तनख़्वाह सरकार से काम नर्सिंग होम का

Shrivats AwasthiShrivats Awasthi   5 May 2017 3:43 PM GMT

तनख़्वाह सरकार से काम नर्सिंग होम कासरकार किसी की भी हो लेकिन ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का हाल जस का तस है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

उन्नाव। सरकार किसी की भी हो लेकिन ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का हाल जस का तस है। सरकार की इस बड़ी सुविधा को जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने वाले मौका मिले तो गरीबों को लूटने में तनिक भी संकोच नहीं करते हैं। यूं तो स्वास्थ्य विभाग के कारनामे अक्सर उजागर होते रहते है।

लेकिन ताजा प्रकरण विकास खण्ड सिकन्दरपुर कर्ण की कोलुहागाड़ा ग्राम पंचायत के मजरे गयादीन खेड़ा का है। जहां प्रसव पीड़ा होने पर एएनएम से सम्पर्क करने वाली एक प्रसूता को सरकारी अस्पताल न ले जाकर निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। मामले की जानकारी होने पर ग्राम प्रधान ने सीएमओ से शिकायत की है।

देश-दुनिया से जुड़ी सभी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

गयादीनखेड़ा के रहने वाले राम पुत्र सुरजू की पुत्री वन्दना की डिलीवरी होनी थी। सुरजू ने बताया, बीती 12 अप्रैल को बेटी को प्रसव पीड़ा होने पर गांव में नियुक्त एएनएम से सम्पर्क साधा। एएनएम ने वंदना को आशा बहू भानमती के घर भेजा। एएनएम के निर्देश पर आशा बहू प्रसूता को बाईपास स्थित एक निजी नर्सिंग में लेकर पहुंची और वहां उसे भर्ती करा दिया।

अभी तक हमारे पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत आते ही वह मामले की जांच कराएंगे।
चंद्रभूषण नाथ त्रिपाठी, सीएमओ

थोड़ी ही देर में एएनएम भी नर्सिंग होम पहुंच गयी। जच्चा बच्चा को जान का खतरा बताते हुए 2 हजार रूपये जमा करने को कहा। उसके पास इतने पैसे नहीं थे उसने बहुत कहा मुझे सरकारी अस्पताल जाने दीजिये लेकिन उसकी नहीं सुनी गई। मजबूरी में प्रसूता का पिता ग्राम प्रधान चुन्नी देबी से पैसे उधार लाया तब उसकी बेटी की डिलीवरी कराई गई।” ग्राम प्रधान ने पूंछा सरकारी अस्पताल क्यों नही गये? तब उसने सारी बात बताई घर पहुंचने के बाद उसे अहसास हुआ उसके साथ ठगी की गयी है।

वह फिर प्रधान के पास पहुंचा कहा हम शिकायत करेंगे उसने शिकायती पत्र मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजा है। जिसमें उसने आरोप लगाया है कि एएनएम मिथिलेश कुमारी बीते कई वर्षों से यहाँ जमी है और ग्रामीणों को इसी तरह निजी नर्सिंग होमों में भेजकर गरीबों को कर्जदार बना रही है। इस तरह के दर्जनों प्रकरण प्रकाश में आ चुके हैं।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top