स्कूलों की तय दुकानों पर कब होगी छापेमारी,आखिर कब तक जेब ढीली होती रहेगी अभिभावकों की 

स्कूलों की तय दुकानों पर कब होगी छापेमारी,आखिर कब तक जेब ढीली होती रहेगी अभिभावकों की निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए शिक्षा अधिकारियों ने सिटीजन चार्टर लागू किया।

मीनल टिंगल,स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए शिक्षा अधिकारियों ने सिटीजन चार्टर लागू कर दिया। कई ऐसे स्कूलों पर छापे भी मारे गये जहां स्टेशनरी और ड्रेस की दुकानें संचालित हो रही थीं। मगर ऐसे स्कूलों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी, जिन्होंने कमीशन के चलते बाजारों में मौजूद दुकानों को सेट कर रखा है।

स्कूल प्रशासन द्वारा अभिभावकों को उन दुकानों के नाम बाकायदा पैम्पलेट के माध्यम से उपलब्ध करवाये जाते हैं, जिनसे सामान्य से कहीं अधिक दामों पर स्टेशनरी व स्कूल ड्रेस खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर होना पड़ता है। ड्रेस किसी अन्य दुकान से न खरीद ली जाये, इसके लिए स्कूल की ड्रेस का रंग भी स्कूल प्रशासन बदल रहे हैं। ड्रेस को खरीदने के लिए केवल उन चंद दुकानों पर जाना अभिभावकों की मजबूरी है, जहां यह मौजूद है।

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सिटी मॉन्टेसरी की चौक शाखा में अपने दो बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावक बताते हैं, “मेरे दो बच्चे इस स्कूल में पढ़ रहे हैं, जिनकी ड्रेस का रंग इस बार बदल दिया गया है। यह ड्रेस किडी गारमेंट्स नाम की एक दुकान, जिसकी शहर में कई शाखाएं हैं, पर सामान्य से ज्यादा दाम में मौजूद हैं। इसके अलावा चाहकर भी ड्रेस को बाहर से नहीं खरीदा जा सकता। इस दुकान पर मॉल की शॉर्टेज बतायी गयी है और 17 अप्रैल की तारीख ड्रेस ले जाने के लिए बतायी गयी है। ऐसा ही हाल काकोरी रोड स्थित सेंट क्लेअर्स एकेडमी का भी है।

इस स्कूल में अपनी बच्ची को कक्षा 9 में पढ़ा रहीं अभिभावक पारुल कहती हैं, “मेरे दो बच्चे हैं जो शुरू से अब तक इसी स्कूल में पढ़ते रहे हैं। अभी बेटी वहीं पढ़ रही है। हमेशा से स्कूल से स्टेशनरी की लिस्ट और उन चयनित दुकानों के नाम उपलब्ध करवाये जाते हैं, जहां से स्टेशनरी व ड्रेस खरीदना हमारी मजबूरी होती है। अन्य दुकानों पर ड्रेस सस्ते दाम में मौजूद होने पर भी अधिक दामों में इन दुकानों से खरीदनी पड़ती है, लेकिन बच्चे को अगर इस स्कूल में पढ़ाना है तो सहन करते आ रहे हैं।

अभी उन स्कूलों पर छापेमारी जारी है, जहां स्कूल परिसर में दुकानें मौजूद हैं। इन स्कूलों को नोटिस के माध्यम से यह कहा जायेगा कि वह अपने स्कूलों में अभिभावकों के लिए यह नोटिस जारी करें कि वह स्कूल ड्रेस व स्टेशनरी किसी भी दुकान पर खरीदने के लिए आजाद हैं।
उमेश त्रिपाठी, जिला विद्यालय निरीक्षक

सिर्फ एक स्कूल का हाल नहीं

यह हाल केवल एक स्कूल का नहीं है। शहर में हर छोटे-बड़े निजी स्कूलों का है। केवल स्कूल ड्रेस व स्टेशनरी ही नहीं, पब्लिशर्स से कमीशन पाने के लिए कई बार स्कूल प्रशासन साल-दो साल में कई किताबें भी बदल देते हैं। कई दुकानों पर कापी-किताबों के पैकेट तैयार कर दिये गये हैं। इसमें स्कूल द्वारा निर्धारित पब्लिशर्स की किताबों-कापियों से लेकर स्टेशनरी, बैग-बॉटल तक शामिल कर दिया गया है।

हर वर्ष नये शैक्षिक सत्र में सैकड़ों की संख्या में अभिभावक यह शिकायत करते हैं कि स्कूलों द्वारा तय दुकानों से ही स्कूल ड्रेस व स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। इस बार सिटीजन चार्टर लागू होने के बाद कुछ उम्मीदें बनी हैं कि शायद ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई हो और अभिभावकों को कुछ राहत मिल सके।
प्रदीप श्रीवास्तव, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश अभिभावक कल्याण संघ

इन पैकेट की मनमानी कीमत भी निर्धारित कर दी गयी है। हाल यह है कि पैकेट से स्टेशनरी को निकाल कर देख भी नहीं सकते। कापियों के रैपर भी साथ लेना अनिवार्य है। कई दुकानों पर कापियों के रैपर पर स्कूलों के नाम की नेमस्लिप तक उपलब्ध है। स्कूलों द्वारा निर्धारित इन दुकानों पर बाजार से 30 प्रतिशत तक महंगा सामान मिल रहा है।

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