पढ़िए, मुख्यमंत्री योगी के किस भरोसे पर धरना और गिरफ्तारी टालने को राजी हुए शिक्षामित्र

पढ़िए,  मुख्यमंत्री योगी के किस भरोसे पर धरना और गिरफ्तारी टालने को राजी हुए शिक्षामित्रशिक्षामित्र

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों का अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन तीसरे दिन बुधवार को सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक के बाद समाप्त हो गया। शिक्षामित्रों ने सीएम के साथ एनेक्सी भवन में 1 घंटे 20 मिनट वार्ता की है। सीएम के आश्वासन के बाद शिक्षामित्रों ने धरना-प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया।

सीएम ने बैठक में शिक्षामित्रों को आश्वासन दिया कि, जल्द ही तीन सदस्यीय टीम अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद शिक्षा मित्रों को आश्रम पद्धति के तहत समान काम समान वेतन के आधार पर नियुक्त किया जायेगा। सीएम के साथ बैठक में शिक्षामित्रों ने समान कार्य-समान वेतन की बात सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने रखी, जिसे सरकार ने स्वीकार करते हुए आईएएस स्तर के अधिकारी नामित किए हैं।

शिक्षा मित्र के प्रदेश अध्यक्ष जीतेन्द्र शाही ने कहा कि, मनमाने ढंग से जारी किए गए मुख्य अपर सचिव के आदेश को कतई स्वीकार नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि, ऐसी कई मांगों को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ के पस गए थे। जहां सीएम ने आश्रम पद्धति पर शिक्षा मित्रों को समान काम समान वेतन देने का आश्वासन दिया। साथ ही सीएम ने इस संबंध में आईएएस अवनीश अवस्थी, लखनऊ डीएम कौशल राज शर्मा और अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा राज प्रताप सिंह को नामित किया है। इन अधिकारियों को सीएम ने शिक्षा मित्रों पर एक रिपोर्ट देने के लिए कहा है। सरकार के इस सकारात्मक रुख को देखते हुए शिक्षामित्रों ने अपना अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया है।

वहीं प्रदेश अध्यक्ष गाजी इमाम आला ने प्रदेश सरकार की इस ओर सकारात्मक आश्वासन देने के बाद कहा कि, राज्य व केंद्र सरकार मिलकर संशोधित अध्यादेश लाकर प्रदेश के 172000 शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनाए। उन्होंने कहा प्रक्रिया पूर्ण होने तक समान कार्य समान वेतन का लाभ सभी से शिक्षामित्रों को प्रदान किया जाए अन्यथा मांगें पूरी न होने पर भविष्य में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन दोबारा किया जा सकता है।

शिक्षामित्रों की मांग थी कि, केंद्र व राज्य सरकार संशोधित अध्यादेश लाकर प्रदेश के सभी 1,72,000 शिक्षामित्रों को पुनः शिक्षक बनाए। इसे लेकर शिक्षामित्र बुधवार को जेल भरो आंदोलन की तैयारी कर रहे थे। शिक्षामित्रों के आक्रोश को देखते हुए भारी संख्या में राज्य सरकार ने पुलिस और पीएसी बल तैनात किया गया था। वहीं प्रशासन की तरफ से लक्ष्मण मेला मैदान के पास 20 एम्बुलेंस लगाई गईं थी। इस दौरान शिक्षामित्रों का एक डेलिगेशन अपनी मांगो को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करने पहुंचा।

इस डेलिगेशन की टीम में जितेंद्र शाही (अध्यक्ष आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसो.), गाजी इमाम आला (अध्यक्ष प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ), विश्व्नाथ कुशवाहा (महामंत्री आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसो. ), पुनीत चौधरी (महामंत्री प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ), अवनीश सिंह (प्रांतीय मंत्री), शिवकुमार शुक्ला (संरक्षक), रमेश मिश्रा, रीना सिंह, दीन नाथ दिक्षित, राकेश बाजपई शामिल थे।

शिक्षा मित्र विवाद : क्या है पूरा मामला

25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन रद्द करने के फैसले के बाद शिक्षामित्रों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। समायोजन रद्द होने के बाद से ही शिक्षामित्र संशोधित अध्यादेश लाकर पुनः सहायक शिक्षक बनाने व प्रक्रिया पूर्ण होने तक समान कार्य समान वेतन देने की मांग करते हुए जिला स्तर पर आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच कई दौर से वार्ता के बाद भी कोई हल ना निकलता देख शिक्षामित्रों ने 21अगस्त को गोमती तट पर प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन का ऐलान कर दिया था।

आंदोलन के पहले दिन शासन प्रशासन ने कई बार मुख्य सचिव राज प्रताप सिंह से वार्ता कराने का प्रस्ताव रखा। किंतु शिक्षामित्र मुख्यमंत्री से वार्ता करने पर ही अडिग रहे। 21 अगस्त की देर शाम अपर मुख्य सचिव ने शिक्षामित्रों के मूल पर प्रभाव से 10000 मानदेय देने, शिक्षामित्र कार्यालय का प्रति सत्र 2.5 अधिकतम 25 अंक भारांश देने और 15 अक्टूबर 2017 को शिक्षक पद पात्रता परीक्षा टीईटी परीक्षा आयोजित कराने का आदेश जारी कर दिया। जिसमें शिक्षामित्रों की खासा रोष बढ़ गया था।

वीडियो- शिक्षामित्रों का सत्याग्रह

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