सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया 150 छात्रों का एमबीबीएस में दाखिला, कॉलेज देगा 10-10 लाख 

सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया 150 छात्रों का एमबीबीएस में दाखिला, कॉलेज देगा 10-10 लाख जीसीआरजी कॉलेज के 150 छात्रों का प्रवेश रद्द  

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तरप्रदेश के लखनऊ के जीसीआरजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सायंस के 150 छात्रों का दाखिला रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिया है कि सभी छात्रों को मुआवजे के तौर पर दस दस लाख रुपए देने और दाखिले के लिए ली गई फीस लौटाने का निर्देश दिया है।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने अवैध तरीके से दाखिला लेने के लिए मेडिकल कॉलेज पर 25 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने ये जुर्माना आठ हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की इस बात के लिए आलोचना की कि उसके आदेश के बावजूद मेडिकल कॉलेज को दाखिला लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ये न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि मेडिकल कॉलेज में दाखिले को लेकर हाईकोर्ट कोई भी अंतरिम आदेश पारित न करे।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बावजूद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 1 सितंबर को मेडिकल कॉलेज को छात्रों का दाखिला लेने की अनुमति देने का आदेश पारित कर दिया। हाईकोर्ट के इस आदेश पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे हाईकोर्ट को न्यायिक अनुशासन के उल्लंघन का दोषी पाया।

ये भी पढ़ें- उच्च रक्त चाप के मानक बदले, अब 130/80 होगा सामान्य

क्या था मामला

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ का यह आदेश न्यायिक अनुशासन की अनदेखी कर जल्दबाजी में आदेश देने वाली अदालतों और मन माफिक आदेश पाने के लिए अलग अलग अदालतों का चक्कर लगाने वाले संस्थानों के लिए एक नसीहत है। सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट तौर पर 2017-18 के शैक्षणिक सत्र की अनुमति देने पर रोक के बावजूद हाईकोर्ट ने मेडिकल कालेज को 2017-18 के शैक्षणिक सत्र के लिए 150 छात्रों को एमबीबीएस में प्रवेश देने की इजाजत दे दी थी।

कोर्ट ने हाईकोर्ट के रवैये पर ऐतराज जताते हुए कहा कि उसने ऐसा आदेश पारित करने से पहले मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया और केन्द्र सरकार को पक्ष रखने की भी इजाजत नहीं दी। पीठ ने कहा कि छात्रों के प्रवेश की अनुमति देने वाला हाईकोर्ट का आदेश अनुचित, गलत और बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। हाईकोर्ट ने न्यायिक शुचिता और अनुशासन का ख्याल नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी छात्रों का प्रवेश रद करते हुए कहा कि जिन लोगों ने युवा छात्रों को गुमराह कर उन्हें प्रवेश दिया और उनसे फीस वसूली वे ऐसे ही नहीं छोड़े जा सकते। कोर्ट ने कालेज को आदेश दिया कि वह सभी छात्रों को वसूली गई फीस के अलावा 10-10 लाख रुपये दे। इसके अलावा 25 लाख रुपये जुर्माने के तौर पर आठ सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कराए।

ये भी पढ़ें-बालदिवस/डायबिटीज डे विशेष: इन लक्षणों से पहचानिए कि कहीं आपके बच्चे को डायबिटीज तो नहीं

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top