओसी ली है और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति। खास बात ये है कि इनमें 28 भट्टे प्रतिबंधित वन अभ्यारण्य क्षेत्र में संचालित हैं।

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घट रही मिट्टी की उर्वरता

भट्टा संचालक मिट्टी खनन में भी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। प्रशासन स्तर से सिर्फ डेढ़ फिट तक ही मिट्टी उठाने का नियम है, लेकिन संचालक पांच-पांच फिट तक खनन कर मिट्टी को बंजर बना रहे हैं।

जिला कृषि अधिकारी जशवीर तेवतिया बताते हैं, "जिन-जिन क्षेत्रों में ईंट भट्टे संचालित है। मिट्टी के पोषक तत्व गायब हो चुके हैं। वो आगे बताते हैं, "यदि भट्टा प्रभावित क्षेत्रों में अधिक खनन होगा तो पांच फिट नीचे निकलने वाली मिट्टी पांच साल बाद ही फसल उगाने योग्य बन पाएगी।"

सभी मवाना तहसील में, दिखावे के लिए नोटिस

जैसे ही कुछ भट्टों को प्रमाणपत्र मिला, बाकि भट्टों का संचालन भी शुरू हो गया। इन भट्टा संचालकों ने किसानों से जमीन लीज पर लेकर मिट्टी खनन करना शुरू कर दिया है। शिकायत पर प्रशासन ने दिखावे के लिए नोटिस भी जारी किए, लेकिन भट्टों का संचालन धड़ल्ले से चल रहा है। सभी प्रतिबंधित 50 भट्टे मवाना तहसील के अंर्तगत आते हैं, जिनमें से 28 भट्टे ऐसे हैं जो वन अभ्यारण्य की सीमा क्षेत्र में आते हैं।

हाल ही में मानक पूरे न करने वाले भट्टा संचालकों की मिटिंग हुई, जहां प्रशासन से मिले नोटिस पर चर्चा के बाद तय हुआ कि कैसे भी करके आने वाले बरसात तक भट्टे चलाने की अनुमति ले ली जाए। इसके बाद प्रशासनिक हल्के में पकड़ रखने वाले भट्टा स्वामियों ने मोन स्वीकृति भी प्रदान करा दी है।

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जो भी ईंट भट्टा संचालक एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हे चिंहित किया जाएगा। बिना एनओसी के भट्टों का संचालन करना अपराध है।
आरके त्यागी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी

भट्टा चलाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी अनुमति लेनी होती है, लेकिन सेटिंग के चलते सभी नियम ताक पर रख दिए गए। वहीं वन अभ्यारण्य क्षेत्र में भट्टा संचालित करने वाले आवेदनों को वन विभाग ने भी खारिज कर दिया है। इसके बावजूद भी भट्टों के संचालन पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

  • जनपद में कुल ईंट भट्टों की संख्या 215
  • बिना एनओसी के शुरू हुए ईंट भट्टों की संख्या 50
  • वन अभ्यारण्य क्षेत्र में चल रहे भट्टों की संख्या 28

मेरठ जिले के मुख्य वन संरक्षण अधिकारी मुकेश कुमार बताते हैं, “उनके पास वन अभ्यारण्य क्षेत्र में होने वाले भट्टों को अनुमति के आवेदन आए थे, लेकिन उन्होंने उन्हे खारिज कर दिया था। उस वक्त तो भट्टों के संचालन पर रोक लगा दी गई थी। वन की सीमा में भट्टे होने से पेड़ों और जीवों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।”

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सभी भट्टा संचालकों को प्रदूषण नियंत्रण उपकरण जिक जैक लगाने और पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेने के लिए कहा गया है। यदि इसके बगैर भी भट्टों का संचालन हो रहा है तो जांच के बाद कार्रवाई निश्चित है।
दिनेश चंद्र, एडीएम प्रशासन

ये है भट्टा संचालन का नियम

ईंट भट्टा संचालन को लेकर दायर याचिका पर एनजीटी के आदेशों के तहत पर्यावरण मंत्रालय से प्रमाणपत्र लेना जरूरी है। बाद में शासन ने इस बेहद परेशानी भरी कार्रवाई को सरल करते हुए जिला स्तर पर ही कमेटियां गठित कर वहीं से प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया था, लेकिन इस प्रमाणपत्र को लेने के लिए जरूरी औपचारिकताएं ही भट्टा संचालक पूरी नहीं कर पाए और जनपद के 215 भट्टा संचालकों में से कुछ को ही यह प्रमाणपत्र मिल सका। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी एनओसी देने के लिए कुछ मानक तय किए हैं।

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